लिजी बोर्डन के घर में रात को कौन गया था? 134 साल बाद भी अनसुलझी है मर्डर मिस्ट्री

मॉन्स्टर: द लिजी बोर्डन स्टोरी दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. नेटफ्लिक्स की इस सीरीज में मिस्ट्री और सस्पेंस भरपूर हैं. यह 1893 में अमेरिका के सबसे फेमस मर्डर केस पर आधारित है.

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सस्पेंस से भरपूर है लिजी बोर्डन स्टोरी. (Photo: Instagram) सस्पेंस से भरपूर है लिजी बोर्डन स्टोरी. (Photo: Instagram)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:32 AM IST

मर्डर मिस्ट्री और सस्पेंस से भरपूर नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज "मॉन्स्टर: द लिजी बोर्डन स्टोरी" दर्शकों को खूब पसंद आ रही है. यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है. अमेरिका के सबसे फेमस मर्डर केसों में से एक पर आधारित यह वेब सीरीज आने के बाद एक बार फिर जॉन मोर्स का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है. यह सीरीज 17 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है जिसमें ईला बिट्टी ने लिजी बोर्डन का किरदार निभाया है जबकी जॉय पॉलेरी ने जॉन मोर्स का किरदार निभाया. 

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लिजी बोर्डन पर अपने पिता और सौतेली मां की हत्या का मुकदमा चला और जून 1893 में उन्हें बरी कर दिया गया. यह मामला अमेरिका इतिहास के सबसे फेमस अनसुलझे रहस्यों में से एक है, जिस पर किताबें लिखी जा चुकी है साथ ही फिल्में बन चुकी है.

मोर्स का क्या रिश्ता था लिजी से

यह सीरीज एक मर्डर मिस्ट्री है, ऐसे में दर्शकों को भरपूर सस्पेंस देखने को मिला है. मोर्स की गवाही इस सीरीज का एक अहम हिस्सा है. वी मोर्स उस समय मौत से पहले बोर्डन होम में मौजूद थे. मोर्स, लिजी बोर्डन के मामा थे और 1893 में हुए चर्चित मुकदमे में उनकी गवाही ने मामले को और दिलचस्प बना दिया था.

7 जून 1893 को मुकदमे के दौरान गवाही देते हुए मोर्स ने अपना नाम जॉन विन्निकम मोर्स बताया था. उन्होंने कहा था कि उनकी उम्र करीब 60 साल है. उन्होंने इस बात का भी खुलासा किया कि एंड्रयू बोर्डन की जो पहली पत्नी थी वह उनकी बहन थीं. इस रिश्ते वह लिजी और उनकी बड़ी बहन एम्मा के मामा थे.

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सबसे बड़ी मिस्ट्री यह है कि जॉन मोर्स वहां क्यों थे. मोर्स, बोर्डन एंड्रयू और अबे बोर्डन की मौत के तुरंत पहले वहां बोर्डन परिवार के बीच में मौजूद थे. मोर्स ने अदालत में बताया कि वह 3 अगस्त को दोपहर तकरीबन 1:30 बजे बोर्डन परिवार के घर गए थे. वहां उन्होंने साथ में खाना खाया और दोपहर 3 से 4 बजे के बीच घर से निकल गए. रात करीब 8:30 बजे वह वापस लौटे जिसके बाद शाम के दौरान उन्होंने एंड्रयू और एबी बोर्डन के साथ समय बिताया और बाद में सोने के लिए ऊपर चले गए थे. 

सस्पेंस से भरपूर है ये नेटफ्लिक्स की नई सीरीज

मोर्स ने इस बात का खुलासा किया कि वह जब पहुंचे तब वह लिजी को नहीं देखा. अगले दिन हत्याओं के बाद जब वह घर लौटे, तब भी उनकी लिजी से मुलाकात नहीं हुई थी. हालांकि, मोर्स ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया, उन्होंने कहा कि उन्होंने रात में एक व्यक्ति को सीढ़ियों से ऊपर लिजी के कमरे की तरफ जाते देखा था लेकिन वह व्यक्ति कौन था उसको वह देख नहीं सकें.

हालांकि मोर्स जहां रात में सोए थे. वह गवाही के लिए अहम हो गई क्योंकि वहीं एबी का शव मिला था. उन्होंने बताया कि वह पार्लर के ऊपर बने गेस्ट चैंबर में सोए थे. जहां अगले ही दिन उसी कमरे में एबी बोर्डन का शव बरामद हुआ था. यही वजह थी कि हत्या के बाद मोर्स की मौजूदगी चर्चा का विषय बनीं.

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जॉन वी. मोर्स के मुताबिक वह सुबह करीब 6 बजे उठे और नीचे चले गए. इसके बाद एंड्रयू बोर्डन और एबी बोर्डन भी उनके साथ आ गए और तीनों ने साथ में ही नाश्ता भी किया. जिसके बाद वह बोर्डन हाउस से सुबह करीब 8:40 और 8:45 के बीज निकल गए. उनके अनुसार एंड्रयू उन्हें दरवाजे तक छोड़ने भी आए थे.

मोर्स की गवाही क्यों है जरूरी

मोर्स की गवाही इस केस में इसलिए भी अहम मानी गई क्योंकि उन्होंने हत्याओं से ठीक पहले बोर्डन परिवार के घर में हुई घटनाओं की पूरी खबर बताई. 3 और 4 अगस्त को घर में उनकी मौजूदगी और आने-जाने की जानकारी ने उस सुबह की घटनाओं की टाइमलाइन समझने में मदद की. मोर्स से बहुत से सवालों का जवाब मांगा गया. मोर्स के गवाही से यह खुलासा नहीं हो पाया कि एंड्रयू और अबे को किसने मारा. 1893 में मुकदमे के बाद लिजी बोर्डन को दोनों हत्याओं से बरी कर दिया गया.

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