झारखंड में JSSC CGL और JPSC परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. JSSC CGL परीक्षा रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रार्थियों (याचिकाकर्ताओं) की ओर से बहस पूरी हो गई और उनकी तरफ से जवाब भी दाखिल कर दिया गया.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में सील बंद लिफाफे में दो जांच रिपोर्ट पेश की गईं. हालांकि, सरकार की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा के पास इन रिपोर्ट की प्रति (कॉपी) उपलब्ध न होने के कारण बहस आगे नहीं बढ़ सकी.
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: 'अचानक जांच में कैसे आई तेजी?'
मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट ने जांच की रफ्तार और टाइमलाइन को लेकर राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे. अदालत ने पूछा कि 3 साल से ढील क्यों? अदालत ने ये भी पूछा कि पिछले 3 वर्षों से इस मामले में जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी? अचानक आई तेजी का राज क्या है? अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर इतने समय बाद अचानक से जांच की प्रक्रिया में इतनी तेजी कैसे आ गई?
राज्य सरकार की दलील: 'नेपाल ही नहीं, कई जगह रटवाए गए उत्तर'
हाईकोर्ट के सवालों का जवाब देते हुए सरकार के वकील ने कैबिनेट द्वारा परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया और कई अहम तथ्य रखे. सरकार ने अदालत को बताया कि जब JPSC मामले की जांच शुरू हुई, तो उसके तार सीधे CGL परीक्षा से जुड़ते चले गए. जांच में 'अभय तिवारी' नाम के व्यक्ति का कनेक्शन सामने आया, जिसके आधार पर उसका भाई और भाभी CGL परीक्षा में सेलेक्ट हुए थे.
राज्य सरकार का दावा है कि अभ्यर्थियों को सिर्फ नेपाल ले जाकर ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य ठिकानों पर ले जाकर आंसर रटवाए गए थे. बता दें कि इतने बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के कारण धांधली करने वाले और सही अभ्यर्थियों की पहचान कर पाना नामुमकिन हो गया था, जिसके बाद कैबिनेट को परीक्षा रद्द करने का कड़ा कदम उठाना पड़ा.
कल सुबह 11 बजे फिर होगी सुनवाई
मामले में अब राज्य सरकार की ओर से मुख्य बहस होनी बाकी है. हाईकोर्ट इस मामले पर कल (गुरुवार) सुबह 11 बजे से फिर से सुनवाई शुरू करेगा.
सत्यजीत कुमार