कौन हैं IAS तुकाराम मुंढे? 21 साल की सर्विस में 25 ट्रांसफर, अब FDA में बन गए रियल लाइफ सिंघम

महाराष्ट्र में इन दिनों IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे फिर सुर्खियों में हैं. वजह है बॉम्बे हाईकोर्ट का ताजा फैसला. कोर्ट ने उनके नेतृत्व वाले FDA को पुणे की एक मिठाई की दुकान का लाइसेंस सस्पेंड रखने के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि FDA की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन वो ‘ओवरबोर्ड’ जा रहे हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में सबकुछ.

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1100 छापे, 165 लाइसेंस सस्पेंड, करोड़ों में जब्ती.... 3 महीने में ये सब करने वाले IAS तुकाराम कौन हैं? 1100 छापे, 165 लाइसेंस सस्पेंड, करोड़ों में जब्ती.... 3 महीने में ये सब करने वाले IAS तुकाराम कौन हैं?

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 19 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:26 AM IST

महाराष्ट्र में इन दिनों अगर किसी IAS अधिकारी की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वो हैं तुकाराम मुंढे. मई 2026 में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त का पद संभालने के बाद से उन्होंने मिलावटखोरों पर जो शिकंजा कसा है, उसने पूरे राज्य को हिला दिया है. तीन महीने के अंदर 1100 से ज्यादा छापे, 165 लाइसेंस सस्पेंड, करीब 50-55 करोड़ रुपये का असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त, एनालॉग पनीर पर सालभर का बैन और अब बॉलीवुड के बड़े सितारों तक नोटिस देकर मुंढे फिर से सुर्खियों में हैं.

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किसान परिवार से IAS  तक का सफर

तुकाराम हरिभाऊ मुंढे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (औरंगाबाद) से बीए और एमए किया. 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी बने. सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में उनकी सादगी और सख्त शैली के लिए जाना जाता है.

21 साल में 25 तबादले

मुंढे की पहचान सिर्फ सख्ती से नहीं, बार-बार हुए तबादलों से भी है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 21 साल के करियर में उनका 25वां तबादला हो चुका है. कई बार एक ही साल में दो-दो, कभी तीन-तीन ट्रांसफर हुए. हाल के वर्षों में उनकी तुलना हरियाणा के पूर्व आईएएस अशोक खेमका से भी की जाने लगी है. मई 2025 में FDA आयुक्त बनाकर भेजा जाना भी इसी सिलसिले की कड़ी था.

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‘सिंघम IAS’ क्यों कहते हैं?

समर्थक उन्हें ‘सिंघम IAS’ कहते हैं. वजह साफ है, उनका भ्रष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नजर आता है. वो जहां भी गए, सिस्टम सुधारने की कोशिश की. राजनीतिक दबाव या प्रभावशाली लोगों की परवाह किए बिना काम करने की छवि ने उन्हें यह टैग दिया.

FDA में आते ही क्या बदला?

25 मई 2026 को पदभार संभालते ही मुंढे ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू कर दिया. दूध, पनीर, होटल-रेस्तरां, गुटखा-पान मसाला और आयुर्वेदिक दवाओं तक फैली कार्रवाई.

  • 1100 से अधिक छापे और निरीक्षण.
  • 165 लाइसेंस सस्पेंड.
  • असुरक्षित खाद्य पदार्थ (जिनमें 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध शामिल) जब्त, कुल मूल्य करीब 50-55 करोड़ रुपये.
  • जुलाई 2026 में एनालॉग (नकली/नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, बिक्री और इस्तेमाल पर एक साल का बैन. कई होटलों और क्लबों के लाइसेंस इसी वजह से सस्पेंड हुए.
  • आयुर्वेदिक दवा निर्माताओं के 10 लाइसेंस रद्द.
  • गुटखा-पान मसाला के अवैध कारोबार के खिलाफ सैकड़ों FIR और गिरफ्तारियां.
  • हाल में विमल पान मसाला के विज्ञापन को लेकर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस.

मुंढे का साफ रुख है कि दूध सिर्फ खाना नहीं, बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों का पोषण है. इसमें मिलावट बर्दाश्त नहीं होगी. हाईकोर्ट की कैंटीन और IIT बॉम्बे के मेस तक निरीक्षण पहुंचा. अमेजन गोदाम पर भी छापा पड़ा.

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हालिया विवाद और रुख

अगस्त 2026 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे की एक मिठाई की दुकान का लाइसेंस सस्पेंशन रद्द करते हुए FDA को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया. मुंढे ने कहा कि कार्रवाई फूड पॉइजनिंग केस में जनहित में हुई थी. वे लिखित आदेश आने के बाद कानूनी विकल्प अपनाएंगे.

समर्थक कहते हैं कि कुछ हफ्तों में उन्होंने खाद्य सुरक्षा को राज्य की बड़ी बहस बना दिया. कुछ आलोचक मानते हैं कि सख्ती के साथ कारोबारियों को सुधार का समय भी मिलना चाहिए. एकनाथ शिंदे ने हाल में FDA को लीगल टीम समेत मजबूत समर्थन देने की बात कही है. मुंढे खुद कहते रहे हैं कि वे आईएएस से रिटायर होंगे, लेकिन सार्वजनिक सेवा से कभी नहीं. 

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