'बच्चों के जीवन में करना होगा प्रवेश'...प्रधानमंत्री मोदी ने टीचरों से किया अपील  

शिक्षक दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों से कहा कि वे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें बल्कि बच्चों के जीवन को भी समझें. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को हर बच्चे की खूबियों को पहचानना चाहिए, बच्चों का स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना कम करना चाहिए और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए. 

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पीएम मोदी ने की शिक्षकों से बात. पीएम मोदी ने की शिक्षकों से बात.

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 05 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:16 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से कहा कि वे केवल किताबों और तय पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें बल्कि अपने छात्रों की जिंदगी, उनकी रुचियों और परेशानियों को भी समझने की कोशिश करें. शिक्षक दिवस से पहले लोक कल्याण मार्ग स्थित 7 नंबर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेताओं से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों को बेहतर तरीके से समझना चाहिए और उनके रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी समस्याओं से निपटने में उनकी मदद करनी चाहिए. 

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बच्चों के जीवन में करना होगा प्रवेश

प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि हमें किताबों से बाहर निकलना होगा, हमें पाठ्यक्रम से बाहर निकलना होगा.  हमें बच्चों के जीवन में प्रवेश करना होगा. उन्होंने आगे कहा कि यह सुनिश्चित करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है कि बच्चे बचपन से जुड़ी जिज्ञासा, रचनात्मकता और खुलेपन को न खोएं. उन्होंने आगे कहा कि बचपन मरने नहीं देना चाहिए. 

हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें

इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने शिक्षकों से पूछा कि क्या वे उन बच्चों की खूबियों को पहचानने की कोशिश करते हैं, जो पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते. पीएम मोदी ने कहा कि हो सकता है कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा न हो लेकिन भगवान ने हर बच्चे को कोई न कोई खास प्रतिभा दी है. उन्होंने शिक्षकों से उस प्रतिभा को पहचानने की कोशिश करने को कहा. 

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एक शिक्षक ने जवाब दिया कि हर बच्चे में अलग-अलग गुण, प्रतिभा और चुनौतियां होती हैं. शिक्षकों का काम होता है बच्चों के इन खूबियों को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की. बातचीत में यह भी बताया गया कि शिक्षक बच्चों का आत्मविश्वास और स्किल बढ़ाने के लिए कक्षा के बाहर भी अलग-अलग गतिविधियां कराते हैं. 

पीएम मोदी ने एक शिक्षक से अच्छा बोलने के तरीके पूछे. शिक्षक ने बताया कि अच्छा वक्ता बनने के लिए आत्मविश्वास और लगातार अभ्यास जरूरी है. 

स्क्रीन टाइम पर चिंता 

इसके अलावा भी इस बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम की समस्या पर चिंता जताई. उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को खेलकूद, शारीरिक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करने को कहा ताकि वे मोबाइल और दूसरे डिजिटल उपकरणों पर कम समय बिताएं. उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों में शामिल करना जरूरी है, जिससे उनका आत्मविश्वास और सामाजिक स्किल बेहतर हो. 

इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा 

इस बातचीत में पढ़ाई के अलावा कई अन्य जरूरी मुद्दों पर भी चर्चा हुई. एक शिक्षिका ने स्तन कैंसर के बारे में महिलाओं को जागरूक करने के अपने काम के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि जागरूकता और शुरुआती जांच से महिलाओं को समय पर डॉक्टर से सलाह लेने में मदद मिल सकती है. छात्रों में नशीली दवाओं को लेकर जागरूकता पर भी बात हुई. पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए और उनकी समस्याओं को समझना चाहिए. 

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शिक्षकों को बच्चों के जीवन से जुड़ना होगा

पीएम मोदी ने कहा कि शिक्षक का काम सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराना और बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं है बल्कि शिक्षकों को बच्चों को करीब से समझना, उनकी खूबियों को पहचानना और उनकी समस्याओं को जानना भी है. उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों में बातचीत करने, रचनात्मक सोचने और आत्मविश्वास बढ़ाने जैसे स्किल विकसित करने के मौके देने चाहिए. पीएम मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों को बधाई दी और कहा कि बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने में शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है. 

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