उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सरकार के साथ मंथन के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े अब लखनऊ से बाहर निकलकर सूबे के अलग-अलग क्षेत्रों की सियासी नब्ज समझने के लिए प्रवास करेंगे. 'मिशन-2027' के तहत तावड़े मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ यानी गोरखपुर से अपना मैराथन दौरा शुरू कर रहे हैं.
बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े 17 और 18 सितंबर को गोरखपुर में प्रवास करते हुए गोरख क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों की सियासी नब्ज टटोलने के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनावों में लगे झटकों की भरपाई का जमीनी रोडमैप भी तैयार करेंगे.
उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिहाज से पूर्वांचल का गोरखपुर क्षेत्र बीजेपी का सबसे मजबूत दुर्ग माना जाता है. सीएम योगी का गृह जनपद गोरखपुर है और 2022 में बीजेपी इस इलाके की 70 फीसदी सीटें जीतने में सफल रही थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का समीकरण गड़बड़ाया है. इसी मद्देनजर विनोद तावड़े अपने मिशन 2027 का आगाज गोरखपुर क्षेत्र से कर रहे हैं.
तावड़े का 2 दिवसीय गोरखपुर शेड्यूल
विनोद तावड़े के दौरे की खास बात यह है कि वह एक ही मंच पर संगठन के पदाधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अलग-अलग बैठकों में इन सभी से संवाद करेंगे. वो क्षेत्रीय संगठन की कार्यप्रणाली और जिला स्तर तक संगठन की सक्रियता को अलग-अलग स्तर पर समझने की कवायद करेंगे.
विनोद तावड़े पहले दिन सहजनवा विधानसभा क्षेत्र स्थित राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालय/अटल आवासीय विद्यालय में ‘आशीर्वाद का दीया’ और मिष्ठान वितरण कार्यक्रम में भाग लेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर चल रहे सेवा कार्यक्रमों के बीच यह कार्यक्रम संगठन के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा होगा. इसके बाद उनका रात्रि विश्राम होगा.
दूसरे दिन का कार्यक्रम पूरी तरह संगठनात्मक संवाद पर केंद्रित है. क्षेत्रीय कार्यालय में वे गोरक्ष क्षेत्र में आने वाले 12 जिलों के पदाधिकारियों, समिति सदस्यों, जिलाध्यक्षों, जिला महामंत्रियों और क्षेत्र में निवास करने वाले प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. इस बैठक के जरिए वे क्षेत्र में पार्टी के संगठनात्मक कामकाज का जमीनी फीडबैक लेंगे.
विधायक और सांसदों के साथ संवाद
गोरखपुर क्षेत्र के विधायकों और एमएलसी के साथ बैठक में जनप्रतिनिधियों के रिपोर्ट कार्ड और आंतरिक नाराजगी पर सीधी चर्चा होगी. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संवाद के तहत पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों, पूर्व महापौरों और स्थानीय निकायों के पूर्व अध्यक्षों के अनुभवों से आगे की रणनीति तय की जाएगी.
डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका को देखते हुए तावड़े क्षेत्रीय और जिला स्तर के मीडिया तथा सोशल मीडिया प्रभारियों से भी संवाद करेंगे. इसके जरिए पार्टी कार्यक्रमों और संगठन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा होगी. लगातार बैठकों के क्रम में तावड़े क्षेत्रीय संगठन के अलग-अलग वर्गों से सीधे फीडबैक लेंगे, खासकर जिलों से लेकर विधानसभा और बूथ स्तर तक की गतिविधियों पर स्थानीय पदाधिकारी अपनी स्थिति रख सकेंगे.
पूर्वांचल को साधने का मास्टर प्लान
गोरखपुर क्षेत्र में बीजेपी की नजरें खासतौर से बस्ती और आजमगढ़ मंडल की उन सीटों पर हैं, जहां पिछले चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था. गोरक्ष क्षेत्र के अंतर्गत 12 संगठनात्मक जिले आते हैं, जिनमें गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया आदि शामिल हैं.
बीजेपी ने गोरखपुर जिले की सभी 9 की 9 सीटों पर क्लीन स्वीप किया था. देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज जिलों में भी बीजेपी और एनडीए का पलड़ा भारी रहा था. वहीं, आजमगढ़ और मऊ मंडल में बीजेपी के लिए चिंता की स्थिति बनी हुई है. आजमगढ़ जिले की 10 सीटों पर सपा ने क्लीन स्वीप किया था, जबकि मऊ और आसपास की सीटों पर सपा-सुभासपा गठबंधन ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी.
2022 में गोरक्ष क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों में से बीजेपी नेतृत्व वाले एनडीए ने कुल 46 सीटें जीती थीं. इसमें बीजेपी को 42 और निषाद पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली थी. समाजवादी पार्टी ने इस इलाके में 12 विधानसभा सीटें जीती थीं. 2017 के चुनावों की तुलना में सपा ने पूर्वांचल के इस इलाके में काफी सुधार किया था. सपा की सहयोगी रही सुभासपा ने 04 सीटें जीती थीं.
गोरक्ष क्षेत्र में 2027 के लिए चुनौतियां
2022 में सुभासपा ने सपा के साथ मिलकर 4 सीटें जीती थीं, लेकिन अब ओपी राजभर एनडीए का हिस्सा हैं. इससे एनडीए का जमीनी समीकरण और मजबूत हुआ है. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्वांचल की कई सीटों पर सपा (PDA फॉर्मूले) ने बढ़त बनाई थी, जिसके बाद बीजेपी ने कमजोर बूथों और सीटों को दुरुस्त करने के लिए विशेष रणनीति बनाई है.
गोरक्ष क्षेत्र की 62 सीटों पर बूथ वार समीक्षा की जा रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी जिन बूथों पर पिछड़ी थी, वहां जातीय और राजनीतिक समीकरण दुरुस्त किए जा रहे हैं. विधायकों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बैठाने की कोशिश है. इस क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को लेकर स्थानीय स्तर पर जो असंतोष है, उसका स्वतंत्र फीडबैक जुटाकर संभावित प्रत्याशियों का आकलन किया जा रहा है.
पूर्वांचल में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक लामबंदी के जवाब में भाजपा 'लाभार्थी वर्ग' को पुनः सक्रिय करने और कैडर को एकजुट करने का एजेंडा लागू कर रही है. बीजेपी इस इलाके में 2027 के चुनाव से पहले अपने सियासी समीकरण को पूरी तरह मजबूत करने में जुट गई है ताकि सत्ता की हैट्रिक लग सके.
कुबूल अहमद