दस साल बाद फिर सवाल, क्या हवाना सिंड्रोम के पीछे रूस और क्यूबा की मिलीभगत थी? पेंटागन को मिली खुफिया डिवाइस

लगभग दस साल पहले एक के बाद एक कई अमेरिकी डिप्लोमेट्स ने कान में तेज आवाज के साथ सिरदर्द जैसी न्यूरोलॉजिकल शिकायतें की थीं. इन सारे अधिकारियों के बीच कॉमन ये था कि वे क्यूबा की राजधानी हवाना में थे. अब एक बार फिर हवाना सिंड्रोम की चर्चा है.

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अमेरिकी रक्षा विभाग एक डिवाइस की जांच कर रहा है, जो हवाना सिंड्रोम जैसे लक्षण दे सकता है. (Photo- Pixabay) अमेरिकी रक्षा विभाग एक डिवाइस की जांच कर रहा है, जो हवाना सिंड्रोम जैसे लक्षण दे सकता है. (Photo- Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

साल 2016 में क्यूबा की राजधानी हवाना में पोस्टेड अमेरिकी राजनयिक एकाएक बीमार होने लगे थे. सबको कानों में तेज आवाज के साथ सिर दर्द और मतली की शिकायत थी. समस्या इतनी गंभीर थी कि डिप्लोमेट्स काम तक नहीं कर पा रहे थे. वे वापस लौट गए. दस साल बाद हवाना सिंड्रोम फिर चर्चा में है. इसकी वजह एक रिपोर्ट है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी डिफेंस डिपार्टमेंट एक रहस्यमयी डिवाइस की जांच कर रहा है, जो लोगों में हवाना सिंड्रोम जैसे लक्षण ला सकता है. 

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दरअसल माना गया था कि क्यूबा की सरकार ने अमेरिकी राजनयिकों के साथ दुश्मनी निकालने के लिए उन्हें ये बीमारी दी थी. हवाना सिंड्रोम का मामला पहली बार साल 2016 में आया था, जब क्यूबा में रह रहे राजनयिकों ने सिरदर्द, चक्कर, सुनने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होने जैसी समस्याएं गिनाई थीं. पोस्टिंग से पहले ये अधिकारी बिल्कुल स्वस्थ थे. कुछ ही महीनों में दुनिया के कई देशों में तैनात अमेरिकी अधिकारियों ने ऐसे ही लक्षण रिपोर्ट किए.

अब यूएस रक्षा विभाग की कथित टेस्टिंग से फिर हवाना की चर्चा हो रही है. क्या वाकई क्यूबा ने कोई हथियार बनाया था, जो चुपचाप अधिकारियों को बीमार बना रहा था?

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के रक्षा विभाग ने होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस को फंड दिया, ताकि  सीक्रेट ऑपरेशन के जरिए एक खास डिवाइस खरीदी जा सके. डिवाइस के लिए अधिकारियों ने करोड़ों डॉलर की रकम चुकाई. पिछले सालभर से डिवाइस की जांच हो रही है. दावा है कि इससे रेडियो वेव्स निकलती हैं. इसी वेव को हवाना सिंड्रोम की वजह माना जाता रहा है. कथित तौर पर ये डिवाइस पूरी तरह रूस में बनी हुई नहीं, लेकिन उसके कई हिस्से रूसी हैं. 

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डिवाइस को लेकर वैसे राय बंटी हुई है. रक्षा विभाग में ही कुछ को लगता है कि इतना छोटा सिस्टम ऐसी विकिरण पैदा नहीं कर सकता, जिससे स्वस्थ लोगों को गंभीर समस्या होने लगे. वहीं कुछ का कहना है कि सालों पहले जो हुआ, उसकी जांच जरूरी है ताकि आगे ऐसा कुछ न होने पाए. 

एक और बड़ी चिंता यह है कि ऐसी डिवाइस कई देशों के पास हो सकती है, जिसका इस्तेमाल विदेशों में पोस्टेड अमेरिकी लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए हो सकता है. यानी खतरा चारों तरफ हो सकता है. इसी वजह से हवाना सिंड्रोम को रहस्यमय बीमारी नहीं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी से जोड़कर देखा जा रहा है. 

हवाना सिंड्रोम में राजनयिकों के साथ अचानक अजीब और डराने वाले लक्षण दिख रहे थे. पीड़ित बताते थे कि उन्हें बिना किसी वजह तेज सिर दर्द होने लगा, चक्कर आने लगे, कानों में अजीब आवाज सुनाई देने लगी या सुनने की क्षमता कम हो गई. 

कुछ मामलों में लोगों ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे सिर पर दबाव पड़ रहा हो या दिमाग के अंदर कुछ हिल रहा हो. याददाश्त कमजोर होने और मानसिक उलझन जैसे लक्षण भी दिखे. ये लक्षण खत्म होने की बजाए लंबे समय तक बने रहे. यहां तक कि अमेरिका अपने राजनयिकों को वापस बुलाने लगा. 

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अंदेशा था कि क्यूबा शायद यूएस के दुश्मनों जैसे रूस के साथ मिलकर कुछ ऐसा कर रहा है. CIA ने कभी इसे सुपरसोनिक अटैक कहा, कभी माइक्रेवेव अटैक. जांच में पानी की तरह पैसे बहाए गए लेकिन कुछ पता नहीं लग सका. बस इतना माना गया कि कोई ऐसी विकिरण है, जो न्यूरॉन्स के साथ छेड़छाड़ करते हुए उसे कमजोर कर रही है. 

वक्त के साथ क्यूबा में तैनात कनाडाई राजनयिकों में भी हवाना सिंड्रोम जैसे लक्षण दिखने लगे थे. इतना ही नहीं, वहां रह रहे उनके परिवार के सदस्य भी बीमार पड़ने लगे. इसके बाद कनाडा के एक्सपर्ट्स ने भी जांच शुरू की. रिसर्च के दौरान एक एंगल यह भी निकला कि शायद किसी पेस्टिसाइड की वजह से ऐसा हो रहा हो. साल 2016 में ही क्यूबा सरकार ने जीका वायरस से बचाव के लिए मच्छरों को खत्म करने का अभियान चलाया था. इस दौरान कीटनाशकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया. 

शोधकर्ताओं का मानना था कि हो सकता है हवा में मौजूद इन केमिकल स्प्रे के संपर्क में आने से राजनयिकों और उनके परिवारों की तबीयत खराब हुई हो. हालांकि यह सिर्फ एक थ्योरी थी. मामला रहस्य ही बना रहा.

अब इस पर फिर काम हो रहा है. पिछले साल के आखिर में इस मामले पर अमेरिकी सांसदों को भी जानकारी दी गई. 

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