NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका और 'न्यायिक भ्रष्टाचार' (Corruption in Judiciary) से जुड़े विवादित पाठ को लेकर चल रहे सुओ मोटो (स्वतः संज्ञान) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य कार्यवाही औपचारिक रूप से बंद कर दी है. केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि विवादित अध्याय को पूरी तरह हटाकर नया अध्याय प्रकाशित कर दिया गया है.
क्या था पूरा विवाद?
फरवरी 2026 में NCERT की आठवीं कक्षा की नई सोशल साइंस पाठ्यपुस्तक का चौथा अध्याय हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका (The Role of the Judiciary in Our Society) सुर्खियों में आया था. इस चैप्टर में न्यायपालिका में लंबित मामलों और भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र था.
इस मामले में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने फरवरी 2026 में इस पर स्वतः संज्ञान लिया था. कोर्ट ने कहा था कि इतनी कम उम्र के बच्चों को संस्था के प्रति पूर्वाग्रह वाली बातें सिखाना गलत है. अदालत ने तत्काल प्रभाव से देश भर में हार्ड और सॉफ्ट कॉपी के वितरण पर पूरी तरह रोक लगाते हुए किताबों को जब्त करने के आदेश दिए थे.
अब सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बंद करते हुए क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि विवादित हिस्से को हटा दिया गया है और संशोधित नया चैप्टर किताबों में जोड़कर प्रकाशित कर दिया गया है.
लेखकों को मिली राहत पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पहले कोर्ट ने अध्यापकों और लेखकों (प्रोफेसर माइकल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर आदि) पर सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने 22 मई के अपने आदेश का संदर्भ देते हुए साफ किया कि लेखकों द्वारा ड्राफ्ट न जमा करने की बातें सॉलिसिटर जनरल के बयान थे, कोर्ट का निष्कर्ष नहीं. कोर्ट ने लेखकों पर किसी दुर्भावनापूर्ण इरादे के सीधे आरोप के संदर्भ को रिकॉर्ड से हटा दिया.
वहीं NCERT ने इस चूक के लिए बिना शर्त माफी मांग ली थी और विवादित किताबों को वापस ले लिया था. इन बदलावों और नई किताब के लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मुख्य स्वतः संज्ञान मामले की फाइल को बंद कर दिया.
संजय शर्मा