उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. बीजेपी प्रदेश में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपना राजनीतिक ताना-बाना बुनने में जुट गई है और पिछले कुछ चुनावों में बिगड़े अपने सामाजिक समीकरणों को दुरुस्त करने की कवायद कर रही है. दूसरी तरफ, सपा यूपी में अपने लंबे सियासी वनवास को खत्म करने के लिए बेताब दिख रही है. इसी कड़ी में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जिला संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ मैराथन बैठकें कर अपने 'मिशन-2027' का अनौपचारिक आगाज कर दिया है.
यूपी चुनाव की बढ़ती सियासी तपिश के बीच बीजेपी ने अगली पीढ़ी के मतदाताओं (Gen-Z और Gen-Alpha) को साधने की तैयारी तेज कर दी है. पार्टी इस बार पारंपरिक प्रचार के अलावा युवा इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को अपने अभियान से जोड़कर अपनी रणनीति को नई सियासी धार देने की योजना बना रही है.
वहीं, सपा ने जमीनी स्तर पर अपनी घेराबंदी मजबूत करते हुए सीधे 'बूथ संपर्क' का अभियान शुरू कर दिया है. सपा के नेता और कार्यकर्ता मंगलवार से घर-घर जाकर बीजेपी सरकार की असफलताओं को उजागर करने और पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार की उपलब्धियों को गिनाने के काम में जुट गए हैं.
बीजेपी का Gen-Z और Gen-Alpha आउटरीच प्लान
बीजेपी की योजना अपने युवा इन्फ्लुएंसर्स और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के जरिए सीधे आम जनता के घर-घर तक पहुंच बनाने की है. इस जनसंपर्क के दौरान मतदाताओं को यह समझाया जाएगा कि वर्ष 2014 के बाद देश के परिदृश्य में और 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार के दौरान क्या-क्या बड़े सकारात्मक बदलाव आए हैं.
पार्टी की मंशा डिजिटल कंटेंट, रील्स और सोशल मीडिया अभियानों के जरिए बुनियादी विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सीधे नए दौर के युवाओं (Gen-Z) तक पहुंचाने की है.
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता आलोक अवस्थी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल में युवाओं और Gen-Z वोटरों को जोड़ने पर खास फोकस रखा जाएगा, ताकि नई पीढ़ी तक सरकार की नीतियों की सही और सटीक पहुंच बनाई जा सके.
2027 के महासमर से पहले यूपी में नए युवा वोटरों को अपने पाले में लाने की यह जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। जहाँ बीजेपी डिजिटल क्रांति और घर-घर संपर्क के सहारे नई पीढ़ी तक पहुंच बना रही है, वहीं विपक्ष रोजगार, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है.
बीजेपी के अभियान पर सपा और कांग्रेस का हमला
बीजेपी के इस नए आउटरीच अभियान पर तंज कसते हुए सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने कहा कि प्रदेश के युवाओं में वर्तमान सरकार की नीतियों के प्रति भारी आक्रोश है. उन्होंने बेरोजगारी और लटकी भर्तियों के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आगामी चुनावों में बीजेपी को युवाओं के तीखे सवालों का सामना करना पड़ेगा और केवल डिजिटल प्रचार से युवाओं को गुमराह नहीं किया जा सकता.
सपा के साथ-साथ कांग्रेस भी इस मुद्दे पर हमलावर नजर आ रही है. कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि उनकी पार्टी भी युवाओं और Gen-Z को जोड़ने के लिए लगातार धरातल पर अभियान चला रही है. उन्होंने बीजेपी पर फर्जी कंटेंट और प्रायोजित वीडियो के ज़रिए भ्रामक राजनीतिक नैरेटिव बनाने का आरोप लगाया और कहा कि बीजेपी को इवेंट मैनेजमेंट छोड़कर जनता के बीच जाकर अपने काम का जवाब देना होगा.
बीजेपी को काउंटर करने का सपा का 'डोर-टू-डोर' दांव
बीजेपी के टेक-सैवी अभियानों का मुकाबला करने के लिए सपा ने अपने सबसे पुराने और आजमाए हुए 'घर-घर जनसंपर्क' हथियार को फिर से धार देना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव के निर्देश के बाद समाजवादी पार्टी ने बूथ स्तर पर चुनाव प्रचार अभियान का बिगुल फूंक दिया है.
पार्टी के बूथ कार्यकर्ता और स्थानीय नेता घर-घर जाकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के संदेश और पार्टी के नए घोषणाओं से जुड़े पोस्टर्स/पम्फलेट्स बाँट रहे हैं. सपा की कोशिश है कि डिजिटल शोर-शराबे से दूर, जमीनी संवाद के जरिए हर एक परिवार तक सीधे अपनी बात पहुँचाई जा सके.
उत्तर प्रदेश का 2027 का रण अब केवल रैलियों और जनसभाओं तक सीमित नहीं रहने वाला है. एक तरफ बीजेपी आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और Gen-Z नैरेटिव के जरिए नए वोटरों को आकर्षित कर रही है, तो दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस जमीनी मुद्दों रोजगार, सामाजिक न्याय)और डोर-टू-डोर कनेक्ट के जरिए बीजेपी की किलेबंदी को भेदने का प्रयास कर रही हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी का युवा वोटर किसके दांव पर अपनी मुहर लगाता है.
समर्थ श्रीवास्तव