परीक्षा शुरू हुई और व्हाट्सएप पर पेपर लीक! ओडिशा में मेडिकल PG परीक्षा में बड़ी सेंध, मची अफरा-तफरी

ओडिशा की मेडिकल पीजी परीक्षा (General Surgery MD/MS) के दौरान व्हाट्सएप ग्रुप पर अचानक प्रश्नपत्र और उनके जवाब तैरने लगे. चेकिंग के दावों के बावजूद परीक्षा हॉल के भीतर मोबाइल पहुंचने और 9:58 बजे पेपर बाहर सर्कुलेट होने ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले में हड़कंप मचने के बाद डिजिटल सबूत खंगाले जा रहे हैं और ग्रुप एडमिन समेत सभी संदिग्धों की तलाश जारी है.

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पेपर लीक पर रोक के लिए सरकार कड़े प्रावधान वाले कानून का प्रस्ताव लेकर आ रही है पेपर लीक पर रोक के लिए सरकार कड़े प्रावधान वाले कानून का प्रस्ताव लेकर आ रही है

अजय कुमार नाथ

  • गंजम, ओडिशा,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:12 AM IST

ओडिशा में आयोजित मेडिकल पोस्टग्रेजुएट (PG) परीक्षा को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आरोप लगे हैं कि 2023–26 बैच के जनरल सर्जरी एमडी/एमएस (General Surgery MD/MS) परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा चलने के दौरान ही एक व्हाट्सएप ग्रुप पर धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा था. इस सनसनीखेज घटना के सामने आते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है. साथ ही, बची हुई परीक्षाओं के लिए सुरक्षा इंतजाम सख्त कर दिए गए हैं.

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व्हाट्सएप पर घूमता रहा पेपर और जवाब
यह पूरा मामला ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के तहत आयोजित मेडिकल पीजी परीक्षा से जुड़ा हुआ है. अधिकारियों के मुताबिक, एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया कि जब छात्र परीक्षा हॉल में पेपर लिख रहे थे, ठीक उसी दौरान जनरल सर्जरी एमडी/एमएस का प्रश्नपत्र एक व्हाट्सएप ग्रुप में सर्कुलेट हो रहा था.

शिकायत में यह खौफनाक दावा भी किया गया है कि कुछ खास व्हाट्सएप नंबरों से परीक्षा के उत्तर भी भेजे जा रहे थे. इस घटना ने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और साख पर बहुत गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

आपातकालीन बैठक और सख्त कदम
मामले की गंभीरता को देखते हुए शैक्षणिक अधिकारियों ने तुरंत एक वर्चुअल इमरजेंसी मीटिंग बुलाई. बैठक में फैसला लिया गया कि बची हुई दो परीक्षाएं बेहद कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत आयोजित की जाएंगी. अधिकारियों ने साफ निर्देश दिए हैं कि परीक्षा केंद्रों के भीतर मोबाइल फोन या किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी, ताकि ऐसी घटना दोबारा न दोहराई जा सके.

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ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के चेयरमैन प्रोफेसर हरेकृष्ण दलाई ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि शिकायत मिलते ही बैठक बुलाई गई थी. उन्होंने कहा कि बची हुई परीक्षाओं के संचालन को लेकर कुलपति द्वारा जारी सभी निर्देशों का बिना किसी ढिलाई के पालन किया जाएगा.

यह पारंपरिक 'पेपर लीक' नहीं: प्रोफेसर दलाई की सफाई
हालांकि, प्रोफेसर दलाई ने एक तकनीकी पहलू को स्पष्ट करते हुए कहा कि इस घटना को पारंपरिक शब्दों में 'पेपर लीक' कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी. उन्होंने तर्क दिया कि पेपर लीक तब माना जाता है जब प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही परीक्षार्थियों तक पहुंच जाए. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, प्रश्नपत्र परीक्षा हॉल में बांटे जाने के बाद बाहर भेजा गया था.

उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह प्रश्नपत्र सुबह 9:58 बजे व्हाट्सएप पर शेयर किया गया था यानी तब, जब परीक्षा शुरू हो चुकी थी और छात्रों के हाथों में पेपर पहुंच चुका था. इसी टाइमलाइन के आधार पर अधिकारी इसे प्री-एग्जाम पेपर लीक मानने के बजाय परीक्षा के दौरान 'अनधिकृत ट्रांसमिशन' (Unauthorised Transmission) का मामला मानकर जांच कर रहे हैं.

सुरक्षा में चूक और व्हाट्सएप ग्रुप की पड़ताल
हालांकि परीक्षा हॉल में एंट्री से पहले छात्रों की चेकिंग और सुरक्षा जांच की जाती है, लेकिन अधिकारियों को अंदेशा है कि कोई छात्र या व्यक्ति चोरी-छिपे मोबाइल या कोई अन्य संचार उपकरण अंदर ले जाने में कामयाब रहा और उसी से पेपर बाहर भेजा गया.

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अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. पुलिस और प्रशासन उस व्हाट्सएप ग्रुप की पहचान करने में जुटे हैं जिस पर पेपर घूम रहा था. ग्रुप के एडमिन, उसे बनाने वाले व्यक्ति और उसमें शामिल तमाम सदस्यों की कुंडली खंगाली जा रही है. साथ ही, उन मोबाइल नंबरों की भी जांच की जा रही है जिनसे पेपर और जवाब शेयर किए गए थे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा था.

डिजिटल सबूतों की हो रही जांच
अधिकारियों ने बताया कि जांच के तहत व्हाट्सएप मैसेज, टाइमस्टैम्प और मोबाइल फोन रिकॉर्ड जैसे डिजिटल सबूतों को खंगाला जा रहा है. जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस लीक का परीक्षा के नतीजों और संचालन पर कितना असर पड़ा.

प्रोफेसर दलाई ने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी छात्र गुट या संगठित नेटवर्क की संलिप्तता का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है और जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. हालांकि, उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि यदि कोई छात्र, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करने या पेपर वायरल करने में दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. घटना के बाद पूरे राज्य के सभी मेडिकल पीजी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है.

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