बारिश के इस मौसम में H1N1 ( स्वाइन फ्लू) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, देश की राजधानी दिल्ली में इससे 2 मरीजों की मौत हो गई है. हालांकि दिल्ली सरकार का कहना है कि किसी मरीज की मौत नहीं हुई है. फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली का स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क है.
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने कहा कि बारिश का मौसम शुरू होने के साथ ही सरकार "एक्टिव मोड" में काम कर रही है और सभी सरकारी अस्पतालों को संभावित मरीजों के इलाज के लिए पूरी तरह तैयार रखा गया है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अस्पतालों को निर्देश दिए गए हैं कि डेंगू के लक्षण लेकर आने वाले हर मरीज की तुरंत जांच और उचित इलाज सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं ताकि किसी भी मरीज को इलाज में देरी न हो.
मंत्री के मुताबिक, दिल्ली में अब तक डेंगू के कुल 1,179 मामले सामने आए हैं, जबकि 210 मरीज दिल्ली के बाहर के हैं, जिनका इलाज राजधानी के अस्पतालों में किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार की तैयारियों और समय पर इलाज के कारण मरीज स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं. H1N1 संक्रमण को लेकर भी स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग रोजाना टेस्टिंग कर रहा है। अब तक 1,344 लोगों की रिपोर्ट H1N1 पॉजिटिव आई है और सभी मरीजों का इलाज जारी है. उन्होंने कहा कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
H1N1 फ़्लू, जिसे कभी-कभी स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है, इन्फ्लूएंज़ा A वायरस का एक टाइप है. 2009-10 के फ्लू सीजन के दौरान, एच1N1 वायरस ने इंसानों में बीमारी फैलानी शुरू की थी. इसे स्वाइन फ्लू कहा जाता था और यह इन्फ्लूएंजा वायरस का एक नया कॉम्बिनेशन था जो सुअर, पक्षियों और इंसानों को संक्रमित करता है.
2009 में H1N1 फ़्लू को महामारी घोषित किया
दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि ने इस बारे में बताया है. वह कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2009 में H1N1 फ्लू को महामारी घोषित किया. उस साल इस वायरस के कारण दुनिया भर में 284,400 लोगों की मौत हुई थी. अगस्त 2010 में, WHO ने महामारी के खत्म होने की घोषणा की, लेकिन महामारी वाला H1N1 फ्लू स्ट्रेन, सीज़नल फ्लू का कारण बनने वाले स्ट्रेन में से एक बन गया. फिर हर साल बारिश के मौसम में इसके केस आने लगे. हालांकि ये पहले जितना घातक तो नहीं रह. सीज़नल फ़्लू बचाव के लिए लगने वाली वैक्सीन भी H1N1 फ्लू और अन्य सीज़नल फ़्लू वायरस से बचाव के लिए लगने लगी.
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स्वाइन फ्लू के लक्षण क्या होते हैं
डॉक्टर को कब दिखाएं
अगर आप आम तौर पर स्वस्थ हैं और आपको फ्लू लक्षण दिखते हैं, तो अधिकतर लोगों को डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन कुछ लोगों को फ्लू से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा ज्यादा रहता है.
बुखार के साथ ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं
अगर ये लक्षण हैं तो अस्पताल में मरीज का एच1एन1 फ्लू का टेस्ट होगा. अगर टेस्ट में संक्रमण की पुष्टि होती है तो उसके हिसाब से इलाज किया जाएगा.
कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू
H1N1 जैसे इन्फ्लूएंजा वायरस आपकी नाक, गले और फेफड़ों की अंदरूनी परत वाली सेल्स को संक्रमित करते हैं, यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने से फैलता है. जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के छींकने के बाद निकलने वाली संक्रमित बूंदों वाली हवा में सांस लेते हैं, तो वायरस उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है. यह शरीर में तब भी प्रवेश कर सकता है जब आप किसी संक्रमित सतह को छूते हैं और फिर अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूते हैं
स्वाइन फ्लू से बचाव कैसे करें
हाथ धोकर भोजन करें
फ्लू जैसे लक्षण दिख रहे हैं तो मास्क लगाएं
डॉक्टर की सलाह पर फ्लू वैक्सीन लगवाएं
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें
-रिपोर्टर सुशांत मेहरा के इनपुट के साथ-
आजतक हेल्थ डेस्क