राजधानी में प्रदूषण पर डबल एक्शन... छोटी सड़कों की मशीन से सफाई, IIT दिल्ली करेगा रियल-टाइम ट्रैकिंग

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण कम करने के लिए अहम फैसले लिए हैं. इसके तहत छोटी सड़कों पर मैकेनिकल सफाई बढ़ाई जाएगी और IIT-दिल्ली प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी करेगा. इसके साथ ही 30 इलेक्ट्रिक व्हीकल बेस्ड सफाई मशीनें मुहैया कराई जाएंगी और 609 किलोमीटर लंबी छोटी सड़कों को सफाई के दायरे में लाया जाएगा.

Advertisement
दिल्ली में प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए 30 EV बेस्ड सफाई मशीनों की मदद ली जाएगी. (File Photo- PTI) दिल्ली में प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए 30 EV बेस्ड सफाई मशीनों की मदद ली जाएगी. (File Photo- PTI)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:55 AM IST

दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ सरकार ने जमीनी कार्रवाई के साथ वैज्ञानिक निगरानी को मजबूत करने की दिशा में दो अहम फैसले लिए हैं. सरकार ने छोटी सड़कों की मशीन से सफाई बढ़ाने और प्रदूषण के स्रोतों की रियल-टाइम पहचान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई दिल्ली कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मोहर लगी. सरकार के मुताबिक, इन दोनों फैसलों का मकसद प्रदूषण को सिर्फ सर्दियों की समस्या के तौर पर देखने के बजाय पूरे साल उसके अलग-अलग स्रोतों पर कार्रवाई करना है.

Advertisement

इसके तहत दिल्ली नगर निगम को 30 इलेक्ट्रिक व्हीकल बेस्ड मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें मुहैया कराने के लिए फंड दिया जाएगा. वहीं, IIT दिल्ली के सहयोग से PM2.5 और PM10 के स्रोतों की लगातार रियल-टाइम निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा.

609 किमी छोटी सड़कों पर पहुंचेगी मैकेनिकल सफाई

कैबिनेट के फैसले के तहत 10 मीटर से कम राइट ऑफ वे वाली छोटी सड़कों को मैकेनिकल सफाई के दायरे में लाया जाएगा. सरकार के मुताबिक, ऐसी करीब 609 किलोमीटर लंबी सड़कों की पहचान की गई है, जिनमें 250 वार्डों की 854 सड़कें शामिल हैं. इन सड़कों पर अभी मशीनी से सफाई की सुविधा सीमित या मौजूद नहीं है.

सरकार का मानना है कि सड़क की धूल दिल्ली में पार्टिकुलेट प्रदूषण का एक अहम स्रोत है, इसलिए छोटी सड़कों को भी नियमित मैकेनिकल स्वीपिंग के दायरे में लाने से धूल के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी. इस योजना के तहत MCD को 30 EV बेस्ड मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी. मशीनों की जमीन पर तैनाती और संचालन की जिम्मेदारी MCD की होगी. 

Advertisement

सरकार के मुताबिक इस पूरी व्यवस्था पर अगले 10 सालों में करीब 393.73 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है. EV मशीनों से होगी सफाई सरकार ने इस व्यवस्था के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल बेस्ड मशीनों का इस्तेमाल करने का फैसला किया है. इसका मकसद सफाई व्यवस्था को मशीनीकृत करने के साथ-साथ सफाई प्रक्रिया में नए प्रदूषण के स्रोत को कम रखना है. सरकार का दावा है कि इस फैसले से उन छोटी सड़कों तक भी मैकेनिकल स्वीपिंग पहुंचेगी, जहां अभी मुख्य सड़कों की तरह नियमित मशीनीकृत सफाई नहीं हो पाती है.

IIT दिल्ली बताएगा- प्रदूषण आखिर आ कहां से रहा है

कैबिनेट के दूसरे फैसले के तहत दिल्ली में PM2.5 और PM10 के रियल-टाइम सोर्स अपोर्शनमेंट की व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसके लिए दिल्ली सरकार IIT दिल्ली के साथ मिलकर काम करेगी. इस तकनीक के जरिए ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि किसी समय दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषण में अलग-अलग स्रोतों का कितना योगदान है. इसमें वाहनों से होने वाला उत्सर्जन, सड़क की धूल, बायोमास जलाना और दूसरे प्रमुख स्रोत शामिल होंगे.

सरकार के मुताबिक, इस सिस्टम के जरिए प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और उनका वैज्ञानिक आकलन 24 घंटे लगातार किया जा सकेगा. इससे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण के वास्तविक स्रोतों के आधार पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. 

Advertisement

राउज एवेन्यू की सुपर साइट-मोबाइल लैब फिर होंगी सक्रिय

इस परियोजना के तहत राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को दोबारा वैज्ञानिक संचालन के लिए सक्रिय किया जाएगा. इसके साथ ही मोबाइल लैब को भी फिर से शुरू किया जाएगा. मोबाइल लैब की मदद से दिल्ली के अलग-अलग प्रदूषण हॉटस्पॉट और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का लक्षित अध्ययन किया जा सकेगा. 

इसके अलावा परियोजना में रियल-टाइम डैशबोर्ड, विश्लेषणात्मक रिपोर्ट और DPCC अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्य भी शामिल हैं. IIT दिल्ली के साथ ये सहयोग पांच सालों के लिए होगा और इस पर लगभग 19.22 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है.

सरकार का फोकस- पूरे साल प्रदूषण पर कार्रवाई

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को सिर्फ सर्दियों में बढ़ने वाली समस्या नहीं मानती, बल्कि पूरे साले इसके स्रोतों पर काम कर रही है. सरकार के मुताबिक, सड़क की धूल, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण और विध्वंस गतिविधियां, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा और बायोमास जलाना और हरित क्षेत्र बढ़ाना- सभी क्षेत्रों पर एक साथ काम किया जा रहा है.

यह भी पढ़ें: 50% स्टाफ को Work From Home, AQI बढ़ते ही स्कूल हाइब्रिड... दिल्ली-NCR में नया GRAP लागू

कैबिनेट के दोनों फैसलों को सरकार की प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का हिस्सा बताया गया है. एक तरफ छोटी सड़कों पर सीधे सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, वहीं दूसरी तरफ वैज्ञानिक निगरानी के जरिए ये पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रदूषण का असल सोर्स क्या है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »