जानिए H-1B वीजा से जुड़े हर सवाल का जवाब...

अमेरिका में H-1B वीजा बिल अमेरिकी संसद में पेश कर दिया है. आप भी जानिए इससे जुड़े हर सवाल का जवाब...

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H-1B वीजा की पूरी जानकारी H-1B वीजा की पूरी जानकारी

अमेरिका में नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी के बाद उठाए गए सबसे बड़े कदमों में से एक H-1B वीजा बिल अमेरिकी संसद में पेश हो गया है. जानिए क्‍या है H-1B वीजा और क्‍या होगा भारत पर असर...


क्या है H-1B वीजा?
H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी एक्सपर्ट्स को अपने यहां रख सकती हैं. H-1B वीजा के तहत टेक्नोलॉजी कंपनियां हर साल हजारों कर्मचारियों की भर्ती करती हैं.

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किन्‍हें मिलता है ये वीजा?
H-1B वीजा दक्ष पेशेवरों को दिया जाता है, वहीं L1 वीजा किसी कंपनी के कर्मचारी के अमेरिका ट्रांसफर होने पर दिया जाता है. दोनों ही वीजा का भारतीय कंपनियां जमकर इस्तेमाल करती हैं.

इसे पाने के लिए मिनिमम क्वालिफिकेशन क्‍या है? कितने साल के लिए मिलता है?
इसके लिए आवेदक के पास बैचलर डिग्री होना जरूरी है.इसे 6 साल के लिए जारी किया जाता है. बाद में एक्सटेंशन का प्रावधान है.

भारत में चिंता क्‍यों?
एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 86% भारतीयों को H-1B वीजा कंप्यूटर और 46.5% को इंजीनियरिंग पोजीशन के लिए दिया गया है. 2016 में 2.36 लाख लोगों ने H-1B वीजा के लिए अप्लाई किया था जिसके चलते लॉटरी से वीजा दिया गया. अमेरिका हर साल 85 हजार लोगों को H-1B वीजा देता है. इनमें से करीब 20 हजार अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में मास्टर्स डिग्री करने वाले स्टूडेंट्स को जारी किए जाते हैं.

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