एक तरफ जहां बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन फिल्म 'दृश्यम 3' की सफलता का जश्न मना रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर जुहू स्थित उनके एक आलीशान बंगले में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे कथित अवैध निर्माण पर BMC यानी मुंबई महानगरपालिका ने बड़ा हथौड़ा चलाया है. बीएमसी ने नोटिस देने के बावजूद काम न रोकने पर पिछले दिनों यानी 12 अक्टूबर को इस बंगले के कुछ हिस्सों को तोड़कर ध्वस्त कर दिया.
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अजय देवगन ने इस प्रॉपर्टी को एक सैलून कंपनी को लीज पर दिया था, जिसके बाद वहां आंतरिक बदलावों का काम चल रहा था और बिना अनुमति के किए जा रहे इन कामों ने नगर निगम की नींद उड़ा दी.
सैलून कंपनी को दी गई थी करोड़ों में प्रॉपर्टी
यह पूरा विवाद प्लॉट S-10, N S रोड नंबर 11, JVPD स्कीम स्थित करीब 7,802 वर्ग फुट के उस बंगले से जुड़ा है, जो देवगन परिवार का है. जानकारी के मुताबिक, इस बंगले को फ्लोरियन ह्यूरेल सैलून प्राइवेट लिमिटेड को 10 अगस्त 2026 को एक रजिस्टर्ड लीव-एंड-लाइसेंस एग्रीमेंट के तहत पांच साल के लिए लीज पर दिया गया था. इस डील की कुल कीमत करीब 10.61 करोड़ रुपये तय की गई थी, जिसमें शुरुआती मासिक किराया 16 लाख रुपये था और हर साल इसमें 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का नियम था.
इस लीज को लेकर कपूर को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी ने भी 22 जुलाई 2026 को एक नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया था, जिसमें पुष्टि की गई थी कि वीना वीरेंद्र देवगन और विशाल उर्फ अजय देवगन इस प्रॉपर्टी के कानूनी मालिक हैं और सोसाइटी को इसे लीज पर देने पर कोई आपत्ति नहीं है.
सोसाइटी की एनओसी पर खड़े हुए सवाल
हालांकि, इस पूरे मामले में हाउसिंग सोसाइटी का पक्ष भी बेहद अहम रहा है. सोसाइटी का साफ कहना है कि उन्होंने जो एनओसी दी थी, वह केवल बंगले को लीव-एंड-लाइसेंस के आधार पर उपयोग करने के लिए थी. सोसाइटी के मुताबिक, इस एनओसी में प्रॉपर्टी को रेजिडेंशियल (आवासीय) से कमर्शियल (व्यावसायिक) इस्तेमाल में पूरी तरह बदलने या किसी भी प्रकार के भारी स्ट्रक्चरल और सर्विस से जुड़े बदलावों को बिल्कुल भी मंजूरी नहीं दी गई थी. इसके बावजूद जब बंगले के अंदर कमर्शियल सैलून के हिसाब से बदलाव शुरू हुए, तो विवाद गहराता चला गया.
बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोजल डिपार्टमेंट की शुरुआती जांच और रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंगले के अंदर बिना किसी वैध मंजूरी के विभाजन की दीवारें, नई खिड़कियां और अन्य बड़े अंदरूनी बदलाव किए जा रहे थे. सैलून सेटअप के दौरान जो काम चल रहा था, उसके लिए नगर निगम से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी. स्थिति यह थी कि सिपोरेक्स ब्लॉक से जुड़े अनधिकृत निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी थे, जिसे लेकर स्थानीय स्तर पर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई थी और आखिरकार निगम को दखલ देना पड़ा.
नोटिस को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
नियमों की अनदेखी को देखते हुए मुंबई महानगरपालिका ने कड़ा कदम उठाया. बीएमसी एक्ट, 1888 की धारा 354A के तहत 10 सितंबर 2026 को एक औपचारिक नोटिस जारी किया गया था. इस नोटिस में बंगले के मालिक या वहां मौजूद रहने वाले लोगों को तुरंत प्रभाव से काम रोकने और 24 घंटे के भीतर संबंधित अथॉरिटी से सभी जरूरी मंजूरियां व दस्तावेज पेश करने का सख्त निर्देश दिया गया था. लेकिन, बार-बार चेतावनी और नोटिस मिलने के बावजूद जब निर्माण कार्य नहीं रोका गया, तो बीएमसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए 12 अक्टूबर को खुद मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण के उन हिस्सों को गिरा दिया, जो बिना इजाज़त के खड़े किए जा रहे थे.
दीपेश त्रिपाठी