18वीं मंजिल से गिर गया था लड़का, नहीं थी बचने की उम्मीद... डॉक्टरों ने ऐसे दी नई जिंदगी

गाजियाबाद के वसुंधरा में 15 साल का लड़का 18वीं मंजिल से गिर गया था, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और कई अंगों को गंभीर चोटें आईं. अस्पताल में करीब दो महीने तक इलाज के बाद उसकी हालत स्थिर हो गई है.

Advertisement
सर्जरी करते डॉक्टर सर्जरी करते डॉक्टर

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:26 PM IST

गाजियाबाद के वसुंधरा में रहने वाला एक 15 साल का लड़का अपनी बिल्डिंग की 18 वीं मंजिल से एक हादसे के दौरान गिर गया था. गिरने के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी टूट चुकी थी, छाती, फेफड़ों, लिवर और अन्य अंगों तथा सॉफ्ट टिश्यू में गंभीर चोटें आई थीं. लड़का हाइपोटेंसिव शॉक की हालत में हॉस्पिटल पहुंचा था. बस उसकी सांस की चल रही थी बाकी शरीर की स्थिति पूरी खराब हो चुकी थी. लेकिन करीब 2 महीने तक अस्पताल के अलग- अलग डॉक्टरों ने उसका इलाज किया और कई ऑपरेशन किए गए .अब लड़के की छुट्टी हो गई है और उसकी हालत स्थिर है.

Advertisement

इस लड़के को अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया. कई बार ब्लड और फ़्लूड ट्रांसफ़्यूज़न और इनोट्रोपिक दवाओं की जरूरत पड़ी. डॉक्टरों ने पाया कि उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी और अपनी जगह से हट गई थी, साथ ही हीमोथोरैक्स और कई पसलियों में फ्रैक्चर है. लिवर में चोट, दाहिने हाथ और बाएं पैर में फ्रैक्चर, सिर पर बहुत गहरा घाव है और नाक की हड्डी टूट गई थी. कूल्हे के हिस्से और दाहिनी जांघ पर स्किन और टिश्यू उखड़ गए थे. ऐसे में उसका इलाज काफी मुश्किल था. 

सबसे पहल रीढ़ की हड्डी का किया इलाज

इस 15 साल के लड़के का इलाज यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने किया. डॉक्टरों के मुताबिक,  अस्पताल के अलग- अलग विभागों जैसे न्यूरोसर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, प्लास्टिक, एस्थेटिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी, क्रिटिकल केयर, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, कार्डियोलॉजी के डॉक्टरों ने मिलकर इस लड़क का 2 महीने तक इलाज किया. जब लड़का अस्पताल में लाया गया तो हालत इतनी गंभीर थी कि एक साथ कई सर्जरी नहीं की जा सकती थीं, इसलिए इलाज करने वाली टीमों को यह तय करना पड़ा कि किस चोट का इलाज सबसे पहले ज़रूरी है.

Advertisement

ऐसे में परिवार के साथ विस्तार से बातचीत करने और जोखिम भरे इलाज के लिए उनकी सहमति लेने के बाद यशोदा मेडिसिटी में न्यूरोसर्जरी के प्रिंसिपल डायरेक्टर और यूनिट हेड डॉ. राजिंदर कुमार ने मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्रॉमा और सर्जिकल टीमों के साथ मिलकर पहली बड़ी प्रक्रिया के तौर पर स्पाइनल फिक्सेशन किया. बाद में जब हालत स्थिर हो गई, तो बाकी चोटों का इलाज अलग-अलग चरणों में किया गया.

यह भी पढ़ें: Heart attack Causes : हर हार्ट अटैक ब्लॉकेज की वजह से नहीं होता, डॉक्टरों ने बताया ये भी हैं बड़े कारण

बहुत मुश्किल था इलाज

डॉ राजिंदर कुमार ने बताया कि यह मामला बहुत ज़्यादा खतरे से भरा था. इसमें कई जानलेवा चोटें थीं और बहुत ज़्यादा खून बह गया था. सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना था कि मरीज़ के गहरे शॉक में होने के बावजूद सबसे पहले किस चीज का इलाज किया जाए. रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर, डिसलोकेशन और कॉर्ड की चोट को देखते हुए मरीज़ की अस्थिर हालत के बावजूद रीढ़ की हड्डी का इलाज जरूरी था. सबसे पहले ऑपरेशन से इसको ठीक किया.  एक बार जब रीढ़ की हड्डी स्थिर हो गई, तो बाकी चोटों का इलाज धीरे- धीर किया गया. 

इसके बाद के इलाज में कई फ्रैक्चर को ऑर्थोपेडिक तरीके से ठीक किया, सिर की स्किन के घाव को भरा गया और नाक के फ्रैक्चर का इलाज भी किया.स्किन के बड़े हिस्से के उधड़ जाने (डीग्लोविंग) के कारण इस लड़के की बार-बार घाव की ड्रेसिंग होती थीऔर सर्जरी की ज़रूरत भी पड़ी थी. इलाज के इस लंबे दौर में पीडियाट्रिक ICU टीम  में क्रिटिकल देखभाल के दौरान कई डॉक्टरों ने लड़के का इलाज किया और ठीक होने के समय आई मुश्किलों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्या BP की दवाएं हमेशा खानी पड़ती है? दवा छोड़ने से हार्ट अटैक का खतरा कितना, डॉक्टर से जानें

दो महीने अस्पताल में रहने के बाद दे दी गई छुट्टी

मरीज को इलाज के दौरान लगातार क्रिटिकल केयर में रखा गया.लगभग दो महीने तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद किशोर को छुट्टी दे दी गई है. अब उसे आगे भी नियमित फॉलो-अप और रिहैबिलिटेशन की आवश्यकता होगी. किशोर के ठीक होने का यह मामला गंभीर रूप से घायल मरीजों के इलाज में तेजी से उनकी हालत स्थिर करने, विशेषज्ञों की देखरेख को दर्शाता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »