भोजपुरी इंडस्ट्री के बड़े सितारों को एक ही मंच पर लाने वाला रियलिटी शो ‘भोजपुरी बवाल’ शुरुआत से ही सुर्खियों में है. पवन सिंह, दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’, आम्रपाली दुबे, काजल राघवानी और तेज प्रताप यादव जैसे चर्चित चेहरे शो में नजर आ रहे हैं. शो का फॉर्मेट पारंपरिक रियलिटी शोज से अलग है. यहां न कोई टास्क है, न एलिमिनेशन और न ही जीत-हार का खेल. पूरा दारोमदार सितारों की बातचीत, उनकी निजी कहानियों और आपसी केमिस्ट्री पर है.
कैसा है भोजपुरी बवाल
पहले एपिसोड की शुरुआत में कलाकार अपने अनुभव और इंडस्ट्री से जुड़े किस्से शेयर करते दिखाई देते हैं. पवन सिंह की जिंदगी से जुड़ी स्टेज घटना और उनके संघर्ष का हिस्सा पहले एपिसोड को भावनात्मक बनाता है. तेज प्रताप यादव का अलग अंदाज शो में राजनीतिक रंग घोलता है. उनका ‘यादव हैं तो कृष्ण जी जैसे लगेंगे ही’ वाला बयान भी चर्चा में आ चुका है.
हालांकि, शो का सबसे बड़ा आकर्षण कई जगह इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाता है. बातचीत को बेबाक बनाने की कोशिश में पवन सिंह का गाली-गलौज वाला अंदाज असहज करता है. मेकर्स ने इसे स्टार के दबंग व्यक्तित्व की तरह पेश किया है, लेकिन हर दर्शक इस तरह की भाषा से सहज महसूस करे, ये जरूरी नहीं है.
काजल राघवानी और आम्रपाली दुबे कैमरे के सामने ज्यादा सहज और प्रभावी लगती हैं. इसके बावजूद एपिसोड में कोई मजबूत कहानी या क्लियप नैरेटिव नहीं बन पाता. कई हिस्से ऐसे लगते हैं, जैसे सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले छोटे-छोटे क्लिप्स को जोड़कर लंबा एपिसोड तैयार किया गया हो.
फाइनल वर्डिकट
‘भोजपुरी बवाल’ कट्टर भोजपुरी फैंस के लिए सितारों को करीब से देखने का मौका है, लेकिन कंटेंट के स्तर पर यह शो अभी सिर्फ गाली, गुस्सा, गॉसिप और ग्लैमर का कॉकटेल बनकर रह गया है. अगर आपको सेलिब्रिटी ड्रामा और वायरल मोमेंट्स पसंद हैं, तो शो एक बार देखा जा सकता है. गंभीर और दमदार रियलिटी कंटेंट की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को निराशा हाथ लग सकती है.
आपने भोजपुरी बवाल देखना शुरू किया या नहीं? अगर देखना शुरू किया है, तो अपनी राय जरूर बताइएगा.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क