बेला एस्टेट वोटर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. इसने वोटर लिस्ट की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर दिया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से 728 नाम हटा दिए गए. राहुल गांधी ने 'वोट चोरी' का क्सासिक उदाहरण बताया. हालांकि, सत्यापन में शामिल BLO ने बिल्कुल उलट बात बताई है.
आजतक की जमीनी जांच में पता चला कि बेला एस्टेट में कई परिवार बिजली-पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव के झुग्गियों में रह रहे थे. वहीं, आजतक को मिले दस्तावेज़ों से पता चलता है कि बड़ी संख्या में SIR फॉर्म में एक ही सामान्य पता लिखा था.
BLO ने आजतक से फोन पर बात करते हुए बताया कि जब वे पते पर गई तो उन्हें वहां कोई घर नहीं मिला. BLO का कहना है कि इलाका सौंपे के जाने बाद वे पुरानी वोटर लिस्ट में वोटर्स के दर्ज पतों पर खुद गई लेकिन उन्हें वहां न ही कोई घर मिला और न ही वोटर्स.
BLO ने उस जगह को एक सुनसान इलाका बताया. उनका दावा है कि जब वे वहां पहुंची तो वह इलाका सुनसान था, सिर्फ कुछ कच्चे घर ही थे. उनका कहना है कि उन्होंने सत्यापन प्रक्रिया का पालन करते हुए रिपोर्ट अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी.
इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास लिस्ट में दिए गए पतों पर जाने की वीडियो रिकॉर्डिंग है और यह फुजेट उन्होंने अधिकारियों के साथ साझा भी की है.
एक पते पर सैकड़ों वोटर्स?
आजतक को मिले SIR फ़ॉर्म इस विवाद में एक और पहलू जोड़ते हैं. आजतक ने जो फॉर्म्स देखे हैं उसमें से ज्यादातर में एक ही पता लिखा है — "एग्रीकल्चर JJ बेला एस्टेट" या "एग्रीकल्चर लैंड."
कई फ़ॉर्म में घर का खास नंबर या साफ तौर पर पहचाने जाने लायक अलग-अलग पते नहीं दिखे. आजतक को ऐसे करीब 20 फ़ॉर्म मिले हैं जिनमें पता "एग्रीकल्चर JJ बेला एस्टेट" या "एग्रीकल्चर लैंड" लिखा था, लेकिन कोई साफ पहचान या निशान नहीं था. इसके अलावा, BLO ने यह भी दावा किया कि कई SIR फॉर्म एक ही लिखावट में भरे हुए लग रहे थे और उन पर एक ही पता लिखा था.
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क्या है जमीनी हकीकत
आजतक ने बेला एस्टेट साइट का दौरा किया और पाया कि वहां परिवार अस्थायी ढांचों में रह रहे थे. वहां रहने वाले परिवारों के पास बिजली-पानी जैसी सुविधाएं भी नहीं थी.
स्थानीय महिला मंजू ने दावा किया कि उनका परिवार बेला एस्टेट में रह रहा था और उनके पास वोटर ID कार्ड भी था. उन्होंने कहा, 'मेरा जन्म यहीं 1998 में हुआ था. मेरे पास अपना वोटर ID कार्ड, पैन कार्ड और बैंक जानकारी है. फिर भी, मेरा नाम हटा दिया गया है. यह हमें नागरिक मानने से इनकार करने जैसा है.'
एक और स्थानीय निवासी कमल ने भी ऐसी ही शिकायत की है. उन्होंने 1961 से चली आ रही वोटर लिस्ट दिखाते हुए दावा किया कि उनके पिता और दादा के नाम बाद की लिस्ट में साफ तौर पर दर्ज नहीं थे.
इन अलग-अलग दावों के बाद सवाल यही उठ रहा है कि इन 728 वोटरों का वेरिफिकेशन कैसे किया गया और उनके नाम क्यों हटाए गए.
राहुल गौतम