हैंडसम हंक से ‘हनुमान अंश’ बने शोभिनव सत्या, पूजने लगे लोग! ग्रहण तो नहीं बन जाएगी करोड़ों की हनुमान अंश?

हीरो बनने का सपना देखने वाले शोभिनव सत्या ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा बनकर छा गए. जानिए कैसे उन्हें ये रोल मिला और अब ‘बाबा’ वाली इमेज उनके करियर के लिए वरदान है या बंधन.

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हनुमान अंश के शोभिनव सत्या का गजब ट्रांसफॉर्मेशन (Photo: ITGD) हनुमान अंश के शोभिनव सत्या का गजब ट्रांसफॉर्मेशन (Photo: ITGD)

आरती गुप्ता

  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 9:07 AM IST

एक्टर बनने का सपना देखने वाले किसी लड़के से अगर कहा जाए कि पहली ही फिल्म में तुम हीरो नहीं, बल्कि एक संत का किरदार निभाओगे और लोग तुम्हें उसी रूप में पहचानने लगेंगे, तो शायद वो भी दो बार सोचेगा. शोभिनव सत्या के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है.

हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा का किरदार निभाकर वो अचानक घर-घर में पहचाने जाने लगे हैं. फिल्म की सफलता ने उन्हें वो शोहरत दे दी, जिसका इंतजार एक कलाकार सालों तक करता है. लेकिन अब असली सवाल है- क्या शोभिनव के लिए बाबा बनना वरदान है या आगे चलकर करियर का बंधन?

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क्योंकि जिस शोभिनव को पर्दे के पीछे काम करने वाला एक्टर-फिल्ममेकर माना जाता था, वो अब पर्दे पर इतने अलग अंदाज में दिखे कि उनकी पुरानी और नई तस्वीरों को देखकर फर्क करना मुश्किल हो जाता है.

कभी दिखते थे हैंडसम हंक, अब चेहरे पर दिखता है ‘महाराज’ वाला ठहराव

शोभिनव सत्या का ये ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ दाढ़ी, बाल और कपड़ों का खेल नहीं है. ‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा के रूप में उन्होंने अपना पूरा लुक ही बदल डाला. चेहरे पर दाढ़ी, माथे पर तिलक, साधारण कपड़े और बोलने-चलने का बेहद शांत अंदाज- वो स्क्रीन पर एक्टर कम और बाबा ज्यादा नजर आते हैं.

लेकिन दिलचस्प बात ये है कि शोभिनव का सफर किसी टिपिकल फिल्मी हीरो जैसा रहा ही नहीं. वो करीब एक दशक तक कैमरे के पीछे अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते रहे. FTII पुणे से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकेंड यूनिट डायरेक्टर और स्क्रिप्ट/कंटिन्युटी जैसे काम किए. ‘सीआईडी’ और ‘रागिनी एमएमएस रिटर्न्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स से भी उनका जुड़ाव रहा है.

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बॉलीवुड में आने के लिए उन्होंने पहले कैमरे के पीछे की दुनिया समझी और फिर कैमरे के सामने आ गए.

हाथ लग गया बाबा का रोल...

सबसे फिल्मी ट्विस्ट तो यहां आया. शोभिनव ‘हनुमान अंश’ में शुरुआत से लीड एक्टर बनकर नहीं आए थे. वो फिल्म की टीम में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे. लेकिन जिस एक्टर को पहले नीम करोली बाबा के रोल के लिए लिया गया था, उनकी तबीयत खराब हो गई.

फिर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर शोभिनव पर गई. उनका स्क्रीन टेस्ट हुआ और ये टेस्ट करीब पांच घंटे तक चला. इसके बाद शोभिनव को नीम करोली बाबा के किरदार के लिए चुन लिया गया. मतलब जिस इंसान को कैमरे के पीछे रहकर फिल्म बनानी थी, अचानक वही फिल्म का चेहरा बन गया. और किस्मत देखिए- पहली बड़ी एक्टिंग फिल्म ही ऐसी चली कि शोभिनव का नाम हर तरफ होने लगा.

अब लोग उन्हें शोभिनव नहीं, ‘बाबा’ के रूप में देखने लगे हैं

यहीं से उनके करियर की सबसे बड़ी उलझन शुरू होती है. एक तरफ ‘हनुमान अंश’ ने उन्हें जबरदस्त पहचान दी है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद से कहीं ज्यादा कमाई की और शोभिनव की एक्टिंग की भी तारीफ हुई.

