दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा पर बड़ी टिप्पणी की. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि अमीर लोगों ने दिवाली पर एक-दूसरे को गिफ्ट देने को सामाजिक प्रतिष्ठा और स्टेटस सिंबल बना दिया है. इससे वाहनों की आवाजाही बढ़ती है और प्रदूषण में इजाफा होता है. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत है.
सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि शायद दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा बंद करने की जरूरत है. इस पर CJI ने कहा कि यही वह सांस्कृतिक बदलाव है, जिसकी जरूरत है. लोगों को समझना होगा कि हमारी असली संस्कृति क्या है और हमें क्या करना चाहिए. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि त्योहारों का व्यावसायीकरण और उन्हें सामान की तरह बेचना भी समस्या है.
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गरीबों की कमाई पर असर नहीं पड़ना चाहिए
एमिकस क्यूरी ने कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर गरीबों पर पड़ता है. इस पर CJI ने कहा कि दिवाली का समय गरीबों के लिए कमाई का भी मौका होता है. वे दीये और सजावट का सामान बेचने के लिए दुकानें और स्टॉल लगाते हैं. वे प्रदूषण नहीं फैलाते. प्रदूषण उन लोगों की वजह से बढ़ता है, जो गिफ्ट देने की परंपरा को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं और इसके लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं.
केंद्र की तरफ से पेश ASG ने कहा कि हर मानवीय गतिविधि से प्रदूषण होता है. दिल्ली देशभर से लोगों और प्रतिभाओं को आकर्षित करती है. इसके अलावा त्योहारों का मौसम और पराली जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है. सरकार ने लिंक रोड और पेरिफेरल रोड बनाए हैं. थर्मल पावर प्लांट को साफ ईंधन पर शिफ्ट किया जा रहा है. NCR में कोई भी उद्योग थर्मल पावर पर नहीं चल रहा, बल्कि गैस या बिजली का इस्तेमाल कर रहा है.
बच्चों के फेफड़ों पर प्रदूषण का असर
एमिकस क्यूरी ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर GRAP के तीसरे चरण के आसपास बना हुआ है. कई जगह AQI गंभीर या उससे भी खराब श्रेणी में है, लेकिन पूरे शहर का औसत निकालने से प्रदूषण की गंभीरता कम दिखाई देती है. उन्होंने कहा कि बच्चों के फेफड़े सबसे ज्यादा कमजोर होते हैं. जस्टिस बागची ने भी बच्चों के फेफड़ों पर प्रदूषण के असर को लेकर चिंता जताई.
कोर्ट ने केंद्र से BS6 मानकों के पालन की निगरानी के बारे में भी सवाल किया. ASG ने बताया कि दिल्ली में BS4 तक के नंबर प्लेट वाले वाहनों को अनुमति है. जस्टिस बागची ने खासतौर पर बड़ी गाड़ियों के BS4 और BS6 मानकों के पालन पर जानकारी मांगी.
वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अलग से सुनवाई
CJI ने कहा कि दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम की सड़कों पर हर जगह भारी ट्रैफिक दिखाई देता है. उन्होंने सवाल किया कि जब लोग सार्वजनिक परिवहन की कमी का हवाला देते हैं, तो इसे सुधारने के लिए क्या किया जा रहा है. ASG ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने और रिंग रोड के विस्तार पर काम हो रहा है. हालांकि, ये ऐसे कदम नहीं हैं जिनका असर तुरंत दिखे.
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एमिकस क्यूरी ने दिल्ली के बॉर्डर पर टोल प्लाजा की वजह से लगने वाले जाम और वाहनों के खड़े रहने से होने वाले प्रदूषण का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी और मार्च में टोल प्लाजा को शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ है. MCD की ओर से बताया गया कि नौ टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) मशीनें लगाई गई हैं, जिससे वाहनों को रुकना नहीं पड़ता. हालांकि, एमिकस क्यूरी ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर 126 टोल कलेक्शन सेंटर हैं.
CJI ने कहा कि ग्रीन पटाखों की अनुमति देने के बावजूद दुकानों पर उनके नाम पर दूसरे पटाखे बेचे जा रहे हैं. कोर्ट ने इस पर सख्ती से नियमों का पालन कराने की जरूरत बताई. साथ ही कहा कि दिवाली का जश्न प्रदूषण के प्रति जागरूकता के साथ मनाया जाना चाहिए. स्थानीय पार्षदों और RWA को भी लोगों से अपील करनी चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि वह सभी हलफनामों और रिपोर्ट्स को देखने के बाद निर्देश जारी करेगा. प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर मिली रिपोर्ट के आधार पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर भी अलग से विचार किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले को छुट्टियों के बाद तुरंत सुनवाई के लिए लिया जाएगा.
अनीषा माथुर