PSA रिपोर्ट नॉर्मल है तो भी हो सकता है प्रोस्टेट कैंसर, गंगाराम के डॉक्टर से जानें कौन से लक्षण जरूर देखें

प्रोस्टेट कैंसर केवल पुरुषों में होता है. बीते कुछ सालों में इसके केस बढ़ रहे हैं. इस कैंसर की पहचान के लिए PSA ब्लड टेस्ट किया जाता है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इसकी रिपोर्ट नॉर्मल होने का ये मतलब नहीं है कि प्रोस्टेट कैंसर नहीं होगा.

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प्रोस्टेट कैंसर के लिए PSA टेस्ट ( PHOTO-ITGD) प्रोस्टेट कैंसर के लिए PSA टेस्ट ( PHOTO-ITGD)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

बीते कुछ सालों में देश में प्रोस्टेट कैंसर के केस बढ़ रहे हैं. इस कैंसर का पता लगाने के लिए PSA (प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन) टेस्ट किया जाता है. लेकिन क्या PSA रिपोर्ट नॉर्मल आने का मतलब यह है कि प्रोस्टेट कैंसर का खतरा पूरी तरह खत्म हो गया है? इस सवाल का जवाब हमें सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टर ने दिया है.

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इसका जवाब जानने से पहले आपको ये बता देते हैं कि PSA टेस्ट क्या होता है. PSA एक प्रोटीन है. इसकी थोड़ी मात्रा खून में भी पाई जाती है. PSA ब्लड टेस्ट के जरिए खून में इस प्रोटीन का लेवल चेक किया जाता है. अगर किसी को प्रोस्टेट कैंसर है तो खून में इस प्रोटीन का लेवल बढ़ सकता है. प्रोस्टेट कैंसर की जांच और प्रोस्टेट से जुड़ी दूसरी स्थितियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर इस टेस्ट को करते हैं. 

PSA का लेवल नॉर्मल होने के बाद भी क्या हो सकता है कैंसर? 

इस बारे में गंगाराम अस्पताल के सीनियर यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रोबोटिक सर्जन डॉ. अश्विन माल्या ने बताया है. डॉ माल्या कहते हैं कि PSA टेस्ट प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं का पता लगाता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. ऐसा जरूरी नहीं है कि PSA का लेवल नॉर्मल है तो पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर नहीं हो सकता है. इसलिए केवल एक ब्लड टेस्ट के आधार पर कैंसर की मौजूदगी है या नहीं ये कहना ठीक नहीं है.  कुछ प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर होते हैं, जैसे न्यूरोएंडोक्राइन डिफरेंसिएशन  में, पीएसए नॉर्मल या कम होते हुए भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है. 

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कुछ मामलों में कैंसर मौजूद होने के बावजूद PSA का लेवल नॉर्मल आ सकता है.अकसर 4 ng/mL से कम PSA स्तर को नॉर्मल माना जाता है, लेकिन यह कोई ऐसा पैरामीटर नहीं है, जिसके आधार पर कैंसर की संभावना को पूरी तरह नकारा जा सके.

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, PSA स्तर 4 ng/mL से कम होने के बावजूद बायोप्सी कराने वाले कुछ पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर पाया गया है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि नॉर्मल PSA रिपोर्ट वाले हर व्यक्ति को कैंसर का खतरा है या उसे तुरंत बायोप्सी करानी चाहिए. कुछ प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर होते हैं, जैसे न्यूरोएंडोक्राइन डिफरेंसिएशन  में, पीएसए नॉर्मल या कम होते हुए भी प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है.  

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किन लक्षणों को नहीं करना चाहिए नजरअंदाज?

पेशाब करने में कठिनाई, पेशाब की धार कमजोर होना, बार-बार पेशाब आना, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना और पेशाब के बाद भी ब्लैडर खाली न होने का एहसास जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, हालांकि, ये लक्षण प्रोस्टेट के सामान्य रूप से बढ़ने या अन्य बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं. केवल इन लक्षणों से कैंसर की पुष्टि नहीं होती है. अगर पेशाब में खून आए, लगातार कमर या पेल्विक एरिया में दर्द हो या पेशाब संबंधी परेशानी बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है.

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PSA के अलावा कौन-सी जांच हो सकती है जरूरी?

अगर PSA रिपोर्ट सामान्य है, लेकिन डॉक्टर को लक्षणों के आधार पर कैंसर की आशंका लगती है, तो वे डिजिटल रेक्टल एग्जाम (DRE) की सलाह दे सकते हैं. इसमें डॉक्टर प्रोस्टेट की बनावट और किसी असामान्य गांठ को देखते हैं. जरूरत पड़ने पर प्रोस्टेट का MRI, अन्य विशेष ब्लड टेस्ट या बायोप्सी भी की जा सकती है, हालांकि, हर व्यक्ति को इन सभी जांचों की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर जांच का निर्णय लेते हैं.

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उम्र और फैमिली हिस्ट्री भी जरूरी

प्रोस्टेट कैंसर का खतरा उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता है. जिन पुरुषों के पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर हुआ हो, उन्हें भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत हो सकती है, ऐसे पुरुषों को PSA जांच कब शुरू करनी चाहिए और कितने अंतराल पर करानी चाहिए, इस बारे में डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए.

 

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