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दूसरी तरफ उनका लुक इतना दमदार तरीके से बाबा वाले किरदार में बैठ गया है कि दर्शकों के दिमाग में उनकी एक खास इमेज बन गई है. और बॉलीवुड में इमेज बनना जितना अच्छा है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक भी हो सकता है. अगर किसी एक्टर को दर्शक एक खास किरदार में पसंद करने लगें, तो मेकर्स भी उसी तरह के रोल ऑफर करने लगते हैं.

खुद शोभिनव इस बात को कुबूल कर चुके हैं कि लोग उन्हें महाराज के रूप में पूजने लगे हैं. हालांकि ये लोगों की श्रद्धा है, लेकिन उन्हें इस बात का बुरा लगता है. क्योंकि वो सिर्फ एक इंसान हैं. ऐसे में वो लोगों को ऐसा करने से रोकने की कोशिश करते हैं.  

साफ है कि शोभिनव के सामने भी यही खतरा है- कहीं वो आने वाले सालों में संत, साधु, गुरु, महाराज और आध्यात्मिक किरदारों तक ही सीमित न हो जाएं. हालांकि शोभिनव बता चुके हैं कि वो सादगी से ही अपना जीवन जीना चाहते हैं. वो लगातार मिल रही लाइमलाइट से थोड़ा परेशान होते हैं.

क्या उन्हें ‘हैंडसम हंक’ वाली इमेज वापस लानी पड़ेगी?

अगर शोभिनव अब बॉलीवुड में लंबी पारी खेलना चाहते हैं तो उन्हें अगली फिल्म में बिल्कुल उल्टा अवतार चुनना पड़ सकता है. कोई मॉडर्न लड़का, नेगेटिव किरदार, एक्शन रोल, लवर बॉय या फिर ऐसा कैरेक्टर जिसमें दर्शक उन्हें पहचान ही न पाएं.

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क्योंकि एक ही फिल्म में बाबा बनकर लोगों के दिल में उतरना उनकी जीत है. और अब हनुमान अंश का दूसरा पार्ट आने वाला है. लेकिन अगली फिल्म में खुद को बाबा से बाहर निकालना उनकी असली परीक्षा होगी. और शायद यही वो जगह है जहां शोभिनव को सबसे ज्यादा सोच-समझकर कदम रखना होगा.

पछतावा? बिल्कुल नहीं! अभी तो इसे करियर का ‘चमत्कार’ कहना ज्यादा सही है. उनकी कहानी बताती है कि ये रोल उनके लिए अचानक आया मौका था और उन्होंने उसे पूरी ताकत से पकड़ लिया. फिल्म की शूटिंग के दौरान जब बाकी लोग प्रोजेक्ट से हट रहे थे, तब शोभिनव टीम के साथ टिके रहे. इसी वजह से उन्हें ‘लास्ट मैन स्टैंडिंग' भी कहा गया. असल सवाल ये है कि शोभिनव इस चमत्कार को करियर में कैसे बदलते हैं.

बॉलीवुड में फ्यूचर चमक सकता है, बस ‘बाबा’ बनकर न रह जाएं

शोभिनव की सबसे बड़ी ताकत ये है कि वो सिर्फ एक्टर नहीं हैं. उन्हें फिल्ममेकिंग की समझ है, FTII की ट्रेनिंग है और कैमरे के पीछे काम करने का लंबा अनुभव है. इसलिए अगर वो अगली कुछ फिल्मों में अपने लुक और किरदार के साथ एक्सपेरिमेंट करते हैं तो ‘हनुमान अंश’ उनके करियर की मंजिल नहीं, बल्कि असली शुरुआत साबित हो सकती है.

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फिलहाल तो एक बात साफ है- जिस आदमी ने बॉलीवुड में करीब एक दशक कैमरे के पीछे बिताया, उसे पहली बड़ी पारी में कैमरे के सामने ऐसा किरदार मिला कि अब पूरा देश उसे देख रहा है. अब देखना ये है कि शोभिनव नीम करोली बाबा की छवि से बाहर निकलकर खुद की स्टार इमेज बना पाते हैं या नहीं.

क्योंकि बाबा बनकर लोगों की श्रद्धा जीतना बड़ी बात है… लेकिन अगली फिल्म में बिना दाढ़ी-माला-तिलक के वही लोग सीटियां बजाएं- असल स्टारडम तो तब होगा!

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