इस बार दिल्ली समेत देश के कुछ दूसरे इलाकों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं. डॉक्टरों का भी कहना है कि इस बार केस ज्यादा देखे जा रहे हैं. स्वाइन फ्लू को इन्फ्लूएंजा A(H1N1) कहते हैं. इसके केस क्यों बढ़ रहे हैं. किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है. कैसे इससे बचाव करें? डॉक्टरों ने इस बारे में डिटेल में बताया है.
डॉक्टरों के मुताबिक, अब स्वाइन फ्लू एक ऐसा संक्रमण बन गया है.जो मानसून के मौसम में बढ़ता ही है. इस बार मानसून का लंबा मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और वायरस के अधिक एक्टिव होने के कारण स्वाइन फ्लू के ज्यादा केस आ रहे हैं. हालांकि सभी लोगों को इससे घबराने की जरूरत नहीं है. आउटपेशेंट (OPD) में आने वाले अधिकतर मरीजो में बीमारी हल्की होती है और सही देखभाल से वे ठीक हो जाते हैं, इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है, बस बचाव और रोकथाम के लिए आइसोलेशन की ज़रूरत होती है.
किन लोगों को है ज्यादा खतरा?
गुरुग्राम के फोर्टिस हॉस्पिटल में संक्रामक रोग विभाग में डॉ. नेहा रस्तोगी पांडा ने इस बारे में आजतक. इन को बताया है. वह कहती हैं कि इस मौसम में ज्यादा समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार देखा जा रहा है, जिसका कारण खराब AQI (हवा की गुणवत्ता) की वजह से फेफड़ों में होने वाली सूजन है. इस बार 20-30% मामलों में, खासकर छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं, कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज़ों और पहले से फेफड़ों की पुरानी बीमारी, दिल की बीमारी, डायबिटीज, किडनी की बीमारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों में सांस लेने में तकलीफ जैसी परेशानी हो सकती है. इन लोगों को स्वाइन फ्लू से अधिक खतरा हो सकता है.
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WHO के अनुमान के मुताबिक, मौसमी इन्फ्लूएंजा से हर साल दुनिया भर में लगभग एक अरब लोग संक्रमित होते हैं, जिनमें से लगभग 30 से 50 लाख मामले गंभीर होते हैं, इसलिए बचाव बहुत जरूरी है.
स्वाइन फ्लू के यह लक्षण दिखते हैं
सीताराम भारतीय इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस ऐंड रिसर्च में मेडिसिन विभाग में डॉ हरजीत सिंह भट्टी बताते हैं कि स्वाइन फ्लू से संक्रमित होने पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में तेज दर्द, नाक से जुड़ी समस्याएं और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. ज्यादातर मामलों में आराम और लक्षणों के आधार पर इलाज की जरूरत होती है, जिसमें खास तौर पर शुरुआती 72 घंटों में एंटीवायरल दवा 'ओसेल्टामिविर' दी जाती है.
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इन लक्षणों के दिखते ही अस्पताल जाएं
डॉ. हरजीत के मुताबिक, अगर किसी को सांस लेने में तकलीफ, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, लगातार या बढ़ता हुआ बुखार, सीने में बेचैनी, बहुत ज्यादा नींद आना या हालत बिगड़ने जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत इलाज की जरूरत होती है.
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए जरूरी है कि डॉक्टर की सलाह पर वैक्सीन लगवा ले. हाथ धोकर भोजन करें और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में ना आएं.
आजतक हेल्थ डेस्क