दिल्ली की जेलों में कितने पाकिस्तानी, कितने बांग्लादेशी? RTI में खुलासा, कन्विक्शन रेट काफी कम

आरटीआई के जवाब में सामने आया कि 31 अगस्त 2026 को दिल्ली की जेलों में 766 विदेशी कैदी थे, जिनमें सिर्फ 37 सजायाफ्ता थे. विदेशी कैदियों की संख्या पांच साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची और 94% कैदी विचाराधीन पाए गए.

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दिल्ली की जेलों में सिर्फ 37 सजायाफ्ता कैदी हैं. (सांकेतिक तस्वीर) दिल्ली की जेलों में सिर्फ 37 सजायाफ्ता कैदी हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

अशोक उपाध्याय

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:54 AM IST

दिल्ली की तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में बंद विदेशी कैदियों को लेकर आजतक की एक्सक्लूसिव RTI में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली की जेलों में 766 विदेशी नागरिक बंद हैं. इनमें सिर्फ 37 को सजा सुनाई गई है. इनमें 12 पाकिस्तानी और 3 बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे. वहीं, बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक जेल में बंद थे, जबकि हिरासत में रखे गए सभी सात विदेशी नागरिक पाकिस्तान के थे.

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RTI के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में बंद 718 विदेशी नागरिकों में से 34 को सजा सुनाई गई थी. इनमें 12 पाकिस्तानी, 9 नाइजीरियाई और 3 बांग्लादेशी नागरिक शामिल थे. यानी विदेशी सजायाफ्ता कैदियों में पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या सबसे ज्यादा थी.

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विदेशी कैदियों में बाकी बड़ी संख्या उन लोगों की थी, जिनके मामलों में अदालत का फैसला आना बाकी था. 31 अगस्त 2026 तक विदेशी कैदियों की कुल संख्या बढ़कर 766 हो गई. इनमें 721 यानी करीब 94 फीसदी विचाराधीन कैदी थे. सिर्फ 37 विदेशी नागरिकों को सजा सुनाई गई थी. बाकी हिरासत में रखे गए लोग और अन्य श्रेणियों के कैदी थे.

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जेलों में बंद सभी सात विदेशी हिरासत वाले पाकिस्तानी

आंकड़ों में पाकिस्तान से जुड़ी एक और अहम जानकारी सामने आई है. दिसंबर 2025 तक दिल्ली की जेलों में हिरासत में रखे गए सातों विदेशी नागरिक पाकिस्तान के थे. इस श्रेणी में ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्हें मुकदमे के तहत विचाराधीन कैदी या सजा पाए कैदी के तौर पर नहीं, बल्कि प्रशासनिक या निवारक आदेशों के तहत हिरासत में रखा जाता है. देशवार सूची में किसी दूसरे देश का नागरिक इस श्रेणी में दर्ज नहीं था.

बांग्लादेश के 11 नागरिक, सिर्फ तीन को सजा

दिल्ली की जेलों में 31 दिसंबर 2025 तक बांग्लादेश के कुल 11 नागरिक बंद थे. इनमें आठ विचाराधीन कैदी और तीन सजायाफ्ता कैदी थे. कुल 718 विदेशी कैदियों में बांग्लादेशी नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 1.5 फीसदी थी.

इसकी तुलना नाइजीरिया से करें तो अंतर काफी बड़ा है. दिल्ली की जेलों में नाइजीरिया के 361 नागरिक बंद थे, जो कुल विदेशी कैदियों का करीब आधा हिस्सा था. नाइजीरियाई नागरिकों की संख्या बांग्लादेशियों से करीब 33 गुना ज्यादा थी.

बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या ऐसे समय चर्चा में है, जब देश में घुसपैठ और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है. हालांकि, दिल्ली की जेलों में बंद बांग्लादेशी नागरिकों का आंकड़ा देश में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की कुल संख्या या अवैध प्रवास का आकलन नहीं करता.
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विदेशी कैदियों की संख्या पांच साल में सबसे ज्यादा

RTI के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली की जेलों में विदेशी कैदियों की संख्या 2021 में 659 थी. दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 718 हो गई और 31 अगस्त 2026 को 766 पहुंच गई. यानी पांच साल के दौरान विदेशी कैदियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

इन आंकड़ों में सबसे अहम बात यह है कि विदेशी कैदियों में विचाराधीन लोगों की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है. अगस्त 2026 तक 766 विदेशी कैदियों में से 721 के मामलों में अंतिम फैसला नहीं आया था. वहीं, दिसंबर 2025 के देशवार आंकड़ों में पाकिस्तान के 12 और बांग्लादेश के तीन नागरिकों को सजा सुनाई गई थी. इस तरह RTI से मिले आंकड़े विदेशी कैदियों की संख्या के साथ-साथ उनके मामलों में सजा की स्थिति भी सामने रखते हैं.

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