विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल 0 से 19 साल के लगभग 4 लाख बच्चे और किशोर कैंसर की चपेट में आते हैं. विकसित देशों में सही इलाज मिलने से 80% से अधिक बच्चे ठीक हो जाते हैं, जबकि विकासशील देशों में यह दर केवल 30% के आसपास है.भारत में भी इसका बड़ा प्रभाव देखा जा सकता है. साल 2012 से 2019 के बीच दर्ज आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में पाए जाने वाले कुल कैंसर के मामलों में 36% मामले ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर और 12% मामले लिम्फोमा के थे. ये वह कैंसर है जिनका कई मामलों में शुरूआत में पता नहीं चल पाता है. इन कैंसर में शरीर में लगातार थकान रहती है और वजन भी कम होने लगता है. अधिकतर मामलों में देरी से इसकी पहचान हो पाती है.
डॉक्टरों का कहना है कि ल्यूकेमिया बच्चों में सबसे ज्यादा होने वाला कैंसर है. यह बहुत खतरनाक है. यह तब होता है जब बोन मैरो में खून की सेल्स के डीएनए में बदलाव होता है. सेल्स तेजी से बाहर बढ़ने लगती हैं और हेल्दी ब्लड सेल्स की जगह ले लेती हैं, इससे शरीर की संक्रमण से लड़ने और ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कमजोर होने लगती है. अगर समय पर बच्चे का इलाज न हो तो ये कैंसर जानलेवा भी साबित होता है. ऐसे में इसके लक्षणों का पता जरूर होना चाहिए. अगर किसी माता- पिता को अपने बच्चे में ये लक्षण दिख रहे हैं तो इस कैंसर की जांच के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
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क्या होते हैं इसके लक्षण
लगातार थकान
कमजोरी
बार-बार बुखार आना
वजन कम होना
स्किन पर आसानी से नील पड़ना
पर्सनल ट्रीटमेंट हो रहा फायदेमंद
राहत की बात यह है कि अब मेडिकल साइंस में काफी बदलाव आ रहे हैं. अब सटीक इलाज से इसको ठीक किया जा सकता है.अब बच्चे के जेनेटिक प्रोफाइल और बायोमार्कर को समझकर पर्सनल ट्रीटमेंट दिया जा सकता है. अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (NCI) के अनुसार, अब 98% बच्चे शुरुआती रिकवरी कर लेते हैं और 90% से अधिक बच्चे 5 साल बाद भी पूरी तरह स्वस्थ जीवन जीते हैं.
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CAR-T थेरेपी से हो रहा इलाज
CAR-T थेरेपी इलाज की सबसे आधुनिक तकनीकों में है. इसमें मरीज के अपने शरीर से T सेल्स को निकालकर लैब में इस तरह मॉडिफाई किया जाता है कि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खुद नष्ट कर सकें. जिन बच्चों पर पुरानी दवाएं काम करना बंद कर देती हैं उनमें इस CAR-T थेरेपी के बाद 70% से 90% तक सुधार देखा गया है. क्रायोविवा लाइफसाइंस की मेडिकल स्पोकपर्सन डॉ. गीतिका जस्सल कहती हैं कि अब कैंसर ट्रीटमेंट का रुख कॉर्ड ब्लड को इकट्ठा करने, सुरक्षित रखने और सेलुलर रिसर्च की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है .कुल मिलाकर अब बच्चों में कैंसर का इलाज अब केवल कड़वी दवाओं और रेडिएशन तक सीमित नहीं है
आजतक हेल्थ डेस्क