दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान कोर्टरूम में वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच बहस हो गई. वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान वकीलों की पिटाई की थी. इस दौरान कुछ वकीलों ने कोर्ट में पुलिसकर्मियों के बैठने की जगह को लेकर भी आपत्ति जताई. कल पिटाई का शिकार हुए वकील भी खुद अदालत में पेश हुए.
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम नंबर 18 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का लिंक काम नहीं कर रहा था. इस पर वकीलों ने अदालत से कोर्टरूम बदलने की मांग की. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होना है. ऐसे में लिंक का काम करना जरूरी है. वकीलों ने कोर्ट स्टाफ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक को तुरंत ठीक करने की मांग की.
वकील मेनका गुरुस्वामी ने भी इस मुद्दे पर आपत्ति जताई. उन्होंने कोर्ट स्टाफ से कहा कि बाहर की दुनिया को यह नहीं लगना चाहिए कि किसी एक पक्ष का साथ दिया जा रहा है. उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक बहाल करने की मांग की. इस दौरान कोर्टरूम में चल रही गतिविधियों की रिकॉर्डिंग किए जाने की बात भी सामने आई.
इसके बाद सुनवाई को 15 मिनट के लिए रोक दिया गया. कोर्ट रूम नंबर 5 में स्थानांतरित किया गया है. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दोबारा सुनवाई शुरू हुई.
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SC ने पूछा- क्या हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग पर्याप्त होगी?
वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि मेट्रो बंद करने और ट्रेनें रोकने से लोगों के आने-जाने के अधिकार का उल्लंघन हुआ है. उन्होंने दावा किया कि करीब 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया और 45 हिरासत केंद्र बनाए गए,
मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि यह याचिका किसी एक नेता या सांसद की हिरासत के लिए नहीं, बल्कि संविधान के अधिकारों की रक्षा के लिए है. उन्होंने एमरजेंसी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या यह अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है. उन्होंने कहा कि पिछली बार इस तरह अधिकारों के निलंबन की स्थिति आपातकाल के दौरान आई थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने एडीएम जबलपुर मामले में फैसला दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गुरुस्वामी से हेबियस कॉर्पस याचिका की मांग पर दोबारा विचार करने को कहा. कोर्ट ने पूछा कि क्या हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग पर्याप्त होगी. मेनका ने जवाब दिया कि याचिका दाखिल करते समय इंटरनेट बंद होने के कारण हिरासत में लिए गए नेताओं, पत्रकारों, वकीलों और आम नागरिकों की सही संख्या उपलब्ध नहीं थी.
जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट अपने पिछले आदेश के अंतिम पैराग्राफ पर ध्यान दे रहा है, जिसमें मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई थी. कोर्ट राज्य सरकार और जिन लोगों पर आदेश की अवमानना का आरोप है, उनसे जवाब दाखिल करने को कहेगा.
जस्टिस बागची बोले-कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा
वकील शोएब आलम ने कहा कि लोगों को उनके घरों से हिरासत में लिया गया और ट्रेनों से उतारा गया. उन्होंने दावा किया कि धारा 163 के दायरे से बाहर के इलाकों में जाने वाले लोगों को भी हिरासत में लिया गया. उन्होंने कहा कि तीन पूर्व मुख्यमंत्री, विपक्षी दलों के नेता और 6,000 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं.
जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट हिरासत में लिए गए लोगों की बड़ी संख्या और मामले की गंभीरता को समझता है. सरकार से इस पर जवाब मांगा जाएगा. पुलिस अधिकारियों पर हमले से जुड़ी याचिका पर जस्टिस बागची ने कहा कि अगर किसी पुलिसकर्मी को व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचा है, तो वह अलग से याचिका दायर कर सकता है. पुलिसकर्मी, वकील या आम नागरिक, सभी के अधिकारों की रक्षा करना कोर्ट की समान जिम्मेदारी है.
पूर्व पुलिस कमिश्नर की ओर से भी हस्तक्षेप याचिका दायर की गई. कोर्ट ने कहा कि सभी हस्तक्षेप याचिकाओं पर विचार किया जाएगा, लेकिन पहले लिस्टेड मामलों और हिरासत से जुड़े मामलों पर सुनवाई होगी.
