विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी हाईकमान ने भूपेश बघेल को हटाकर सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया है. यह बदलाव इसलिए बेहद मायने रखता है कि पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ महीनों से कलह से जूझ रही है.
सचिन पायलट के सामने तत्काल चुनौती आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य कांग्रेस में जारी गुटबाजी को दूर करना होगी. यह घटनाक्रम पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले हुआ है. माना जा रहा है कि अगले साल की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं.
दरअसल, पंजाब में कांग्रेस बड़े पैमाने पर अपने अंदरूनी विवाद और खींचतान से जूझ रही है. पंजाब कांग्रेस में कलह उस समय तेज हुई, जब पार्टी नेतृत्व ने एक जुलाई को अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को पार्टी की चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त करने का फैसला किया.
चन्नी के नेतृत्व वाले गुट ने वडिंग को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले का विरोध किया. साथ ही उन्हें पद से हटाने की मांग की. चन्नी समर्थक नेताओं का कहना है कि उन्हें (चन्नी) आगामी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया जाए.
भूपेश बघेल के हालिया पंजाब दौरों के बावजूद दोनों विरोधी गुटों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका. पार्टी के कार्यक्रमों में गुटबाजी लगातार अधिक स्पष्ट होती गई. कई बार मंच पर दोनों गुट के समर्थकों के बीच जुबानी झड़प हो गई.
31 जुलाई से 8 अगस्त तक कांग्रेस के ‘हर बूथ, कांग्रेस मजबूत’ अभियान के दौरान कलह खुलकर सामने आ गई. चन्नी समर्थकों ने उनके समर्थन में ‘चन्नी लियाओ, पंजाब बचाओ’ के नारे लगाए. कई बैठकों में चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच तीखी बहस भी हुई.
यहां तक कि भूपेश बघेल को भी विरोध का सामना करना पड़ा. मुक्तसर में तो 'गो बैक बघेल' के पोस्टर लगाए गए. लुधियाना में एक कार्यक्रम में कुछ लोग 'बघेल गो बैक' लिखी टी-शर्ट पहने हुए भी दिखाई दिए. स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब वडिंग ने प्रदर्शनकारियों को 'RSS एजेंट' कह दिया.
राज्य नेतृत्व को लेकर जारी गुटबाजी के बावजूद बघेल का कहना था कि एक बार पार्टी हाईकमान फैसला ले ले, तो उसे बदला नहीं जा सकता. आंतरिक मतभेदों के बीच पिछले महीने कांग्रेस के 15 विधायकों ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर उनसे मुलाकात का समय मांगा था, ताकि इन मुद्दों पर चर्चा की जा सके.
ऐसे में कांग्रेस में संगठनात्मक मामलों को संभालने का अनुभव रखने वाले सचिन पायलट के सामने बड़ी जिम्मेदारी है. इसमें पंजाब में दोनों विरोधी गुटों को एकजुट करना और मजबूती से चुनाव अभियान सुनिश्चित करना शामिल है.
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