'शक्ल देखी है अपनी', जब नाना पाटेकर के दोस्त ने उड़ाया मजाक

नाना पाटेकर ने अपने एक्टिंग के दम पर खूब शोहरत हासिल की, लेकिन यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. थिएटर के दौरान एक दोस्त ने उनके लुक्स का खूब मजाक उड़ाया था.

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नाना पाटेकर के दोस्त ने लुक्स का उड़ाया था मजाक (Credit: IMDb) नाना पाटेकर के दोस्त ने लुक्स का उड़ाया था मजाक (Credit: IMDb)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:00 AM IST

नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया. नाना पाटेकर अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते थे. उन्होंने अपने फिल्मी सफर में कई यादगार किरदार निभाए और कई सुपरहिट फिल्में दी. उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से इंडस्ट्री में ऐसी जगह बनाई, जहां तक पहुंचना हर किसी के लिए आसान नहीं होता. लेकिन एक वक्त ऐसा भी था, जब नाना खुद अपने चेहरे और लुक्स को लेकर बहुत असुरक्षित महसूस करते थे.

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नाना पाटेकर की शानदार एक्टिंग लोगों को खूब पसंद आती थी. लेकिन यहां तक पहुंचना उतना आसान नहीं था. जब वह थिएटर कर रहे थे, तब उनके दोस्त उन्हें एक्टिंग छोड़कर दूसरा करियर चुनने की सलाह देते थे क्योंकि वह दिखने में अच्छे नहीं थे. एक्टिंग नाना पाटेकर के लिए जुनून थी. 

दोस्त ने दी थी एक्टिंग छोड़कर जॉब करने की सलाह

नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया था कि कैसे इतने बड़े-बड़े एक्टर के बीच खुद को साबित किया. उनके लिए ये आसान नहीं था लेकिन अपनी एक्टिंग से वह उस मुकाम तक पहुंच ही गए.

उन्होंने कहा, 'मेरे समय में, सभी हीरो गुड लुकिंग होते थे, उनमें चॉकलेट बॉय वाला चार्म होता था. मैं सोचता था हमें कौन ही देखेगा. मैं हमेशा सोचता था कि मेरे पेरेंट्स मुझे पसंद नहीं करते क्योंकि मैं अपने भाई की तरह अच्छा नहीं दिखता था. मुझे लगता था कि मुझे उतना प्यार नहीं करते जितना कि मेरे भाई को करते. एक बार जब मैं प्ले कर रहा था तब मेरे पापा मेरा प्ले देखने आए. तब मुझे लगा कि एक्टिंग मेरे लिए अच्छी है और इसके जरिए ही मैं अपने माता-पिता का ध्यान और प्यार हासिल कर सकता हूं. उसके बाद मैंने थिएटर की ओर रुख किया.'

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नाना पाटेकर ने अपने थिएटर वाले दिनों को याद करते हुए कहा था कि उनके मराठी थिएटर के एक दोस्त ने उन्हें फुलटाइम जॉब करने की सलाह दी और थिएटर को हॉबी की तरह देखने को कहा. उन्होंने कहा, 'क्यों तूने आईना देखा है?  शक्ल देखी है अपनी? कौन ही तुम्हें देखेगा?' पर इन सब आलोचनाओं से उन्हें कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. जब उन्होंने थिएटर जॉइन किया तब देखा कि अच्छे दिखने वाले लोग भी उन्हें देखने थिएटर पहुंच रहे हैं, तो उनके भीतर का कॉम्प्लेक्स खत्म होने लगा. इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला. उन्होंने कहा था, 'आखिर आपका चेहरा किसी के दिमाग में कितनी देर रहेगा? दो मिनट? उसके बाद क्या?'

नाना पाटेकर को यह अहसास हुआ कि लुक बस एक्टर को फिल्में दिला सकता है, लेकिन जो चीज सबसे ज्यादा मैटर करती है वह है परफॉर्मेंस और उसी के दम पर एक्टर अपने करियर को सफल बना सकता है. किसी एक्टर को जो चीज पहचान दिलाती है वह लुक नहीं बल्कि हुनर होता है.

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