सुनवाई के दौरान वकीलों ने की नारेबाजी
सुप्रीम कोर्ट में वकील सुमिता हजारिका ने बताया कि करीब 150 वकील सेतलवाड़ ब्लॉक के बाहर खड़े थे. जब वे वहां से चलने लगे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेना शुरू कर दिया. उन्होंने एक महिला पुलिसकर्मी से बैज या नाम दिखाने को कहा, लेकिन आरोप है कि पुलिसकर्मी ने कोई जवाब नहीं दिया और उन्हें घसीटकर पुलिस वैन में बैठा दिया.
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वकील कीर्ति उप्पल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों या कार्रवाई के खिलाफ ट्वीट करना भी अवमानना का मामला बन सकता है. उन्होंने कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी न्यायपालिका की संस्था की रक्षा करना है. इस दौरान कुछ वकीलों ने विरोध में ‘शेम-शेम’ के नारे लगाए, जिस पर कोर्ट ने सभी वकीलों को शांत रहने के लिए कहा.
जस्टिस बागची ने कहा कि याचिकाओं में सभी मुद्दों को विस्तार से उठाया गया है. कोर्ट पूरे मामले को सुनेगा. वहीं, परिवहन संघ की ओर से भी दलील दी गई कि प्रतिबंधों के कारण कारोबार करने का अधिकार प्रभावित हुआ है.
वकीलों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अलग-अलग याचिकाओं और आवेदनों का जिक्र किया. इनमें एमए बेबी, मेनका गुरुस्वामी, मनोज झा और अमन शर्मा की याचिकाएं शामिल हैं. सॉलिसिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SCAORA) ने भी वकीलों के साथ कथित मारपीट के मामले में याचिका दायर की है.
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एडवोकेट शादान फरासत ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ भी मारपीट की गई. उन्होंने कहा कि उन्हें चलती बस में फेंक दिया गया. वह अकेले नहीं हैं, बल्कि कई अन्य लोगों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया गया. उस दिन हालात दमनकारी थे. लोगों के विरोध करने के अधिकार को खत्म कर दिया गया.
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हरिहरन ने भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान प्रैक्टिस करने वाले वकीलों के साथ मारपीट की गई. उन्होंने इस संबंध में तस्वीरें पेश करने की कोशिश की. हालांकि, कोर्ट ने कहा कि तस्वीरें सीधे बार के जरिए न दी जाएं. उन्हें संबंधित आवेदन के साथ रिकॉर्ड पर रखा जाए.
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि एडवोकेट दिनेश द्विवेदी, शादान फरासत और उत्तरा बब्बर को जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र से काफी दूर हिरासत में लिया गया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर धारा 163 लागू की गई. उन्होंने शांतिपूर्वक जा रहे लोगों को हिरासत में लेने की जरूरत पर सवाल उठाया. आवाजाही पर लगे प्रतिबंध तुरंत हटाने की मांग की.
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अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि न्याय तक पहुंचने के अधिकार में वकीलों तक पहुंच भी शामिल है. उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों से मिलने गए वकीलों को भी रोका गया और उनके साथ मारपीट की गई. उन्होंने मैदान गढ़ी के संजय कॉलोनी पुलिस चौकी में वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लेने और पीटने का मामला भी उठाया.
वकीलों ने कहा कि इंटरनेट बंद होने के कारण निचली अदालतों और ट्रिब्यूनल में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाला काम प्रभावित हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरनेट सेवाएं जंतर-मंतर के चार किलोमीटर के दायरे से बाहर भी बंद की गईं. कुछ वकीलों ने अपने चैंबर से हिरासत में लिए जाने का मुद्दा भी उठाया.
सुनवाई के दौरान कुछ वकीलों ने नाराजगी जताते हुए नारे लगाए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी से शांत रहने और अनुशासन बनाए रखने को कहा. कोर्ट ने वकीलों से प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के वीडियो और स्क्रीनशॉट संबंधित आवेदनों के साथ रिकॉर्ड पर रखने को कहा.
