इंफेक्शन के कारण दो मरीजों की आंखें निकालने की आ गई थी नौबत, 100 साल के बुजुर्ग ने ऐसे दी नई जिंदगी

100 साल के डोनर से मिले कॉर्निया और टिश्यू की मदद से गंभीर फंगल संक्रमण से पीड़ित दो मरीजों की आंखों की सर्जरी की गई है. दोनों मरीजों की आंखों में पहले संक्रमण इतना बढ़ चुका था कि आंख निकालने की नौबत आ सकती थी.

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बुजुर्ग ने की आंखें दान बुजुर्ग ने की आंखें दान

अभिषेक पांचाल

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

आमतौर पर आंखों के डोनेशन की जब बात आती है तो डोनर की अधिकतम उम्र 60, या ज्यादा से ज्यादा 65-75 साल के बीच होती है. हालांकि आंखों के डोनेशन में उम्र का कोई पैमाना नहीं है, लेकिन देखा जाता है कि बहुत अधिक उम्र के डोनर कम ही मिलते हैं, लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें 100 साल के व्यक्ति ने आंखें दान करके गंभीर इंफेक्शन से जूझ रहे दो मरीजों को रोशनी दी है. इतनी अधिक उम्र में आंखें दान करना और आंखों के फिट मिलने का यह मामला फ्रांस में हुआ है. इस केस स्टडी को ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

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केस स्टडी के मुताबिक, दोनों मरीजों की आंखों में फंगल संक्रमण इतना गंभीर हो चुका था कि आंख निकालने तक की नौबत आ सकती थी. इंफेक्शन के कारण इनकी आंखों की रोशनी भी लगभग जा चुकी थी. लेकिन 100 साल के डोनर से मिले आंखों के कॉर्निया और टिश्यू की मदद से मरीजों की सर्जरी करके कुछ हद तक रोशनी वापिस आ गई. 

दोनों मरीजों को क्या दिक्कत थीं

पहली मरीज 55 साल की महिला थी .उसे पहले से कॉर्निया से जुड़ी बीमारी केराटोकोनस थी. उसकी दाईं आंख में फंगल संक्रमण हो गया था. संक्रमण बार-बार लौट रहा था और पिछले नौ महीनों में उसकी आंख में पांच बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट करना पड़ा था. कुल मिलाकर इस आंख में छह बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट हो चुका था, लेकिन रोशनी वापिस नहीं आ रही थी. ऐसे में टेस्ट किए गए तो पता चला कि इस मरीज की आंख में पैसिलोमिस फंगल इंफेक्शन था. इंफेक्शन कॉर्निया से आगे बढ़कर आंख के अंदर तक पहुंच गया और उसकी नजर केवल रोशनी पहचानने तक रह गई थी. 

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दूसरा मरीज 74 साल का पुरुष था. उसे डायबिटीज की बीमारी थी और पहले भी उसकी आंखों की सर्जरी हो चुकी थी. उसकी बाईं आंख में इंफेक्शन था . संक्रमण बढ़ने के बाद उसकी हालत भी इतनी खराब हो गई कि वह सिर्फ रोशनी महसूस कर पा रहा था. उसको कुछ भी दिख नहीं रखा था. इस मरीज का इंफेक्शन भी आंखों के अंदर तक चला गया था. 

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आंख निकालने की आ गई थी नौबत

जब फंगल संक्रमण केवल आंख की ऊपर की परत यानी कॉर्निया तक रहता है तो दवाओं और जरूरत पड़ने पर कॉर्निया ट्रांसप्लांट से इलाज किया जा सकता है, लेकिन इन मरीजों में संक्रमण कॉर्निया से आगे बढ़कर आंख के अंदर के हिस्सों तक पहुंच गया था. ऐसे में  इलाज बहुत मुश्किल हो गया था. ऐसे मामलों में इंफेक्शन के आंखों के अलावा दूसरे अंगों तक जाने का भी रिस्क होता है. इससे बचाव के लिए पूरी आंख निकालने की सर्जरी तक करनी पड़ सकती है. इन दोनों मरीजों में यही स्थिति बन गई थी, लेकिन 100 साल के डोनर से इनको नया जीवन दे दिया. 

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100 साल के डोनर की आंख से आखिर क्या लिया गया?

डोनर 100 साल के एक मृत व्यक्ति था. इसकी मौत ब्रेन स्ट्रोक के कारण हुई थी. डोनर के परिजनों ने आंखें दान करने का फैसला किया, लेकिन डॉक्टरों का लगा कि 100 साल में क्या आंखें स्वस्थ होंगी, लेकिन जब जांच की गई तो उसकी आंख के कॉर्निया और टिश्यू को इन मरीजों में लगाने के फिट पाया गया. एक डोनर से मिले टिश्यू से दोनों मरीजों की सर्जरी की गई.

इससे मरीजों में क्या ठीक हुआ?

इस सर्जरी का मकसद केवल नजर वापस लाना नहीं था, सबसे पहले डॉक्टरों को संक्रमण का बड़ा हिस्सा हटाकर आंख को बचाया गया. ऑपरेशन के बाद दोनों मरीजों की आंख की संरचना दोबारा बनाई गई. एक महीने बाद 55 साल की महिला की नजर 30/80 और 74 साल के पुरुष की नजर 30/200 दर्ज की गई. यानी दोनों की नजर पूरी तरह सामान्य नहीं हुई, लेकिन पहले जहां वे केवल रोशनी महसूस कर पा रहे थे. अब वह हल्का हल्का देख पा रहे थे.

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