रसोई में चाकू से हल्की कट लगी, पैर में जूते से छाला पड़ गया या चलते समय छोटी सी खरोंच आ गई. सामान्य व्यक्ति में ऐसे घाव कुछ दिनों में ठीक होने लगते हैं. लेकिन डायबिटीज के जिन मरीजों में शुगर लेवल बढ़ा रहता है उनमें यही छोटा घाव कई बार लंबे समय तक बना रह सकता है. डॉक्टर बताते हैं कि डायबिटीज के जिन मरीजों का शुगर लेवल बढ़ा होता है उनको पैरों की जांच करना भी जरूरी है.
डायबिटीज में घाव देरी से क्यों भरता है पैरों की जांच क्यों करनी चाहिए. इस बारे में जानते हैं. घाव भरने के लिए शरीर में खून से लेकर ऑक्सीजन कर सही लेवल और इम्यून सिस्टम का अच्छा होना जरूरी है. लेकिन शुगर लेवल बढ़ने पर इसपर असर पड़ता है. इससे हीलिंग धीमी पड़ सकती है.
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डायबिटीज में इम्यून सिस्टम हो जाता है कमजोर
दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर डॉ सुभाष गिरि ने इस बारे में बताया है. डॉ सुभाष कहते हैं कि डायबिटीज के जिन मरीजों का शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है उनके इम्यून सिस्टम पर भी इसका असर पड़ता है. हाई ब्लड शुगर वाले मरीजों में किसी भी संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. यह भी एक वजह है कि घाव देरी से भरता है.
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पैरों की जांच भी जरूरी क्यों है?
डॉ. सुभाष बताते हैं कि डायबिटीज मरीजों के लिए पैरों की रोजाना जांच भी जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि डायबिटीज में लंबे समय तक शुगर ज्यादा रहने से पैरों की नसें प्रभावित हो सकती हैं. ऐसे में व्यक्ति को पैर में लगी छोटी चोट, छाला या जूते की रगड़ का पता ही देर से चलता है. ऐसे में पांव की जांच जरूरी है. खासकर तलवों, उंगलियों के बीच की. अगर यहां लालिमा, सूजन, छाला है तो उसे नजरअंदाज न करें. इस मामले में डॉक्टर से सलाह लें. घाव होने पर अपने मन से कोई क्रीम, पाउडर या घरेलू नुस्खा न शुरू करें.
आजतक हेल्थ डेस्क