समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बसपा प्रमुख मायावती के तीखे हमलों पर पलटवार कर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सपा कभी गठबंधन नहीं तोड़ती, बल्कि पूरी ईमानदारी से साथ निभाती है. अखिलेश ने ये बातें अपने पिता मुलायम सिंह के गुरू उदय प्रताप सिंह की किताब अभिनंदन ग्रंथ के विमोदन के दौरान कहीं हैं.
बसपा प्रमुख मायावती के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आज के दौर में सच बोलना भी गलत माना जाता है और सच बोलना बहुत मुश्किल हो गया है.
सपा नहीं तोड़ती गठबंधन: अखिलेश
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी कभी किसी से गठबंधन नहीं तोड़ती है. समाजवादी पार्टी जब किसी का साथ लेती है तो हमेशा मजबूती से साथ निभाती है. उन्होंने कहा कि सपा किसी को नहीं छोड़ती, बल्कि लोग खुद समाजवादी पार्टी को छोड़कर चले जाते हैं.
अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दलों और जयंत चौधरी का जिक्र करते हुए कहा कि बीजेपी को अपने सभी सहयोगी दलों को ज्यादा से ज्यादा सीटें देनी चाहिए. उन्होंने मांग की कि बीजेपी अपने सहयोगी दलों को कम से कम चार गुना सीटें यानी 120 सीटें दे. अखिलेश ने कहा कि यदि बीजेपी उन्हें 120 सीटें नहीं दे रही है, तो वह पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी का अपमान कर रही है.
मायावती का अखिलेश पर निशाना
इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबा पोस्ट लिखकर अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला था. मायावती ने कहा कि सपा प्रमुख द्वारा अपनी पूर्व सहयोगी पार्टी रालोद और उसके नेता व केंद्रीय मंत्री के बारे में 'चवन्नी से रुपया बनाने' जैसा बयान देना पूरी तरह अमर्यादित, अशोभनीय और अति-शर्मनाक है. मायावती ने मांग की कि इस अहंकारी बयानबाजी के लिए अखिलेश यादव को रालोद, जयंत चौधरी, चौधरी चरण सिंह के परिवार और पूरे जाट समाज से तुरंत माफी मांगनी चाहिए.
मायावती ने अपने पोस्ट में सपा के चाल, चरित्र और चेहरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सपा का रवैया सहयोगियों के प्रति हमेशा संकीर्ण और अविश्वसनीय रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इसी अहंकारी स्वभाव के कारण 1993 में मुलायम सिंह यादव के साथ बना सपा-बसपा गठबंधन टूटा और 2 जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ. इसके बाद अखिलेश यादव के साथ हुआ लोकसभा गठबंधन भी सपा के अहंकारी और स्वार्थी रवैये के कारण टूट गया.
PDA पर बसपा प्रमुख का वार
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा गठबंधन में केवल अपना काम निकालना जानती है और काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदल लेती है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव राजनीतिक स्वार्थ के लिए 'पीडीए' में 'पी' की परिभाषा बदलते रहते हैं.
मायावती ने आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और ब्राह्मण समाज का उत्पीड़न हुआ और केवल अराजक तत्वों का भला हुआ. उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में जनता से सपा को सत्ता में न आने देने की अपील की.
साहित्यकारों को किया सम्मानित
लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने मुलायम सिंह यादव के गुरु उदय प्रताप सिंह की पुस्तक 'अभिनंदन ग्रंथ' का विमोचन किया. इस दौरान कई प्रमुख साहित्यकारों और कवियों को सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वालों में मालविका हरिओम भी शामिल रहीं. मालविका हरिओम 1997 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हरिओम की पत्नी हैं. आईएएस हरिओम वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के प्रमुख सचिव पद पर कार्यरत हैं.
सीएम पर अखिलेश का तंज
इसी कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि जापान वाले बच्चे ने थोड़ी रिसर्च की होती तो वह उनके साथ सेल्फी न लेता. उन्होंने कहा कि सरकार जाने के बाद यही काम रहेगा. अखिलेश ने पीडीए की नई परिभाषा देते हुए कहा कि इसका मतलब 'प्रेम, दया और अपनापन' है. उन्होंने अपनी सरकार के दौरान अक्षयपात्र योजना के तहत बच्चों को दिए गए गर्म खाने का भी उल्लेख किया.
विकास के दावों पर सवाल
अखिलेश यादव ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि मुनाफे के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर चीनी महंगी की जा रही है. एक तरफ प्रति व्यक्ति आय बढ़ने का दावा हो रहा है और दूसरी तरफ 15 करोड़ गरीबों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है. उन्होंने प्रयागराज में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी जलभराव की स्थिति पर सवाल उठाए. साथ ही कहा कि उन्हें किसी बुलेट प्रूफ जैकेट की जरूरत नहीं है.
संतोष शर्मा