अयोध्या मंडल का अंबेडकरनगर अपनी राजनीतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और औद्योगिक पहचान के लिए जाना जाता है. डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर बसे इस जिले की पहचान समाजवादी विचारधारा के प्रमुख नेता राम मनोहर लोहिया, किछौछा शरीफ की दरगाह, श्रवण क्षेत्र और टांडा ताप विद्युत परियोजना से भी जुड़ी है.
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित अंबेडकरनगर का जिला मुख्यालय अकबरपुर है. 29 सितंबर 1995 को तत्कालीन फैजाबाद जिले से अलग करके अंबेडकरनगर जिले का गठन किया गया था. इसका नाम डॉ. भीमराव आंबेडकर की स्मृति में रखा गया, जिन्होंने वंचित वर्गों, महिलाओं और समाज के कमजोर तबकों के उत्थान के लिए काम किया. अकबरपुर शहर तमसा नदी के किनारे बसा है. नदी शहर के अकबरपुर और शहजादपुर हिस्सों को अलग करती है. जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी विवरण में अकबरपुर के विकास को मुगलकाल से जोड़ा गया है. सरकारी वेबसाइट पर दर्ज विवरण के अनुसार, 1566 में सम्राट अकबर के इस क्षेत्र में आने और यहां बस्ती बसाए जाने का उल्लेख मिलता है.
राम मनोहर लोहिया की जन्मस्थली है अकबरपुर
अंबेडकरनगर की पहचान देश के प्रमुख समाजवादी नेताओं में शामिल डॉ. राम मनोहर लोहिया से भी है. लोहिया स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी राजनीतिक विचारक थे. सामाजिक समानता और पिछड़े वर्गों के अधिकारों से जुड़े उनके विचारों का भारतीय राजनीति पर व्यापक प्रभाव रहा. जिले की राजनीतिक पहचान में कई अन्य नाम भी अहम हैं. लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, राममूर्ति वर्मा, त्रिभुवन दत्त, राकेश पांडेय और धर्मराज निषाद जैसे नाम यहां की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं.
किछौछा शरीफ की दरगाह, जहां देश-विदेश से पहुंचते हैं जायरीन
अंबेडकरनगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अशरफपुर किछौछा शरीफ की दरगाह का खास स्थान है. जिला प्रशासन की पर्यटन संबंधी वेबसाइट के मुताबिक, यह सूफी संत हजरत मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी से जुड़ा स्थल है. यहां सालभर जायरीन पहुंचते हैं. उर्स के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का उल्लेख जिला प्रशासन करता है. जिले की धार्मिक पहचान केवल किछौछा शरीफ तक सीमित नहीं है. श्रवण क्षेत्र, शिवबाबा मंदिर और गोविंद साहब धाम भी यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं. श्रवण क्षेत्र में माघ पूर्णिमा के अवसर पर बड़ा मेला यहां आयोजित होता है. वहीं, गोविंद साहब मेले में भी आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. इन स्थलों से अंबेडकरनगर की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता सामने आती है. यहां अलग-अलग आस्था से जुड़े केंद्र स्थानीय परंपराओं और मेलों के माध्यम से जिले की पहचान को मजबूत करते हैं.
टांडा की बिजली परियोजना और जिले की औद्योगिक पहचान
अंबेडकरनगर की पहचान धार्मिक स्थलों और राजनीति के अलावा उद्योग से भी जुड़ी है. जिले में स्थित एनटीपीसी टांडा ताप विद्युत परियोजना प्रमुख औद्योगिक संस्थानों में शामिल है. यह कोयले से बिजली उत्पादन करने वाला संयंत्र है. जिला प्रशासन के परिचय पृष्ठ पर टांडा क्षेत्र में एनटीपीसी के अलावा अन्य औद्योगिक गतिविधियों और अकबरपुर के आसपास स्थित संस्थानों का भी उल्लेख मिलता है. इससे जिले में उद्योग और स्थानीय रोजगार की भूमिका का अंदाजा लगाया जा सकता है. अकबरपुर और टांडा जिले के प्रमुख शहरी केंद्र हैं. जलालपुर भी जिले का महत्वपूर्ण कस्बा है. इन क्षेत्रों की पहचान व्यापार, स्थानीय बाजारों और आसपास के ग्रामीण इलाकों से जुड़ी गतिविधियों से बनती है. 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, अंबेडकरनगर की आबादी लगभग 23.98 लाख थी. जिले की साक्षरता दर 74.37 प्रतिशत और लिंगानुपात प्रति एक हजार पुरुषों पर 976 महिलाओं का दर्ज है.
अंबेडकरनगर की पांच विधानसभा सीटें
जिले में पांच विधानसभा सीटें है. कटेहरी, टांडा, आलापुर , जलालपुर और अकबरपुर
यहां 2022 में सपा का परचम
अकबरपुर : इसी सीट पर समाजवादी पार्टी से रामअचल राजभर की साख दांव पर थी. उन्होंने बीजेपी के धर्मराज निषाद, बसपा के चंद्रप्रकाश वर्मा और कांग्रेस के प्रियंका जायसवाल को पिछाड़ते हुए जीत दर्ज की
अलापुर: यहां से समाजवादी पार्टी के त्रिभुवन दत्त, बीजेपी से त्रिवेणीराम, कांग्रेस से सत्यमवदा पासवान और बसपा से केशरादेवी गौतम के भाग्य का फैसला होना था. यहां से समाजवादी पार्टी के त्रिभुवन दत्त ने जीत दर्ज की
जलालपुर: इस सीट पर बीजेपी से सुबाष चंद्र राय, सपा से राकेश पांडे, बसपा से राजेश सिंह और कांग्रेस से रागिनी पाठक की किस्मत दांव पर लगी थी. यहां से सपा के राकेश पांडे ने बसपा के राजेश सिंह को 13,630 वोटों से हरा दिया.
कटेहारी: समाजवादी पार्टी से लालजी वर्मा, निषाद पार्टी से अवधेश कुमार, कांग्रेस से निशत फातिमा और बसपा से प्रतीक पांडे की साख दांव पर लगी हुई थी. यहां से समाजवादी पार्टी के लालजी वर्मा ने जीत दर्ज की.
टांडा: बीजेपी के कपिल देव को समाजवादी पार्टी के राममूर्ति वर्मा, बसपा के शबाना खातून और कांग्रेस की मेराजुद्दीन के भी किस्मत का फैसला होना था. यहां से सपा के राममूर्ति वर्मा ने जीत हासिल की.
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