एक्ट्रेस तिलोत्तमा शोम ने हाल ही में महिलाओं की सुरक्षा पर एक लंबा नोट लिखा. यह नोट उन्होंने मुंबई के जुहू में एक ट्रैफिक लाइट पर फुटपाथ पर खड़ी एक युवा लड़की को देखकर लिखा, जो मेटल की रेलिंग के सहारे खड़ी होकर अपने फोन में मगन थी.
तिलोत्तमा ने बताया कि लड़की एकदम शांत और बेफिक्र लग रही थी, लेकिन पास से गुजरने वाले पुरुषों को देखकर उन्हें घबराहट होने लगी. हालांकि उन्होंने माना कि उन पुरुषों के व्यवहार में कुछ भी साफ तौर पर गलत नहीं था, लेकिन उन्होंने देखा कि कुछ पुरुषों की नजर उस लड़की पर पड़ी और 'कुछ नजरें उस पर टिकी रह गईं.'
जुहू की घटना के बाद तिलोत्तमा शोम
तिलोत्तमा ने माना कि वह उलझन में थीं. वह उस लड़की से कहना चाहती थीं कि वह अपना फोन रख दे और अपने आस-पास के माहौल पर ध्यान दे, लेकिन साथ ही वह यह भी चाहती थीं कि वह युवा महिला शांति के उस पल का आनंद ले और 'भरोसे के साथ ज़िंदगी जिए.'
अपने अनुभवों को याद करते हुए, तिलोत्तमा ने बताया कि वह लेडी श्रीराम कॉलेज की छात्रा रही हैं और दिल्ली में रहने के दौरान 17 साल तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया है. इसके बाद उन्होंने जुहू की घटना को हाल ही में अपने किसी परिचित के अस्पताल में भर्ती होने के अनुभव से जोड़ा.
'क्या अस्पताल हमारे लिए सुरक्षित हैं?'
एक्ट्रेस ने बताया कि एक बुरे सपने से जागने के बाद उनके मन में यह सवाल उठा कि क्या महिलाएं उन जगहों पर भी सुरक्षित हैं, जहां उन्हें सुरक्षित माना जाता है. उन्होंने सवाल किया कि क्या अस्पताल के बिस्तर पर बेहोश पड़ी महिला सचमुच सुरक्षित है.
तिलोत्तमा ने माना कि दोनों ही स्थितियों में कुछ हुआ नहीं था, लेकिन उन्होंने कहा कि यह सच्चाई कि महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं दूसरी जगहों पर होती हैं, मन पर भारी बोझ डालती है. उम्मीद भरी बात के साथ अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने लिखा कि लोग 'बार-बार टूटते हैं ताकि बार-बार एक हो सकें' क्योंकि वे अभी भी एक 'अतुलनीय भारत' (Incredible India) की उम्मीद कर सकते हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क