पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी जगतार सिंह हवारा को तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में शिफ्ट करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. IB ने अदालत को बताया कि हवारा की पंजाब में शिफ्टिंग का आगामी विधानसभा चुनावों पर बड़ा असर पड़ सकता है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में IB ने कहा कि हवारा हाई रिस्क कैटेगरी का कैदी है और उसे पंजाब की जेल में ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए. एजेंसी ने आशंका जताई कि हवारा को पंजाब शिफ्ट करने से आगामी विधानसभा चुनावों पर बड़ा असर पड़ सकता है.
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील एस मुरलीधर से कहा कि खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट बेहद गंभीर है. इस पर मुरलीधर ने दलील दी कि अगर चुनाव को लेकर चिंता है तो इस मामले को तीन महीने बाद सुना जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगले साल फरवरी में तय की है.
पंजाब विधानसभा की 117 सीटों के लिए अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं. ऐसे में IB की यह रिपोर्ट अहम मानी जा रही है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह हवारा की याचिका पर IB से राय ले. हवारा ने तिहाड़ से पंजाब की किसी जेल में ट्रांसफर किए जाने की मांग की है.
बब्बर खालसा का यह आतंकवादी, अगस्त 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है.
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवारा जेल से भागने की घटना में शामिल था और हत्या के मामले में उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था.
यह दलील देते हुए कि उसे दूसरी जगह भेजने से उसके भागने का खतरा बढ़ सकता है, भाटी ने 'हाई-रिस्क' कैदियों के ट्रांसफर को लेकर गृह मंत्रालय की एक एडवाइजरी का हवाला दिया.
उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा दाखिल एक हलफनामे का भी जिक्र किया और कहा कि हवारा को दूसरी जगह भेजने से राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है.
जेल में सुरंग खोदने का दोषी
भाटी ने बताया कि चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदने के एक मामले में हवारा को दोषी ठहराया गया है.
पिछले साल 27 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने हवारा की याचिका पर केंद्र, चंडीगढ़ प्रशासन और दिल्ली तथा पंजाब सरकारों को नोटिस जारी किया था.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि जनवरी 2004 में जेल से भागने की घटना को छोड़कर, जेल में हवारा का आचरण बिल्कुल बेदाग रहा है.
याचिका में कहा गया है कि उसे तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी दूसरी जेल में ट्रांसफर कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी (दिल्ली) में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है.
22 जनवरी 2004 को, हवारा, परमजीत सिंह भ्योरा, तारा और हत्या के दोषी देवी सिंह ने चंडीगढ़ की हाई-सिक्योरिटी बुड़ैल जेल में लगभग 100 फुट लंबी सुरंग खोदकर वहां से भागने में कामयाबी हासिल की थी.
अगले दो वर्षों के भीतर हवारा और भ्योरा को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.इस मामले में भगोड़ा घोषित तारा को थाईलैंड में गिरफ्तार किया गया था, जबकि देवी सिंह अभी भी फरार है और उसे भी भगोड़ा घोषित किया जा चुका है.याचिका में कहा गया है, "याचिकाकर्ता (हवारा) पंजाब राज्य में दर्ज एक मामले में आजीवन कारावास (जीवन भर के लिए कैद) की सजा काट रहा है... वह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले का रहने वाला है, इसलिए उसे पंजाब की किसी जेल में रखा जाना चाहिए.
याचिका के अनुसार, बेअंत सिंह की हत्या के बाद हवारा पर 36 झूठे मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से एक को छोड़कर बाकी सभी मामलों में वह बरी हो चुका है.इसमें यह भी बताया गया है कि उसी मामले में दोषी ठहराए गए और जेल से भागने की घटना में शामिल एक अन्य व्यक्ति को तिहाड़ जेल से चंडीगढ़ की एक जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है.
याचिका में कहा गया है, "केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता को कई साल पहले 'हाई-रिस्क'कैदी माना गया था, आज उसे दिल्ली में ही रखने और पंजाब न भेजने का कोई ठोस कारण नहीं बनता है. साथ ही, यह भी बताया गया है कि उसकी बेटी पंजाब में रहती है.
याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि क्या कोई ऐसा व्यक्ति - जिस पर एक गंभीर सामाजिक उथल-पुथल के दौरान हत्या करने का आरोप है और जिस पर जेल से भागने की असफल कोशिश के कारण आरोप और भी गंभीर हो गए थे, ह व्यक्ति, जिसने पिछले 19 वर्षों से जेल में बिना किसी विवाद या दाग के अपना जीवन बिताया है, क्या वह पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित होने के लिए इस अदालत से आदेश मांग सकता है?
मार्च 2007 में, एक ट्रायल कोर्ट ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी.
अक्टूबर 2010 में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया, साथ ही यह निर्देश दिया कि उसे जीवन भर जेल से रिहा नहीं किया जाएगा.
हवारा की याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उसके और अभियोजन पक्ष दोनों की ओर से दायर अपीलें अभी भी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं.
बेअंत सिंह हत्याकांड में मिली थी उम्रकैद
31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए बम धमाके में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हो गई थी. इस मामले में मार्च 2007 में ट्रायल कोर्ट ने हवारा को मौत की सजा सुनाई थी.
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