AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग सीखेंगे कक्षा 9-12 के छात्र, NCERT ने बनाया मॉड्यूल

NCERT ने कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और AI पर एक प्रारंभिक मॉड्यूल विकसित किया है. इसका उद्देश्य छात्रों को AI की बुनियादी समझ देने के साथ आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और समस्या-समाधान जैसे कौशल विकसित करना है.

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NCERT ने कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का मॉड्यूल किया विकसित.(File Photo-ITG) NCERT ने कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग का मॉड्यूल किया विकसित.(File Photo-ITG)

अनमोल नाथ

  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:41 AM IST

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर एक प्रारंभिक मॉड्यूल तैयार किया है.

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में तैयार इस मॉड्यूल का उद्देश्य माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बुनियादी समझ देना है. इसके लिए विद्यार्थियों को पहले से किसी विशेष विषय की जानकारी होना जरूरी नहीं है.

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इस मॉड्यूल के जरिए विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और समस्या-समाधान जैसे कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया है. साथ ही, उन्हें यह समझने में मदद मिलेगी कि एआई किस तरह काम करता है, वास्तविक जीवन में इसका इस्तेमाल कहां और कैसे होता है और इसकी संभावनाएं और सीमाएं क्या हैं.

गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर

यह कार्यक्रम अनुभवात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धति पर केंद्रित है. इसमें चर्चा, व्यावहारिक अभ्यास, प्रयोग और आत्मचिंतन जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है. इन गतिविधियों को डिजिटल उपकरणों की मदद से और उनके बिना भी कराया जा सकता है, ताकि अलग-अलग संसाधनों और सुविधाओं वाले स्कूलों के विद्यार्थी इससे लाभ उठा सकें.

मॉड्यूल में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को समस्याओं की पहचान करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से हल करने की एक पद्धति के रूप में बताया गया है. इसके जरिए विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका और उसके व्यावहारिक उपयोगों की बुनियादी समझ विकसित करने में भी मदद मिलेगी.

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एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर

मॉड्यूल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. इसमें डेटा की गोपनीयता, भ्रामक सूचनाएं, निष्पक्षता, डिजिटल सुरक्षा और एआई से तैयार जानकारी का आलोचनात्मक सत्यापन जैसे विषय शामिल हैं. इस पहल के तहत विद्यार्थियों को एआई से तैयार सामग्री पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उसकी सटीकता और विश्वसनीयता की जांच करना सिखाने पर जोर दिया गया है. साथ ही, तकनीक आधारित शिक्षण में मानवीय विवेक, रचनात्मकता और नैतिक जिम्मेदारी के महत्व को भी बताया गया है.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल

इस मॉड्यूल की शुरुआत स्कूली विद्यार्थियों में तकनीकी जागरूकता और 21वीं सदी के जरूरी कौशल विकसित करने पर केंद्रित राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्राथमिकताओं के अनुरूप है.

कम्प्यूटेशनल थिंकिंग, एआई साक्षरता और नैतिक जागरूकता को एक साथ जोड़कर एनसीईआरटी का उद्देश्य विद्यार्थियों को उभरती प्रौद्योगिकियों को समझने, उनका विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने और उनसे जुड़ी चुनौतियों का जिम्मेदारी के साथ सामना करने के लिए तैयार करना है. यह मॉड्यूल कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है. इसकी संरचना इस तरह रखी गई है कि डिजिटल उपकरणों की सीमित उपलब्धता वाले स्कूलों सहित अलग-अलग शैक्षिक परिवेशों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सके.

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