'पार्टी कार्यकर्ताओं को खुद करनी पड़ रही है मॉनिटरिंग', अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यशैली पर दागे तीखे सवाल

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे अपनी साख बचाकर रखनी चाहिए. उनके मुताबिक आयोग ने यह साख खो दी है, इसलिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं को लगातार निगरानी करनी पड़ रही है. उन्होंने बंगाल का उदाहरण दिया, जहां कई लोगों को पहले वोट डालने से रोका गया और बाद में उनके वोट को सही बताया गया.

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वोटर लिस्ट पर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को घेरा (Photo: PTI) वोटर लिस्ट पर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को घेरा (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और साख पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अगर आयोग और उसके फैसले निष्पक्ष होते, तो पार्टियों को लगातार निगरानी नहीं करनी पड़ती. उन्होंने कहा कि आयोग अपनी साख खो चुका है और इसी वजह से राजनीतिक कार्यकर्ताओं को खुद मोर्चा संभालना पड़ रहा है. अखिलेश ने बंगाल के चुनाव का उदाहरण दिया और 2022 के बाद अपनी पार्टी के वोट कटने का मुद्दा भी उठाया. उनका सवाल है कि इन मामलों में किसी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

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अखिलेश यादव ने अपनी बात इस तर्क से शुरू की कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है. संविधान ने उसे चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी है, इसलिए उसकी पहली जिम्मेदारी यह है कि लोग उस पर भरोसा कर सकें. उनके मुताबिक हाल के समय में आयोग यह भरोसा बनाए रखने में नाकाम रहा है.

उन्होंने कहा कि इस भरोसे की कमी का सीधा असर यह है कि राजनीतिक दलों के लोगों को हर वक्त नजर रखनी पड़ रही है. यानी जो काम आयोग को निष्पक्ष तरीके से करना चाहिए, उसकी निगरानी अब पार्टी कार्यकर्ता कर रहे हैं.

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बंगाल के चुनाव का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि कई लोग वोट नहीं डाल पाए. उन लोगों से कहा गया कि वे वोट नहीं डाल सकते. लेकिन बाद में यह कहा गया कि उनके वोट सही थे और वे मतदान कर सकते थे. अखिलेश ने यह भी कहा कि वहां सरकार नहीं बनी.

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अपनी पार्टी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 2022 के बाद समाजवादी पार्टी ने ऐसे वोट सामने रखे, जो 2019 में डाले गए थे लेकिन 2022 में किसी कारण से कट गए. अखिलेश का आरोप है कि उस समय केवल मुस्लिम, यादव और समाजवादी पार्टी के वोट काटे गए. इसके बावजूद सरकार बीजेपी की बन गई.

आखिर में उन्होंने सवाल किया कि इन सब मामलों में किसने कार्रवाई की. उनके मुताबिक वोट कटने और वोट रोके जाने के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसी सवाल के जरिए उन्होंने आयोग की जवाबदेही पर जोर दिया. यहां यह समझना जरूरी है कि ये सभी बातें अखिलेश यादव के अपने दावे और आरोप हैं.

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