निम्रत कौर सिर्फ 11 साल की थीं जब उनके पिता, मेजर भूपेंद्र सिंह को कश्मीर में आतंकवादियों ने अगवा कर मार डाला था. कई दशकों बाद, एक्ट्रेस ने उस दिन के बारे में बात की है जिसने उनके परिवार की जिंदगी बदल दी और बताया कि कैसे उनकी मां ने दो छोटी बेटियों की परवरिश करते हुए उनकी जिंदगी को फिर से संवारा.
मेजर भूपेंद्र सिंह भारतीय सेना के अधिकारी थे और कश्मीर में तैनात थे. जनवरी 1994 में सरकारी ड्यूटी से लौटते समय उन्हें अगवा कर लिया गया और बाद में मार डाला गया. उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.
निम्रत कौर ने क्या बताया?
ANI से बात करते हुए, निम्रत ने उस आखिरी पल को याद किया जब उन्होंने अपने पिता को काम पर जाते देखा था. उन्होंने कहा कि परिवार के पास आगे होने वाली घटनाओं के लिए तैयार होने का कोई मौका नहीं था. उन्होंने कहा, 'मैंने उस सुबह अपने पिता को काम पर जाते देखा था. मुझे बस उनका जाना याद है और उसके बाद, अगली बार मैंने उन्हें ताबूत में देखा. इसलिए, इस मामले में कोई 'क्लोजर' (मन को तसल्ली देने वाला अंत) नहीं मिल पाया.'
निम्रत ने कहा कि इतने सालों बाद भी इस नुकसान का असर उनके परिवार पर पड़ता है.एक्ट्रेस ने कहा, 'इतने सालों बाद भी यह एक अजीब एहसास है क्योंकि तकनीकी रूप से आपको लगता है कि बहुत समय बीत चुका है. कुछ दशक बीत चुके हैं, लेकिन कोई भी चीज उस कमी को पूरा नहीं कर सकती. न मेरी मां के लिए, न मेरी बहन के लिए, न मेरे लिए और न ही परिवार के बाकी सदस्यों के लिए.'
निम्रत ने बताया कि उनके पिता को तब अगवा किया गया था जब वे अपनी ड्यूटी से लौट रहे थे. उन्हें याद है कि उन्हें अगवा करने वाले लोगों ने सेना की वर्दी पहनी हुई थी. उन्होंने कहा, 'उन्हें असल में काम के एक आम दिन अगवा किया गया था. वे किसी ड्यूटी पर जा रहे थे जो उन्हें सौंपी गई थी और लौटते समय, सैनिक बनकर आए लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया. उन्होंने सेना की वर्दी पहनी हुई थी और उन्हें ले गए.'
निम्रत के अनुसार, अगवा करने वालों ने अगले सात दिनों में कई मांगें रखीं, जिनमें भारत में कैद लोगों की रिहाई की मांग भी शामिल थी. उन्होंने कहा, 'कुछ अजीबोगरीब मांगें थीं. उन्होंने भारत में बंधक बनाए गए दूसरे लोगों को रिहा करने और सात दिनों के दौरान सामने आईं कुछ और अजीब मांगें रखी थीं.'
उस समय निम्रत कौर और उनका परिवार कश्मीर में था. उन्हें याद है कि शुरू में वह, उनकी मां और उनकी बहन वेरिनैग में थे, लेकिन जब हालात असुरक्षित हो गए तो उन्हें श्रीनगर ले जाया गया. सातवें दिन परिवार को खबर मिली कि मेजर भूपेंद्र सिंह मारे गए हैं. निम्रत ने बताया कि बाद में उन्हें पता चला कि बंधक बनाए जाने के दौरान उन्होंने अपने परिवार के बारे में बात की थी.
'उन्होंने उनसे कहा था, 'मेरा एक परिवार है, मेरी दो बेटियां हैं.' मुझे पता है कि अपनी आखिरी सोच में वह हमारे बारे में ही सोच रहे थे. मुझे लगता है कि वह बस उसी परिवार के पास वापस लौटना चाहते थे.'
मेजर भूपेंद्र सिंह की मौत के बाद निम्रत, उनकी मां और उनकी बहन नोएडा चली गईं, जहां उनके नाना-नानी रहते थे.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क