साउथ के सुपरस्टार चिरंजीवी की जिंदगी में एक ऐसा भी पल आया था, जब हाथ में नेशनल अवॉर्ड था, लेकिन दिल में खुशी के बजाय एक टीस घर कर गई. साल था 1988. फिल्म थी ‘रुद्रवीणा’ और चिरंजीवी दिल्ली में इस फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड लेने पहुंचे थे. अवॉर्ड तो मिल गया, लेकिन उस शाम उन्होंने जो देखा, उसकी कसक उनके दिल में तीन दशक से भी ज्यादा समय तक रही.
2022 में फिल्म ‘आचार्य’ के प्री-रिलीज इवेंट में चिरंजीवी ने उस पुराने किस्से को याद किया था. उन्होंने बताया कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के ऑडिटोरियम की दीवारों पर हिंदी सिनेमा के बड़े-बड़े सितारों की तस्वीरें लगी थीं. पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर और दिलीप कुमार तक, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज वहां नजर आ रहे थे.
लेकिन जब चिरंजीवी की नजर साउथ के महान कलाकारों की तस्वीरें तलाशने लगीं, तो उन्हें लगभग खालीपन ही नजर आया.
दीवारों पर हिंदी सिनेमा का जलवा, साउथ के दिग्गज गायब
चिरंजीवी ने बताया था कि उस शाम अवॉर्ड समारोह से पहले हॉल में हाई-टी रखी गई थी. पूरा माहौल भारतीय सिनेमा की विरासत और उसकी महानता को दिखाने वाला था. लेकिन उन्हें वहां साउथ इंडियन सिनेमा के उन चेहरों की तस्वीरें नहीं दिखीं, जिन्हें वह बचपन से भगवान की तरह मानते आए थे.
उनके मुताबिक, साउथ से उन्हें सिर्फ मलयालम के दिग्गज प्रेम नजीर और तमिल सिनेमा से एमजीआर और जयललिता की एक साथ तस्वीर दिखाई दी. बाकी नामों में उन्होंने डॉ. राजकुमार, विष्णुवर्धन, एनटी रामाराव, अक्किनेनी नागेश्वर राव, शिवाजी गणेशन और सावित्री जैसे महान कलाकारों का जिक्र किया.
चिरंजीवी ने कहा था कि ये सभी कलाकार उनके लिए किसी देवता से कम नहीं थे. ऐसे में उनकी तस्वीरें वहां न देखकर उन्हें बेहद दुख हुआ. उन्होंने साफ शब्दों में कहा था- मेरे लिए ये अपमान जैसा था. मुझे बहुत दुख हुआ.
चिरंजीवी को क्यों लगी इतनी ठेस?
चिरंजीवी के मुताबिक, उस दौर में राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा को देखने का नजरिया कुछ ऐसा था कि हिंदी सिनेमा को ही ‘इंडियन सिनेमा’ माना जाता था, जबकि बाकी भाषाओं की फिल्मों को सिर्फ ‘रीजनल सिनेमा’ कहकर किनारे कर दिया जाता था.
उन्होंने महसूस किया कि दक्षिण भारतीय सिनेमा के योगदान को उस समय वह पहचान नहीं दी जा रही थी, जिसका वह हकदार था. एक दूसरे इंटरव्यू में भी चिरंजीवी ने इसी दर्द को जाहिर करते हुए कहा था कि तेलुगु सिनेमा ने उन्हें नाम, शोहरत और पहचान दी, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उस इंडस्ट्री की अपनी कोई पहचान नजर नहीं आ रही थी.
जिस फिल्म के लिए मिला था अवॉर्ड, वो भी थी खास
चिरंजीवी को यह सम्मान ‘रुद्रवीणा’ के लिए मिला था. फिल्म का निर्देशन दिग्गज फिल्ममेकर के. बालाचंदर ने किया था. फिल्म को चिरंजीवी और उनके भाई नागेंद्र बाबू ने अपने परिवार के प्रोडक्शन हाउस अंजना प्रोडक्शंस के तहत प्रोड्यूस किया था.
फिल्म को मिला नरगिस दत्त अवॉर्ड नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की प्रतिष्ठित कैटेगरी में आता है और ऐसी फिल्मों को सम्मानित करता है जो राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देती हैं.
2022 तक बदल चुका था पूरा खेल
चिरंजीवी ने जब 2022 में इस पुराने अनुभव को याद किया, तब तक सिनेमा की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी. एसएस राजामौली की ‘बाहुबली’ ने बॉक्स ऑफिस के सारे पुराने रिकॉर्ड हिला दिए थे. ‘आरआरआर’ ने दुनिया भर में भारतीय सिनेमा का डंका बजाया और इसके गाने ‘नाटू नाटू’ ने ऑस्कर भी जीता. वहीं ‘पुष्पा’ ने अल्लू अर्जुन को पूरे देश का स्टार बना दिया और ‘केजीएफ’ ने यश को हिंदी बेल्ट में भी घर-घर पहुंचा दिया. अब साउथ सिनेमा को सिर्फ ‘रीजनल’ कहकर नजरअंदाज करना मुश्किल था.
चिरंजीवी ने भी इस बदलाव पर गर्व जताया. उन्होंने कहा कि आज वह सीना ठोककर कह सकते हैं कि उनकी इंडस्ट्री अब सिर्फ रीजनल सिनेमा नहीं रही.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क