तमिलनाडु चुनाव: कनिमोझी ने राहुल गांधी से की मुलाकात, सीट शेयरिंग पर अब तक नहीं बनी बात

यह मुलाकात 10 जनपथ पर हुई, जहां राहुल गांधी ने डीएमके से आग्रह किया कि सीट शेयरिंग से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा गठित टीम से बातचीत की जाए.

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डीएमके नेता के. कनिमोझी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की (File Photo- PTI) डीएमके नेता के. कनिमोझी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की (File Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:59 PM IST

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही बातचीत अभी निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंच सकी है. बुधवार को डीएमके नेता के. कनिमोझी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सीट बंटवारे को लेकर कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, यह मुलाकात 10 जनपथ पर हुई, जहां राहुल गांधी ने डीएमके से आग्रह किया कि सीट शेयरिंग से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा गठित टीम से बातचीत की जाए. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा और सीटों की संख्या पर कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई, लेकिन इस बात पर जोर दिया गया कि गठबंधन में कांग्रेस को सम्मानजनक स्थान और भूमिका मिलनी चाहिए.

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तमिलनाडु कांग्रेस के नेता इस बार विधानसभा चुनाव में अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि पार्टी को न सिर्फ पिछली बार से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए, बल्कि सत्ता में भी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए. हालांकि डीएमके इस मुद्दे पर फिलहाल लचीले रुख में नहीं दिख रही है और वह कांग्रेस को 2021 के विधानसभा चुनाव से अधिक सीटें देने के लिए तैयार नहीं है. गौरतलब है कि 2021 में कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 18 सीटों पर जीत हासिल की थी.

सूत्रों का कहना है कि डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के कांग्रेस नेतृत्व के साथ अच्छे संबंध हैं, ऐसे में सीट शेयरिंग का यह मसला अंततः बातचीत के जरिए सुलझ जाने की उम्मीद है.

इस बीच कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को लेकर भी चर्चा चल रही है और इसे संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व की प्राथमिकता अब भी डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की ही है.

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