5 मिनट का सीन और बदला Friendship Day, 'कुछ कुछ होता है' से शुरू हुआ फ्रेंडशिप बैंड का ट्रेंड

आज यानी फ्रेंडशिप डे मिलेनियल्स के लिए एक खास एहसास है. यह उन्हें उस दौर में ले जाता है, जहां दोस्ती का मतलब फ्रेंडशिप बैंड हुआ करता था. ये सब शुरू हुआ था, शाहरुख खान की फिल्म 'कुछ कुछ होता है' से.

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कुछ कुछ होता है का एक सीन (Photo: Instagram/ Dharma Productions) कुछ कुछ होता है का एक सीन (Photo: Instagram/ Dharma Productions)

शिखर नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:57 AM IST

'प्यार दोस्ती है... अगर वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त नहीं बन सकती, तो मैं उससे कभी प्यार कर ही नहीं सकता.' साल 1998 में आई शाहरुख खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कुछ कुछ होता है' का यह डायलॉग आज भी युवाओं की जुबान पर चढ़ा हुआ है. फ्रेंडशिप डे के खास मौके पर यह डायलॉग हर तरफ सुनने को मिल जाता है. करण जौहर के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट ही साबित नहीं हुई, बल्कि इसने देश के युवाओं की सोच और कल्चर में एक बहुत बड़ा बदलाव ला दिया था.

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इस फिल्म के आने के बाद भारत में फ्रेंडशिप डे मनाने का अंदाज ही पूरी तरह बदल गया और एक ऐसा ट्रेंड शुरू हुआ, जिसने हर उम्र के लोगों को अपना दीवाना बना लिया.

जब सिनेमा ने दिया फ्रेंडशिप बैंड का ट्रेंड
'कुछ कुछ होता है' के रिलीज होने के बाद देशभर में जिस एक चीज का सबसे बड़ा क्रेज देखने को मिला, वो था- फ्रेंडशिप बैंड. फिल्म के महज कुछ मिनटों के एक छोटे से सीन ने युवाओं के माइंडसेट को इस कदर प्रभावित किया कि 'फ्रेंडशिप डे' पर कलाई पर रंग-बिरंगा बैंड बांधना एक बेहद जरूरी फैशन और परंपरा बन गया. करण जौहर की इस फिल्म में शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी के बीच कॉलेज लाइफ से लेकर बड़े होने तक का एक बेहद खूबसूरत लव ट्राएंगल दिखाया गया था.

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फिल्म ने यह बात युवाओं के दिल में उतार दी कि प्यार की असली शुरुआत दोस्ती से ही होती है. वेस्टर्न फैशन और भारतीय भावनाओं के इस कॉकटेल को दर्शकों ने इतनी शिद्दत से अपनाया कि यह आज कई पीढ़ियों की खूबसूरत यादों का हिस्सा बन चुका है.

फिल्म के एक बेहद यादगार सीन में दिखाया गया था कि कॉलेज के स्टूडेंट्स एक-दूसरे को रंग-बिरंगे बैंड बांधकर फ्रेंडशिप डे मना रहे हैं. उसी दौरान शाहरुख खान यानी 'राहुल' कॉलेज में पहुंची नई लड़की टीना (रानी मुखर्जी) को फ्रेंडशिप बैंड देता है. यह सीन फिल्म के शुरुआती हिस्से में प्यार से ज्यादा दोस्ती की अहमियत को दिखाता है. इस एक सीन ने दर्शकों के दिलों पर इतनी गहरी छाप छोड़ी कि जो फ्रेंडशिप बैंड पहले भारत में लगभग अनजान हुआ करते थे. वे अचानक से हर किसी की पहली पसंद बन गए और युवाओं ने इस कल्चर को खुले दिल से गले लगा लिया.

बाजार में दिखा जबरदस्त असर
फिल्म के रिलीज होते ही इसका सीधा असर देश के बाजारों पर दिखाई देने लगा. सड़क किनारे लगने वाली छोटी-मोटी दुकानों से लेकर बड़े गिफ्ट शॉप्स तक, हर जगह कलरफुल फ्रेंडशिप बैंड्स की बहार आ गई. दिल, स्माइली, ग्लिटर और खूबसूरत कोट्स लिखे ये बैंड्स सिर्फ एक गिफ्ट नहीं रह गया था, बल्कि दोस्ती और इमोशंस को जाहिर करने का सबसे बड़ा जरिया बन गया. स्कूलों और कॉलेजों का आलम तो यह हो गया कि फ्रेंडशिप डे के दिन जिसके हाथ में सबसे ज्यादा बैंड बंधे होते थे, उसे उतना ही पॉपुलर माना जाता था. कभी-कभी तो ज्यादा बैंड्स को लेकर दोस्तों के बीच हल्की-फुल्की जलन और कॉम्पिटिशन तक शुरू हो जाता था.

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'कुछ कुछ होता है' की बदौलत ही भारत में फ्रेंडशिप डे का जश्न इन रंग-बिरंगे बैंड्स के बिना बिल्कुल अधूरा माना जाने लगा. करण जौहर ने इस ट्रेंड को फिल्म में इतनी बारीकी और खूबसूरती से पिरोया था कि इसने बिना किसी धार्मिक या सामाजिक भेदभाव के लोगों को आपस में जोड़ दिया. यह एक ऐसा माध्यम बन गया, जिसके जरिए कोई भी बड़ी आसानी से किसी के प्रति अपना प्यार, सम्मान और दोस्ती जाहिर कर सकता था. यह सिलसिला सालों-साल तक ऐसे ही चलता रहा.

सोशल मीडिया का दौर में बदलाव
आज के डिजिटल दौर में भले ही दोस्त एक-दूसरे को इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या फेसबुक पर टैग करके फ्रेंडशिप डे की शुभकामनाएं दे देते हैं, लेकिन आज की जनरेशन भी वही है जिसने कभी न कभी अपनी कलाई पर इन बैंड्स को बांधा है. उस दौर की यादें आज भी लोगों के दिलों में एकदम ताजा हैं. यह बैंड इतना खास होता था कि लोग फ्रेंडशिप डे बीत जाने के महीनों बाद तक इसे अपनी कलाई पर बांधे रखते थे.

आज भी जब टीवी पर 'कुछ कुछ होता है' आती है, तो यह हर किसी को अपने पुराने दोस्तों और उस दौर की मासूमियत की याद दिला ही देती है. आज जमाना भले ही जेन-जी का होगा लेकिन मिलेनियल्स इसे कभी नहीं भूल सकते. तो बताइए, आप इस बार आप अपने दोस्त को कलाई पर बैंड बांधने वाले हैं या सिर्फ सोशल मीडिया पर ही विश करेंगे?

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