जब हार का अंतर बहुत कम हो, तो उसे स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, खासकर खेलों में, जहां एक सेकंड का छोटा सा हिस्सा यह तय कर सकता है कि कोई एथलीट आगे बढ़ेगा या बिना फाइनल खेले घर लौट जाएगा. एशियाई खेलों में आर. माधवन के बेटे वेदांत माधवन के साथ भी यही हुआ, जहां भारतीय पुरुष 4x200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले टीम फाइनल के लिए क्वालिफाई करने से सिर्फ 0.2 सेकंड से चूक गई.
वेदांत, साजन प्रकाश, दक्षन शशिकुमार और अनीश सुनील की भारतीय टीम ने हीट में 13 टीमों के बीच 7:24.32 के समय के साथ नौवां स्थान हासिल किया. कतर की टीम 7:24.10 के समय के साथ आठवें स्थान पर रही और फाइनल के लिए क्वालिफाई करने वाली आखिरी टीम बनी.
बाद में वेदांत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इस नतीजे के बारे में पोस्ट किया और लिखा, 'फाइनल में जगह 0.2 सेकंड से चूका और सबसे अच्छा भारतीय होने से 0.5 सेकंड से चूका - 200 मीटर फ्रीस्टाइल इवेंट के बाद.' माधवन ने आभार जताने वाले इमोजी के साथ यह पोस्ट शेयर किया.
यह नतीजा वेदांत के एशियाई खेलों में डेब्यू के दौरान आया, लेकिन उनका अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्हें 23 सितंबर को पुरुषों की 200 मीटर फ्रीस्टाइल और 25 सितंबर को 200 मीटर बैकस्ट्रोक इवेंट में हिस्सा लेना है.
असफलता के बारे में माधवन ने क्या कहा है?
इससे पहले, एक्टर ने कई बार इस बारे में बात की है कि वे हार या असफलता को कैसे देखते हैं, खासकर फिल्म इंडस्ट्री में अपने अनुभवों के आधार पर. पत्रकार सोनिया शेनॉय के साथ बातचीत में, माधवन ने बताया था कि सिनेमा में असफलता को स्वीकार करना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि उसका रिएक्शन या नतीजा सभी को दिखाई देता है.
माधवन ने कहा, 'ज्यादातर बिजनेस में सफलता और असफलता एक सीमित दायरे में होती है. लेकिन हमारी इंडस्ट्री में, सब कुछ सबके सामने होता है.'
उन्होंने याद किया कि कैसे एक बड़ी फिल्म के पसंद न किए जाने पर एक आम आदमी ने एक बड़े सुपरस्टार की आलोचना की थी. माधवन के लिए, ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि जब कलाकारों का काम दर्शकों तक पहुंचता है, तो वे कितने खुले तौर पर लोगों की राय के दायरे में आ जाते हैं.
उन्होंने कहा, 'हमारी इंडस्ट्री का यही स्वभाव है, हर किसी को टिप्पणी करने का अधिकार है. एयरपोर्ट के सिक्योरिटी गार्ड से लेकर वॉचमैन तक, अगर उन्हें आपका काम पसंद आता है, तो वे उसकी तारीफ करेंगे. अगर नहीं, तो उनका रिएक्शन ही सब कुछ बता देता है. वही आपका रिपोर्ट कार्ड बन जाता है. यह दिखाता है कि एक कलाकार के तौर पर आप कितने संवेदनशील स्थिति में होते हैं.'
उनकी मुख्य बात यह है कि किसी काम के असफल होने को तुरंत इस बात का सबूत नहीं माना जाना चाहिए कि व्यक्ति में काबिलियत की कमी है. 'इसलिए, जहां सफलता आपको सुपरहीरो जैसा महसूस करा सकती है, वहीं असफलता को फीडबैक के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए - यह आपके टैलेंट की नहीं, बल्कि आपके द्वारा लिए गए फैसलों की झलक होती है.'
माधवन असफलता को 'डेटा' क्यों कहते हैं?
माधवन ने असफलता को ऐसी चीज बताया है जो यह जानकारी दे सकती है कि क्या गलत हुआ. इसे सिर्फ हार के तौर पर देखने के बजाय, उन्होंने कहा कि वे इसे इस संकेत के तौर पर देखते हैं कि उनके काम करने के तरीके में कुछ बदलाव की जरूरत है.
उन्होंने कहा है, 'मेरे लिए, मेरी सबसे बड़ी टीचर असफलता रही है. मैं इसका स्वागत करता हूं. क्योंकि समझौता करके मिली सफलता कभी भी शानदार असफलता जितनी कीमती नहीं होती. अगर मैंने अपना 100% दिया और फिर भी असफल रहा, तो यह मुझे साफ तौर पर बताता है कि मेरी समझ या तरीका गलत था और यह एक कीमती डेटा है.'
माधवन ने उस सोच के बारे में बताया जिसने मुश्किलों से निपटने के उनके तरीके को आकार दिया है. 'असफलताएं कोई रुकावट नहीं होतीं, वे डेटा पॉइंट्स की तरह होती हैं और इसी सोच की वजह से, मेरी असफलताएं कभी भी बहुत बड़ी मुसीबत नहीं बनीं.'
उन्होंने यह भी कहा है कि नतीजा इस बात पर भी निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति हुई घटना को किस नजरिए से देखता है. 'लेकिन किस्मत से ज्यादा जरूरी यह है कि आप असफलता को कैसे समझते हैं. अगर आप इसे हार के बजाय कुछ सीखने के मौके के तौर पर देखते हैं, तो सब कुछ बदल जाता है.'
वहीं, वेदांत के लिए रिले फाइनल में न पहुंच पाना अब सीखने का एक मौका है, जबकि अभी भी दो व्यक्तिगत इवेंट्स होने बाकी हैं.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क