अभी भी है पद्मिनी-खिलजी का ड्रीम सीक्वेंस, हम गोली खाने को भी तैयार: करणी सेना

संजय लीला भंसाली की फिल्म 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में रिलीज हो रही है.

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दीपिका-रणवीर दीपिका-रणवीर

ऋचा मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 24 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:25 PM IST

संजय लीला भंसाली की फिल्म 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देशभर में रिलीज हो रही है. फिल्म की रिलीज से एक दिन पहले करणी सेना ने दावा किया कि अभी भी फिल्म में खिलजी और रानी पद्मिनी के बीच ड्रीम सीक्वेंस है.

बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में करणी सेना के चीफ लोकेंद्र कलवी ने कहा, क्या आपने सीन नहीं देखा. फिल्म के एक दृश्य में खिलजी हमाम में लेटा नजर आता है. कल्पना में जो स्त्री उसके पास से हटती है वो दीपिका पादुकोण की डुपलीकेट है. कलवी ने फिल्म के विरोध को जायज ठहराते हुए कहा, माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता. अगर किसी से माफी मांगनी होगी तो रानी पद्मिनी से मागूंगा. फिल्म को लेकर मैं वहीं खड़ा हूं. देश में फिल्म नहीं लगनी चाहिए.

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कलवी ने कहा, CBFC की तरफ से फिल्म देखने जो तीन लोग गए थे उनका गला सूख गया होगा वर्णन करते वक्त. मुझे जिन समाजिक संगठनों का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है उनसे कहना चाहूंगा कि किसी भी धोखे में न आएं. जनता कर्फ्यू लगाएं. मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, यूपी, बिहार में ऐसा हो रहा है. इन राज्यों में डिस्ट्रिब्यूटर ने भंसाली की फिल्म दिखाने से मना कर दिया है.

कलवी ने वॉर्निंग दी, हम हमारी तकलीफ से किसी को नोट छापने का इंतजाम नहीं होने देंगे. कहा, जब हमने भंसाली को लेटर लिखा कि वो याद कर लें 27 जनवरी, वही करणी सेना है, वही लोग हैं. मुझे विश्वास है कि मेरी गिरफ्तारी से पहले की अंतिम प्रेस कॉन्फ्रेंस है ये. कालवी ने कहा, कन्फ्यूजन पैदा न करें. गिरफ्तारियां हो रही हैं. बापू से विनती की है कि हमें ताकत दें.

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कहा, गांधी जी ने अंग्रेजों को हटा दिया था, हम भी पदमावत हटा रहे हैं. जो कुछ हो रहा है उसके लिए माफी मांगता हूं पर मेरी मां पद्मावती से. 25 आएगी चली जाएगी, पद्मावत को नहीं आने देंगे. पूरे मामले में अगर कोई दोषी है तो वो संजय लीला भंसाली है.

गुजरात में भंसाली के खिलाफ 44 केस

कालवी ने बताया गुजरात में भंसाली के खिलाफ 44 केस दर्ज हैं. गुजरात के हर जिले में उनके खिलाफ मामले दर्ज हैं. गाड़ियां जलाया जाना दुखद है. सब सरकारें चिंतित हैं. सरकारें स्थिति को समझ रही हैं.

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