बीआर चोपड़ा के आइकॉनिक सीरियल ‘महाभारत’ में अभिमन्यु का किरदार निभाने वाले एक्टर मयूर राज वर्मा ने करीब दो दशक पहले एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया था. आज वो यूके के वेल्स में अपनी पत्नी के साथ मिलकर रेस्टोरेंट का बिजनेस चला रहे हैं और एक सफल बिजनेसमैन के तौर पर पहचाने जाते हैं.
शुरुआती करियर और ‘यंग अमिताभ’ की पहचान
मयूर वर्मा बचपन से ही अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फैन थे और 11 साल की उम्र में उन्होंने एक्टिंग करियर शुरू किया. जल्द ही उन्हें ‘यंग अमिताभ बच्चन’ के नाम से जाना जाने लगा. उन्होंने ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’ और ‘शराबी’ जैसी फिल्मों में अमिताभ के बचपन का किरदार निभाया और 70–80 के दशक के सबसे महंगे चाइल्ड आर्टिस्ट बन गए.
टीवी पर भी उनकी पहचान बनी. 1988 में बीआर चोपड़ा के ‘महाभारत’ में अभिमन्यु का रोल उन्हें मिला, जो पहले गोविंदा और चंकी पांडे को ऑफर हुआ था. इस सीरियल ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया.
शोबिज छोड़ने का फैसला
करियर के पीक पर रहते हुए, 2007 में मयूर ने शोबिज छोड़ने का बड़ा फैसला लिया. उन्होंने भारत और फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से दूर, वेल्स (यूके) में शांत जीवन बसाने का रास्ता चुना. मयूर के मुताबिक, ये वक्त था कि वो अपनी पत्नी के सपने को पूरा करने में मदद करें और बच्चों को सामान्य जिंदगी दें.
अब क्या कर रहे हैं मयूर वर्मा?
रेस्टोरेंट बिजनेस: मयूर और उनकी पत्नी नूरी (जो एक प्रोफेशनल शेफ हैं) ने वेल्स में ‘इंडियाना कुज़ीन’ नाम का इंडियन रेस्टोरेंट शुरू किया, जो 20 साल से ज्यादा समय से सफलतापूर्वक चल रहा है.
अन्य आउटलेट्स: दंपत्ति के पास ‘चस्का’ नाम का एक और रेस्टोरेंट और अबर्गिनोल्विन में एक कैफे भी है।
परिवार और लाइफस्टाइल: मयूर, नूरी और उनके दो बच्चे वेल्स में ही रहते हैं. मयूर ने कई इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें ग्लैमर से दूर यह जिंदगी ज्यादा सुकून भरी लगती है.
सामाजिक काम: वे वेल्स में बॉलीवुड और भारतीय संस्कृति से जुड़ी वर्कशॉप और एक्टिंग क्लासेज भी आयोजित करते रहते हैं, ताकि स्थानीय लोगों को भारतीय कला और सिनेमा से जोड़ा जा सके.
क्यों याद रखना जरूरी है उनकी कहानी?
मयूर वर्मा की कहानी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि एक ऐसे इंसान की है, जिसने फेम और पैसों के पीक पर भी अपने परिवार और व्यक्तिगत संतुष्टि को प्राथमिकता दी. आज वो करोड़ों के टर्नओवर वाले रेस्टोरेंट चेन चलाते हैं, लेकिन उनकी असली दौलत वो शांति और संतोष है जो उन्हें शोबिज की भीड़ से दूर मिली.
अगर आप ‘महाभारत’ के फैन हैं, तो मयूर वर्मा का यह सफर आपको यह याद दिलाएगा कि असली सफलता वही है, जहां दिल को सुकून मिले.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क