लखनऊ की सियासत में इन दिनों एक सवाल बार-बार सामने आ रहा है. बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद कौन? इस सवाल का जवाब पिछले एक महीने में इतनी तेजी से बदला है कि पार्टी की अंदरूनी कहानी किसी सियासी ड्रामे से कम नहीं लगती. कभी आकाश आनंद मायावती के बाद सबसे बड़े चेहरे नजर आए, फिर उन्हें बाहर कर दिया गया. उनकी जगह छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाया गया और अब कुछ ही दिनों बाद आकाश की फिर वापसी हो गई.
कहानी की शुरुआत 3 सितंबर से होती है. मायावती ने आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया. वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि आकाश अभी राजनीतिक तौर पर परिपक्व नहीं हैं. इसके सिर्फ सात दिन बाद 10 सितंबर को आकाश को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी बाहर कर दिया गया.
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यह आकाश के लिए पहला झटका नहीं था. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन एक जनसभा में दिए भाषण के बाद मायावती ने उन्हें पद से हटा दिया था. बाद में उनकी वापसी हुई. यानी बुआ और भतीजे के बीच सियासी रिश्ते पहले भी बनते-बिगड़ते रहे हैं.
आकाश बाहर हुए तो ईशान की एंट्री हुई
आकाश के बाहर होने के बाद मायावती ने छोटे भतीजे ईशान आनंद को आगे बढ़ाना शुरू किया. पार्टी की एक बैठक में आकाश मौजूद नहीं थे, जबकि ईशान वहां पहुंचे. उन्हें सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी भी दी गई. इसके बाद मायावती ने अपना रुख और साफ कर दिया. उन्होंने कहा कि आकाश और उनकी बहन दीपिका को आगे कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी और आनंद कुमार के परिवार से सिर्फ ईशान को आगे बढ़ाया जाएगा.
मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में होने का आरोप भी लगाया. उन्होंने साफ कहा कि आकाश को दोबारा लाना संगठन के साथ विश्वासघात जैसा होगा. ईशान को भी चेतावनी दी गई कि पार्टी विरोधी गतिविधि करने पर उन पर भी कार्रवाई हो सकती है. इसके बाद 23 सितंबर को लखनऊ में हुई राष्ट्रीय बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया. लगा कि बसपा में नंबर-2 का चेहरा बदल चुका है. लेकिन यह बदलाव सिर्फ 13 दिन ही टिक पाया.
फिर बदली बाजी, आकाश ने मांगी माफी
आकाश ने इस पूरे विवाद के बीच सार्वजनिक तौर पर चुप्पी तोड़ी. उन्होंने कहा कि वह किसी दूसरे दल में नहीं जा रहे हैं. बसपा उनके लिए सिर्फ पार्टी नहीं, परिवार है और मायावती उनकी राजनीतिक गुरु, प्रेरणा हैं.
सबसे अहम बात उन्होंने अशोक सिद्धार्थ को लेकर कही. आकाश ने मायावती के उस फैसले को पूरी तरह सही बताया, जिसमें उनके ससुर को पार्टी से निकाला गया और उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की बात कही. आकाश ने कहा कि वह मायावती के फैसले के साथ खड़े हैं और व्यक्तिगत रिश्तों से बड़ा पार्टी और आंदोलन का हित है.
आकाश आनंद ने अपनी चुप्पी को लेकर भी सफाई दी. आकाश ने कहा कि वह उस समय सोशल मीडिया से दूर थे, इसलिए मायावती की पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाए. उनकी इसी चुप्पी को गलत समझा गया और अफवाहों को जगह मिली. उन्होंने कहा कि अगर उनकी वजह से मायावती को ठेस पहुंची है तो वह माफी मांगते हैं.
5 अक्टूबर को फिर आकाश की वापसी
इसके बाद 5 अक्टूबर को मायावती ने आकाश को दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया और राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी भी वापस दे दी. मायावती ने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से हटने के बाद आकाश के व्यक्तित्व और काम करने के तरीके में बदलाव दिखाई दिया. पार्टी नेताओं की राय के बाद उन्हें फिर जिम्मेदारी देने का फैसला किया गया. यानी जिस वजह से आकाश से जिम्मेदारी छीनी गई थी, उसी मुद्दे पर उनकी वापसी का रास्ता खुल गया.
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तो बसपा में असली नंबर-2 कौन?
औपचारिक तौर पर देखें तो इस वक्त जवाब आकाश आनंद हैं, क्योंकि राष्ट्रीय संयोजक की कुर्सी उनके पास है. लेकिन ईशान की मौजूदा भूमिका को लेकर अभी कोई नई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है. इसलिए यह कहना मुश्किल है कि वह आगे किस भूमिका में होंगे.
यहीं से बसपा की असली कहानी शुरू होती है. पार्टी में मायावती के बाद किसी दूसरे नेता की जगह कितनी मजबूत होगी, इसका फैसला सिर्फ पद से नहीं, बल्कि मायावती के भरोसे से होता दिखता है. बीते एक महीने में आकाश से ईशान और फिर ईशान से आकाश तक पहुंची कहानी ने यही दिखाया है.
चुनाव से पहले बड़ा सवाल यही है कि क्या आकाश इस बार मायावती का भरोसा लंबे समय तक कायम रख पाएंगे या बसपा में नंबर-2 की यह कुर्सी फिर किसी और के नाम हो जाएगी.
एम. नूरूद्दीन