जस्टिस बागची बोले-सभी को एक-एक कर सुनेंगे
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत के सामने दो मामले हैं. हालांकि, कुछ वकील ऐसे मामलों का भी उल्लेख करना चाहते हैं, जो सुनवाई की सूची में शामिल नहीं हैं. इस पर अदालत ने कहा कि सभी वकीलों को एक-एक करके सुना जाएगा. पहले मौखिक रूप से मामलों का उल्लेख सुना जाएगा और उसके बाद सूचीबद्ध मामलों पर सुनवाई होगी.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर वकील सिर्फ मामले का उल्लेख करने और उसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध कर रहे हैं, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. जस्टिस बागची ने कहा कि यह असाधारण और जरूरी सुनवाई है. इस दौरान वकीलों ने सुझाव दिया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और केके वेणुगोपाल को पहले अपनी बात रखने दी जाए. अदालत ने कहा कि केके वेणुगोपाल पहले बोलेंगे. जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत में उनके जैसे वरिष्ठ और सम्मानित वकील मौजूद हैं, इसलिए उन्हें पहले सुना जाएगा.
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जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत के सामने दो विकल्प हैं. पहला, अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई की जाए. दूसरा, दोनों पक्षों को सुनकर सभी संबंधित मामलों को एक साथ जोड़ दिया जाए. केके वेणुगोपाल ने अदालत से पूछा कि क्या इस मामले में नोटिस जारी किया जाएगा. इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि सॉलिसिटर जनरल को सुनने के बाद इस बारे में फैसला लिया जाएगा.
कपिल सिब्बल ने कहा कि एक याचिका अवमानना के मुद्दे से कहीं बड़े सवाल उठाती है. अदालत ने बताया कि मेनका गुरुस्वामी की ओर से हिरासत के खिलाफ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है. इसके अलावा एक दूसरी याचिका भी है. अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया जाएगा.
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू करने और प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर लोगों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने आरोप लगाया कि चार किलोमीटर के दायरे से बाहर भी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है. कुछ लोगों को ट्रेनों से भी उठाए जाने का दावा किया गया. सिब्बल ने दिल्ली मेट्रो बंद करने का मुद्दा भी उठाया. इस पर अदालत ने कहा कि एमए बेबी की याचिका में मेट्रो बंद करने से जुड़ा एक अंतरिम आवेदन पहले से मौजूद है.
वकीलों ने बिना आदेश सार्वजनिक किए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का मुद्दा भी उठाया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह माहौल को तनावपूर्ण नहीं बनाना चाहता. अदालत ने कहा कि वह जानती है कि इन घटनाओं से वकीलों को गहरी तकलीफ पहुंची है और वह किसी भी मुद्दे को छोटा करके नहीं देखना चाहती. सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने इस असाधारण सुनवाई के लिए अदालत का धन्यवाद किया. जस्टिस बागची ने जवाब दिया कि अदालत हमेशा देश की सेवा के लिए तैयार है.
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दरअसल, दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट में 4 से अधिक याचिकाएं दायर की गई हैं. इनमें नेताओं, वकीलों और आम लोगों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लेने का मुद्दा उठाया गया है. पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन के दौरान वकीलों के साथ मारपीट पर भी सवाल उठाए गए हैं.
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने राजनीतिक नेताओं और वकीलों की कथित गैरकानूनी हिरासत का मुद्दा उठाया है. वहीं, मनोज कुमार झा की याचिका में बड़े पैमाने पर हिरासत और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं. इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ नेताओं को उनके घरों से बाहर निकलने से भी रोका गया.
वकील अमन प्रसाद ने भी वकीलों और मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट और हिरासत का मामला उठाया है. उनकी याचिका में प्रदर्शन स्थल से दूर के इलाकों में आम लोगों को हिरासत में लेने का आरोप भी शामिल है.
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मेट्रो स्टेशन बंद करने का मामला भी पहुंचा कोर्ट
वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दिल्ली मेट्रो के स्टेशन बंद करने के मामले में अवमानना याचिका दायर की थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है. याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद कई मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद रखे गए.
इससे पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षा के नाम पर सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए. प्रशासन व्यवस्था को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन आम यात्रियों, छात्रों और कामगारों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए.
इस मामले में परिवहन से जुड़े एक संगठन ने भी सड़कें बंद होने से परिवहन सेवाओं और कारोबार पर असर पड़ने का मुद्दा उठाया है. फिलहाल सुनवाई के दौरान वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई और कोर्टरूम में हुई व्यवस्थाओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
संजय शर्मा / अनीषा माथुर