एमी वर्क, गिप्पी ग्रेवाल, एपी ढिल्लों और कपिल शर्मा.. क्यों कनाडा में भारतीय सिंगर्स-एक्टर होते हैं निशाने पर?

पिछले कई सालों में भारतीय पंजाबी कलाकारों पर कनाड़ा में कई बार हमले और उन्हें डराने की कोशिश की गई है. हाल ही में खबर आई एमी वर्क को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद फिर सवाल उठने लगे कि सब क्यों हो रहा है?

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कनाड़ा में पंजाबी आर्टिस्ट पर हमले क्यों? (Photo: Screengrab) कनाड़ा में पंजाबी आर्टिस्ट पर हमले क्यों? (Photo: Screengrab)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:10 AM IST

विदेशों में रहने वाले भारतीय और पंजाबी कलाकारों के लिए कनाडा अब सिर्फ एक बड़ा मार्केट नहीं, बल्कि डर और आशंकाओं का ठिकाना भी बनता जा रहा है. हाल ही में सोशल मीडिया पर खबर फैली कि पंजाबी गायक और एक्टर एमी विर्क के कॉन्सर्ट के बाद ब्रिटिश कोलंबिया के एबॉट्सफोर्ड में उनके काफिले से जुड़ी एक गाड़ी पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई गईं. 

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इस खबर ने फिर एक बार उस कड़वे सच को उजागर कर दिया है जो पिछले कुछ समय से कनाडा की धरती पर पक रहा है. हालांकि, एमी विर्क के पिता ने सिंगर या उनकी खुद की गाड़ी को निशाना बनाए जाने की बात से इनकार किया है और पुलिस भी मामले की पड़ताल कर रही है, लेकिन इस वारदात ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कनाडा में पंजाबी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री किस कदर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क और रंगदारी के चक्रव्यूह में फंसती जा रही है.

एमी विर्क का मामला!
खबरों के मुताबिक, 5 सितंबर को एमी विर्क के शो के खत्म होने के बाद एबॉट्सफोर्ड में उनके काफिले में शामिल एक गाड़ी पर फायरिंग की गई. प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मौके पर लगभग सात राउंड गोलियां चलीं, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ है. सिंगर के परिवार की तरफ से इस बात को खारिज किया गया है कि हमला सीधा एमी विर्क पर था, फिर भी इस घटना ने स्थानीय पुलिस और कनाडाई प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं.

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निशाने पर रहे हैं कई नामी सितारे
एमी विर्क कोई पहले कलाकार नहीं हैं जिन्हें कनाडा में इस तरह के खौफनाक दौर से गुजरना पड़ा है. इससे पहले नवंबर 2023 में वैस्ट वैंकूवर में मशहूर एक्टर और गायक गिप्पी ग्रेवाल के घर के बाहर अंधाधुंध गोलीबारी हुई थी, जिसकी जिम्मेदारी कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने ली थी. 

इसके बाद सितंबर 2024 में बीसी के कोलवुड में एपी ढिल्लों के घर के बाहर गोलियां बरसाई गईं और गाड़ियों में आग लगा दी गई. दौर यहीं नहीं थमा; फरवरी 2025 में सिंगर प्रेम ढिल्लों के कनाडाई ठिकाने को निशाना बनाया गया, जहां सिद्धू मूसेवाला का नाम लेकर ऑनलाइन धमकियां दी गईं.

सितारों के अलावा बिजनेस भी निशाने पर
कनाडा में जारी यह खौफनाक सिलसिला सिर्फ सिंगर्स और एक्टर्स तक सीमित नहीं है. कॉमेडियन कपिल शर्मा के सरे स्थित कैफे 'कैप्स कैफे' पर वर्ष 2025 में दो-दो बार हमले हुए. पहली घटना 10 जुलाई को हुई जब स्टाफ की मौजूदगी में कैफे पर दनादन गोलियां चलाई गईं. इसके ठीक एक महीने बाद, 7 अगस्त को दोबारा कैफे को निशाना बनाकर फायरिंग की गई. ये लगातार होती घटनाएं दर्शाती हैं कि कनाडाई सरजमीं पर भारतीय मूल के मशहूर चेहरों और उनके व्यवसायों की सुरक्षा कितनी बड़ी चुनौती बन चुकी है.

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कनाडा ही क्यों बन रहा इन घटनाओं का गढ़?
आखिर हर बार ऐसे मामलों में कनाडा का नाम ही सामने क्यों आता है? कनाडाई वित्तीय खुफिया एजेंसी (FINTRAC) ने वर्ष 2026 की अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि वहां दक्षिण एशियाई मूल के लोगों से जबरन वसूली और रंगदारी (extortion) एक गंभीर और संगठित अपराध बन चुकी है. ब्रिटिश कोलंबिया, अल्बर्टा, मैनिटोबा और ओंटारियो जैसे प्रांत इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. हालात इतने बिगड़े कि रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस को 2025 में 'BC एक्सटॉर्शन टास्क फोर्स' का गठन करना पड़ा. एजेंसियों का मानना है कि बिश्नोई और बंबिहा जैसे गैंग्स का नाम इस्तेमाल करके कई स्थानीय छोटे गिरोह भी लोगों में खौफ पैदा कर रहे हैं.

इसके अलावा कनाडा में बड़ी संख्या में पंजाबी और दक्षिण एशियाई समुदाय के लोग बसते हैं, यही वजह है कि वहां पंजाबी गानों और कलाकारों का बहुत बड़ा बाजार है. ब्रिटिश कोलंबिया और ओंटारियो में शो करने आने वाले कलाकार हमेशा आकर्षण का केंद्र रहते हैं. लेकिन यही अपार लोकप्रियता अब उनके लिए मुसीबत का सबब बनती दिख रही है. संगठित अपराध से जुड़े नेटवर्क इन कलाकारों की भारी फैन फॉलोइंग और आर्थिक सफलता को देखकर उन्हें आसानी से रंगदारी मांगने का जरिया बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

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'इंडिया टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाबी-कनाडाई आपराधिक गैंग कनाडा में रहने वाले समुदाय के बीच बनते हैं और इनमें मुख्य रूप से पंजाबी मूल के युवा शामिल होते हैं.

जांच के दायरे में कनाडाई एजेंसियां
कनाडाई पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब सिर्फ इन छिटपुट गोलीबारी की घटनाओं की जांच नहीं कर रही हैं, बल्कि इसके पीछे छिपे पूरे आपराधिक ताने-बाने को खंगाल रही हैं. एमी विर्क से जुड़े इस ताजा मामले में भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हमले के तार पहले से जांच के दायरे में चल रहे संगठित क्राइम सिंडिकेट से जुड़े हैं या यह किसी स्थानीय शरारती तत्व की करतूत है. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां हर पहलू पर पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि समय रहते इस खौफ के माहौल पर लगाम लगाई जा सके.

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