सांप काटने से मौत का फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर लेते थे मुआवजा, डॉक्टर, वकील समेत 19 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सांप के काटने से मौत का फर्जी दावा कर 64 लाख रुपये का सरकारी मुआवज़ा हड़पने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने डॉक्टर, दो होमगार्ड, वकील, बैंक कर्मचारी और सरकारी कर्मियों समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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आरोपियों ने 2019 से लेकर 2024 के बीच किया था फर्जीवाड़ा.  (Photo: Representational ) आरोपियों ने 2019 से लेकर 2024 के बीच किया था फर्जीवाड़ा. (Photo: Representational )

aajtak.in

  • बिलासपुर,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:25 PM IST

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक डॉक्टर, दो होम गार्ड और एक वकील समेत 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इन पर आरोप है कि इन्होंने सांप के काटने से मौत का मुआवज़ा पाने के लिए फ़र्ज़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाईं और लाखों रुपये हड़प लिए. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी.. 

बिलासपुर के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SSP) रजनेश सिंह ने बताया कि इस गिरोह ने मेडिकल और रेवेन्यू से जुड़े दस्तावेज़ों में हेराफेरी की और प्राकृतिक या अन्य कारणों से हुई मौतों के लिए 'रेवेन्यू बुक सर्कुलर 6-4' स्कीम के तहत सरकारी मुआवज़े के तौर पर 64 लाख रुपये धोखाधड़ी से हासिल किए.

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19 लोगों को किया गया है गिरफ्तार
जांच के मुताबिक नवंबर 2019 से फरवरी 2024 के बीच इस धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए गिरोह के हर सदस्य की अलग-अलग भूमिका थी. सिंह ने बताया कि पुलिस ने अब तक बिलासपुर के सरकंडा, सिविल लाइन्स, कोनी, सिटी कोतवाली, सिरगिट्टी और तोरवा पुलिस स्टेशनों में 16 FIR दर्ज की हैं और पिछले कुछ दिनों में 19 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि गिरोह के बाकी सदस्यों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं.

आरोपियों में से डॉक्टर प्रियंका सोनी (37), जो MBBS और MD हैं, को रविवार को महाराष्ट्र के नागपुर से पकड़ा गया, जबकि होम गार्ड रामकुमार पाटनवार (40) और रामेश्वर भास्कर (53) को सोमवार को गिरफ्तार किया गया. अधिकारी ने बताया कि जब ये अपराध किए गए, तब ये तीनों छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (CIMS), बिलासपुर में तैनात थे.

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ऐसे तैयार करते थे फर्जी सर्टिफिकेट
पुलिस के मुताबिक, जब भी अस्पताल में कोई शव आता था, तो होम गार्ड गिरोह को इसकी जानकारी देते थे, जबकि एक वकील शोक-संतप्त परिवारों को सांप के काटने से मौत का झूठा दावा करने के लिए मनाता था और फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट का इंतज़ाम करता था. जांच से पता चला है कि आरोपियों ने बीमारी, कैंसर, आत्महत्या और अन्य कारणों से हुई मौतों के पुराने मामलों का इस्तेमाल किया और CIMS के डॉक्टरों के नाम से फ़र्ज़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कीं, जिनमें मौत का कारण सांप का काटना बताया गया.

सिंह ने बताया कि गिरोह ने दस्तावेज़ों को असली दिखाने के लिए डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, पटवारियों और अन्य सरकारी अधिकारियों की मुहर और हस्ताक्षर फ़र्ज़ी तरीके से बनाए. इन फ़र्ज़ी रिकॉर्ड्स के आधार पर मुआवज़े के दावे मंज़ूर किए गए और पैसे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए गए. जिसके बाद इसे आरोपियों के बीच बांट लिया गया. जांच में अब तक मुआवज़े के 16 फ़र्ज़ी दावे सामने आए हैं. जिनमें कुल मिलाकर लगभग 64 लाख रुपये का भुगतान किया गया था.

अधिकारी ने बताया कि हर मामले में लाभार्थियों को कथित तौर पर लगभग 50,000 रुपये दिए गए, जबकि बाकी रकम सिंडिकेट ने अपने पास रख ली और अपने सदस्यों में बांट ली. गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में कथित सरगना और वकील हीरा प्रसाद खांडेकर, बैंक कर्मचारी कुश कुमार गुप्ता, दिहाड़ी मज़दूर गोविंद विश्वकर्मा और सरकारी कर्मचारी गरीब राम बिजवाड़, नरेंद्र कौशिक और हरिशंकर राठौर शामिल हैं.

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लाभार्थियों की भी पहचान में जुटी पुलिस
अधिकारी ने बताया कि तहसील कार्यालय से जुड़े दिहाड़ी मज़दूर विश्वकर्मा ने वहां तैनात सरकारी कर्मचारियों की मदद से फ़ाइलें प्रोसेस करने और मंज़ूरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो आरोपियों ने शवों के साथ छेड़छाड़ करके सांप के काटने जैसे निशान बनाए और फिर जांच और पोस्टमार्टम रिकॉर्ड में हेरफेर की. 

अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस ने सरकारी मुहरें, फ़र्ज़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, जांच रिकॉर्ड, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बैंक खाता फ़ॉर्म, कंप्यूटर, प्रिंटर, नकद और अन्य आपत्तिजनक सामान ज़ब्त किए हैं. उन्होंने कहा कि उन लाभार्थियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की पहचान करने के लिए जांच चल रही है जो इस कथित धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं. 

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