टीवी के सबसे एडवेंचरस और पॉपुलर स्टंट बेस्ड रियलिटी शो 'खतरों के खिलाड़ी' का सफर अब अपने सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुंच चुका है. वो घड़ी आ चुकी है जब खतरों से बाजी जीतने वाले किसी एक जांबाज खिलाड़ी के सिर पर इस सीजन के विजेता का शानदार ताज सजेगा. शो के ग्रैंड फिनाले को लेकर दर्शकों और फैंस की एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर है.
यूं तो फिनाले वीक में कई दमदार खिलाड़ी पहुंचे हैं, लेकिन इस बार का मुकाबला बेहद अलग है. शो के 15 साल के लंबे इतिहास में कई शानदार कंटेस्टेंट्स आए जिन्होंने अपने हैरतअंगेज कारनामों से सबका दिल जीता, लेकिन इस सीजन में असली 'कांटे की टक्कर' जिन दो कंटेस्टेंट्स के बीच देखने को मिल रही है, वो हैं अविनाश मिश्रा और फरहाना भट्ट.
अविनाश मिश्रा में जीत की भूख
अगर किसी खिलाड़ी के चेहरे और परफॉर्मेंस में ट्रॉफी जीतने का जुनून साफ झलकता है, तो वो नाम अविनाश मिश्रा का है. अविनाश ने हर स्टंट को सिर्फ निभाया नहीं, बल्कि जिया है.
टास्क चाहे आसमान की ऊंचाइयों से कूदने का हो, जलती आग के बीच से गुजरने का हो, गहरे पानी के अंदर सांसें थामने का हो या फिर खूंखार जानवरों के बीच उतरने का...अविनाश कभी पीछे नहीं हटे.
वो हर स्टंट को करने से पहले अपनी रणनीति तैयार करते हैं. उनका कभी हार न मानने वाला रवैया उन्हें बाकी खिलाड़ियों से मीलों आगे खड़ा करता है. जीत के प्रति उनका जुनून इस बात का सबूत है कि वो फिनाले में किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.
डर को मात देतीं 'फियरलेस' फरहाना भट्ट
अविनाश की इस प्रचंड रफ्तार और जुनून को अगर शो में कोई कड़ी टक्कर दे सकता है, तो वो हैं फरहाना भट्ट. फरहाना ने अपने अनूठे और निडर अंदाज से न सिर्फ रोहित शेट्टी को बल्कि करोड़ों फैंस को हैरान किया है.
जहां बड़े-बड़े खिलाड़ी डर के मारे कांप उठते हैं, वहां फरहाना एकदम कूल और फोकस्ड नजर आती हैं. मुश्किल से मुश्किल और खौफनाक स्टंट्स को भी वो इतनी आसानी और फुर्ती से पूरा कर लेती हैं कि मानो कोई बच्चों का खेल हो.
फरहाना का कूल माइंडसेट और स्टंट्स के दौरान उनका फोकस ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. वो बिना किसी घबराहट के हर फियर फंदा पार करती आई हैं.
रोहित शेट्टी का टेस्ट और फैंस की धड़कनें तेज
'खतरों के खिलाड़ी' का फिनाले कभी भी आसान नहीं होता. शो के होस्ट रोहित शेट्टी फिनाले में ऐसे माइंड-ब्लोइंग और मल्टी-लेवल स्टंट्स डिजाइन करते हैं, जहां जरा सी चूक का मतलब है ट्रॉफी हाथ से फिसल जाना. ऐसे में सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं, बल्कि दिमागी संतुलन और उस वक्त का फोकस ही विनर तय करेगा.
एक तरफ अविनाश का एग्रेसिव पैशन और जीत का जज्बा है, तो दूसरी तरफ फरहाना का शांत दिमाग और फियरलेस एटीट्यूड. दोनों ही खिलाड़ी ट्रॉफी जीतने के सबसे मजबूत दावेदार हैं. अब देखना बेहद दिलचस्प होगा कि ग्रैंड फिनाले के महा-मुकाबले में कौन किस पर भारी पड़ता है और कौन इस सीजन का अल्टीमेट 'खिलाड़ी' बनता है.
नेहा फरहीन