बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर बहस काफी सालों से चल रही है. साल 2020 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद, ये चर्चा और भी ज्यादा होने लगी है. कई स्टारकिड्स को बेवजह ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है. हाल ही में अरशद वारसी ने इस मुद्दे पर बात की और अपना पक्ष रखा, जिसमें उन्होंने बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत का भी जिक्र किया.
नेपोटिज्म पर बोले अरशद
अरशद ने फिल्मीज्ञान संग बातचीत में नेपोटिज्म पर होने वाली बहस पर कहा कि वो जब इस इंडस्ट्री में आए थे, तब ये चर्चा नहीं होती थी. इसकी शुरुआत कंगना रनौत से हुई. एक्टर ने कहा- मुझे नेपोटिज्म से कोई दिक्कत नहीं है, मैं उनसे बेहद प्यार करता हूं. जब मैं फिल्मों में आया था, तब ये टॉपिक नहीं था. इसकी शुरुआत कंगना से हुई, वो ये आइडिया लेकर पहले आई थीं और फिर ये मुद्दा बड़ा होने लगा और सभी ने बात करनी शुरू की.
'हां नेपोटिज्म इंडस्ट्री में है, लेकिन क्या इससे मुझे कोई फर्क पड़ता है? नहीं, क्योंकि मेरा दिल कहता है कि आप कितने टैलेंटेड हैं अंत में वही चीज निर्भर करती है. उसी के दम पर आप आगे भी जाने वाले हो. साथ ही साथ मैं ये भी समझता हूं कि किसी भी स्टारकिड के लिए इंडस्ट्री में सर्वाइव करना आसान नहीं है. उनसे कई ज्यादा उम्मीदें रहती हैं. मैं यही चीज आज के समय में अपने बच्चों के साथ होते हुए देखता हूं.'
बच्चों के लिए सताया डर
अरशद वारसी ने कहा कि उन्हें जो लोग मिलते हैं, वो मानते हैं कि उनकी तरह उनके बच्चे भी टैलेंटेड होंगे. वो अपने पिता की तरह अच्छे एक्टर होंगे. ये बात एक्टर को काफी चिंता में डालती है. उनका मानना है कि उनके बच्चों की पर्सनैलिटी उनसे काफी अलग होगी, इसलिए ये बात सही नहीं है.
अरशद कहते हैं कि स्टारकिड्स के लिए हर किसी की उम्मीद काफी बड़ी होती हैं, जो उनके साथ अन्याय है. हालांकि वो ये मानते हैं कि स्टार किड्स को इंडस्ट्री में बाहर वालों के मुकाबले बेहतर कनेक्शन मिलते हैं, जिससे उनका फिल्मों में आने का रास्ता आसान होता है. मगर आगे की जर्नी उनके लिए उतनी ही मुश्किल रहती है, जितनी एक आउटसाइडर के लिए होती है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क