पिछले कुछ समय में वृंदावन के प्रेमानंद महाराज से मिलने वाले सेलिब्रिटीज की तस्वीरें जिस तरह सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, उसने आध्यात्मिकता को भी पॉप कल्चर का हिस्सा बना दिया. अब कुछ ऐसा ही ट्रेंड कैंची धाम को लेकर दिखाई दे रहा है. फर्क बस इतना है कि यहां केंद्र में हैं नीम करोली बाबा और उनके आशीर्वाद की कहानियां. सवाल यह नहीं कि लोगों की आस्था सच्ची है या नहीं, सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया और सितारों की देखा-देखी किसी जगह को नया 'हॉटस्पॉट' बना देती है?
कैंची धाम कोई नया धार्मिक स्थल नहीं है. नीम करोली बाबा से जुड़ा यह आश्रम दशकों से श्रद्धा का केंद्र रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी. विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के 2022 में कैंची धाम पहुंचने के बाद इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. इससे पहले स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग से जुड़ी नीम करोली बाबा की कहानियों ने भी इस जगह को ग्लोबल पहचान दी.
अब 'हनुमान अंश' ने बाबा की कहानी को बड़े पर्दे पर पहुंचाया तो यह चर्चा आम दर्शक तक भी पहुंच गई. एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में ही करीब 24.34 लाख लोग कैंची धाम पहुंचे, जबकि पिछले वर्षों में सालाना आंकड़ा करीब 8 लाख के आसपास था.
और अब तस्वीर ऐसी है कि कैंची धाम में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही. 3 अक्टूबर को गेट से हाईवे तक श्रद्धालुओं की भीड़ और लंबी कतारों की तस्वीरें सामने आईं. रिपोर्ट्स के मुताबिक भीड़ संभालना मुश्किल हो गया और आसपास के रास्तों पर भी भारी दबाव पड़ा. 15 जून को कैंची धाम के स्थापना दिवस पर ही एक लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया गया था.
इसी माहौल में टीवी एक्ट्रेस रश्मि देसाई भी अपने नए शो सयोनी की शुरुआत से पहले नीम करोली बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंचीं. वहीं हनुमान अंश की टीम का कैंची धाम से जुड़ाव लगातार चर्चा में रहा है. यानी नई फिल्म हो, नया शो हो या जिंदगी का नया पड़ाव- बाबा का आशीर्वाद लेने का यह सिलसिला अब ग्लैमर वर्ल्ड की तस्वीरों में भी दिखने लगा है.
लेकिन यहीं कहानी थोड़ी दिलचस्प और थोड़ी असहज हो जाती है.
आस्था या 'वायरल होने' का नया फॉर्मूला?
आज का दौर ऐसा है जहां कोई सेलिब्रिटी किसी मंदिर में जाता है, तस्वीर सामने आती है, वीडियो वायरल होता है और फिर हजारों लोग उसी जगह पहुंचने लगते हैं. प्रेमानंद महाराज के साथ भी सोशल मीडिया ने उनकी लोकप्रियता को जबरदस्त रफ्तार दी. एक रिपोर्ट में उनकी लोकप्रियता को डिजिटल दौर की आध्यात्मिक लोकप्रियता से जोड़ते हुए बताया गया था कि 2024 के बाद सोशल मीडिया पर उनकी पहुंच तेजी से बढ़ी.
कैंची धाम के साथ भी कुछ ऐसा ही पैटर्न नजर आता है- पहले किसी बड़े नाम की विजिट, फिर सोशल मीडिया की चर्चा, उसके बाद फिल्म या वायरल कंटेंट और फिर वहां पहुंचने की लोगों में होड़. हनुमान अंश की सफलता के बाद तो यह कनेक्शन और साफ दिखा. फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी को भी 5 अक्टूबर को लोगों से कैंची धाम जाने से पहले वहां की भीड़ की जानकारी लेने की अपील करनी पड़ी. उन्होंने यह भी कहा कि बाबा से जुड़े दूसरे स्थानों पर भी जाया जा सकता है.
बेशक, हर व्यक्ति जो कैंची धाम जा रहा है, वह ट्रेंड फॉलो करने नहीं जा रहा. किसी के लिए यह वर्षों पुरानी श्रद्धा है, किसी के लिए मन की शांति और किसी के लिए बाबा के प्रति सच्ची आस्था. लेकिन जब किसी धार्मिक स्थल की पहचान में सेलिब्रिटी + सोशल मीडिया + फिल्म + वायरल वीडियो चारों एक साथ जुड़ जाएं, तो आस्था और ट्रेंड के बीच की लकीर धुंधली होना स्वाभाविक है.
शायद यही आज की आध्यात्मिकता का नया चेहरा है- पहले लोग किसी जगह की महिमा सुनकर वहां जाते थे, अब कई बार जगह पहले स्क्रीन पर आती है और फिर इंसान वहां पहुंचता है. कैंची धाम इस बदलते दौर की सबसे दिलचस्प मिसाल बनता दिख रहा है. सवाल सिर्फ यह नहीं कि वहां भीड़ क्यों बढ़ रही है, सवाल यह भी है कि क्या हम आस्था खोज रहे हैं या उस आस्था का ट्रेंड?
आरती गुप्ता