तिरंगा बना फैशन तो छिड़ी बहस! मंदिरा बेदी की साड़ी से उर्वशी रौतेला के गाउन तक की कहानी

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को कपड़े, यूनिफॉर्म या किसी ड्रेस के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा कपड़ों या ड्रेस मैटीरियल पर राष्ट्रीय ध्वज की छपाई या कढ़ाई को लेकर भी स्पष्ट प्रतिबंध हैं.

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उर्वशी रौतेला का तिरंगा गाउन इन दिनों सुर्खियों में है. (Photo: ITG) उर्वशी रौतेला का तिरंगा गाउन इन दिनों सुर्खियों में है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

उर्वशी रौतेला हाल ही में जयपुर में मिस यूनिवर्स इंडिया 2026 के ग्रैंड फिनाले में नजर आईं. इस दौरान तिरंगे के रंग वाला उनका गाउन सुर्खियां बटोर ले गया. उनके केसरिया, सफेद और हरे रंग के स्ट्रैपलेस, फ्लोर-लेंथ गाउन की कमर पर अशोक चक्र जैसा डिजाइन भी था. उर्वशी के लिए यह शायद एक ग्लैमरस फैशन मोमेंट था, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके आउटफिट ने एक पुरानी बहस फिर छेड़ दी कि क्या तिरंगे से प्रेरित कपड़े पहनना देशभक्ति है या फिर इसे राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के तौर पर देखा जाए?

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उर्वशी लगातार तीसरी बार मिस यूनिवर्स इंडिया की जज बनीं. इस बार पैनल में उनके साथ भारत की पहली मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भी थीं. जब उर्वशी से उनके लुक के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं भारत हूं. आज मैं सच में खुद को भारत जैसा महसूस कर रही हूं. लेकिन उनका इसी फैशन ने जिन्न को एक बार फिर बोतल से बाहर निकाल दिया है, जो अक्सर तिरंगे के इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा करता है.

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि उर्वशी का गाउन तिरंगे से प्रेरित था ना कि राष्ट्रीय ध्वज की हूबहू कॉपी. इसमें केसरिया, सफेद और हरे रंग का इस्तेमाल हुआ है और अशोक चक्र से प्रेरित एक डिजाइन भी है. यही वह महीन अंतर है, जिसके दायरे में भारतीय फैशन डिजाइनर अक्सर तिरंगे के रंगों का इस्तेमाल करते हैं. कानून केवल केसरिया और हरे रंग को एक साथ पहनने पर रोक नहीं लगाता, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज के वास्तविक स्वरूप और उसके अनुचित इस्तेमाल को लेकर नियम तय करता है.

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फ्लैग कोड ऑफ इंडिया के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज को कपड़े, यूनिफॉर्म या किसी ड्रेस के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा कपड़ों या ड्रेस मैटीरियल पर राष्ट्रीय ध्वज की छपाई या कढ़ाई को लेकर भी स्पष्ट प्रतिबंध हैं. राष्ट्रीय ध्वज जमीन को नहीं छूना चाहिए.

इसके साथ ही Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 भी राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को दंडनीय बनाता है. कानून के तहत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. 2005 के संशोधन के बाद राष्ट्रीय ध्वज को कमर के नीचे पहनने या ड्रेस मैटीरियल के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर भी प्रावधान जोड़े गए. हालांकि छोटे और सम्मानजनक लैपल पिन के इस्तेमाल की अनुमति है यानी तिरंगे के रंगों से प्रेरित फैशन और वास्तविक राष्ट्रीय ध्वज को कपड़े के रूप में इस्तेमाल करने के बीच एक कानूनी अंतर मौजूद है.

उर्वशी का गाउन इसी अंतर के बीच खड़ा नजर आता है. कानून की भाषा और उसकी भावना के बीच. भारतीय फैशन में इससे मिलती-जुलती बहस कोई नई नहीं है.

जब मंदिरा बेदी की साड़ी पर हुआ था बवाल

2007 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल की मेजबानी कर रहीं मंदिरा बेदी भी ऐसी ही बहस के केंद्र में आ गई थीं. श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए फाइनल के दौरान उन्होंने डिजाइनर पुनीत नंदा की बनाई ऐसी साड़ी पहनी थी, जिस पर टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले सभी देशों के झंडे छपे थे. इनमें भारत का तिरंगा भी शामिल था.

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टीवी कैमरों में तिरंगा उनकी साड़ी के उस  हिस्से पर नजर आया, जो उनके पैर के पास था. इसके बाद विवाद बढ़ गया. बारिश के कारण मैच रुका तो बेदी दोबारा स्क्रीन पर लौटीं, लेकिन तब तक वह दूसरी साड़ी पहन चुकी थीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक डिजाइनर पुनीत नंदा ने बाद में माफी मांगते हुए कहा था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भारतीय झंडा बेदी के पैर के इतने करीब आ जाएगा. बेदी ने भी सफाई दी थी कि उन्होंने फाइनल के लिए खासतौर पर वही साड़ी चुनी थी, क्योंकि उसमें टूर्नामेंट में शामिल सभी 16 देशों के झंडे थे.

मालिनी रमानी का मामला तो और भी पुराना है

इससे भी पुराना और ज्यादा चर्चित मामला डिजाइनर मालिनी रमानी का है. यह मामला भी हाल में उर्वशी के गाउन पर हुई बहस के दौरान दोबारा चर्चा में आया. भारत के पहले फैशन वीक के उद्घाटन समारोह की पार्टी में रमानी ने एक ऐसा ट्राइकलर आउटफिट पहना था, जिसमें नारंगी रंग का टॉप, बीच में चक्र जैसा डिजाइन और हरे रंग की स्कर्ट थी.

रिपोर्ट्स और फैशन आर्काइव्स के मुताबिक उस आउटफिट को लेकर इतना विवाद हुआ कि फैशन वीक तक बंद करने की मांग उठने लगी थी. रमानी को प्रमुख अखबारों में सार्वजनिक माफी तक प्रकाशित करनी पड़ी थी. यहां तक कहा गया कि विवादित ड्रेस को पुलिस ने जब्त कर लिया था और उसे कथित तौर पर सलाखों के पीछे रखे मैनिकिन पर प्रदर्शित किया गया. इस मामले को खत्म होने और रमानी का नाम साफ होने में करीब 18 साल लग गए.

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करीब दो दशक बाद मालिनी रमानी के आउटफिट और उर्वशी रौतेला के गाउन के बीच एक बड़ा फर्क जरूर दिखाई देता है लेकिन मूल सवाल अब भी वहीं है. भारतीय डिजाइनर तिरंगे के रंगों का इस्तेमाल पहचान और देशभक्ति जाहिर करने के लिए करते हैं, जबकि समाज का एक हिस्सा इसी प्रतीक को राष्ट्रीय सम्मान के नजरिए से देखता है.

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