देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों (IITs) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली 'JEE Advanced 2026' परीक्षा का सबसे कठिन हिस्सा वह नहीं था जिसे छात्रों ने छोड़ दिया, बल्कि असली झटका उन सवालों ने दिया जिन्हें हल करने के चक्कर में ज्यादातर अभ्यर्थियों ने गलत जवाब दे दिए और नेगेटिव मार्किंग का शिकार हो गए!
हाल ही में जारी हुई जॉइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी (JIC) की ऑफिशियल रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में दिए गए सवाल-वार आंकड़ों (question-wise statistics) से पता चला है कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित (Mathematics) तीनों विषयों में ऐसे कई सवाल थे, जिन्हें हल करने में 60 से 75 फीसदी तक स्टूडेंट्स ने बड़ी गलतियां कीं.
फिजिक्स में हुई सबसे ज्यादा गलतियां!
आंकड़ों पर नजर डालें तो फिजिक्स पेपर-2 के सवाल नंबर 14 ने स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा छकाया. इस एक अकेले सवाल में 74.84% (लगभग तीन-चौथाई) अभ्यर्थियों ने गलत जवाब दिया! वहीं, केवल 10.59% छात्रों ने ही इस सवाल को छोड़ने की समझदारी दिखाई.
इसके अलावा, फिजिक्स पेपर-1 के क्वेश्चन नंबर 9 में 69.01% और फिजिक्स पेपर-2 के क्वेश्चन नंबर 13 में 67.79% छात्रों के जवाब गलत पाए गए.
| विषय | पेपर | क्वेश्चन नंबर | गलत जवाब देने वाले छात्र (%में) |
| फीजिक्स | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 14 | 74.84% |
| फीजिक्स | पेपर 1 | क्वेश्चन नंबर 9 | 69.01% |
| फीजिक्स | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 13 | 67.79% |
| केमिस्ट्री | पेपर 1 | क्वेश्चन नंबर 10 | 67.06% |
| मैथ | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 11 | 67.24% |
| केमिस्ट्री | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 13 | 66.51% |
| मैथ | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 14 | 66.49% |
| मैथ | पेपर 2 | क्वेश्चन नंबर 18 | 66.01% |
मैथ्स पेपर-2 में लगा नेगेटिव मार्किंग का झटका
गणित विषय में भी स्थिति काफी गंभीर रही. मैथ्स के पेपर-2 में सवाल नंबर 11 (67.24%), सवाल नंबर 14 (66.49%) और सवाल नंबर 18 (66.01%) ऐसे सवाल थे, जहां गलत उत्तरों का आंकड़ा 66% के पार निकल गया.
हालांकि, मैथ्स में कई छात्रों ने समझदारी दिखाते हुए ट्रिकी सवालों को स्किप भी किया. जैसे पेपर 2 के सवाल नंबर 5 को 56.96% और सवाल नंबर 7 को 56.35% छात्रों ने अटेम्प्ट ही नहीं किया.
केमिस्ट्री भी नहीं रही पीछे
केमिस्ट्री पेपर-1 के सवाल नंबर 10 में 67.06% और पेपर-2 के सवाल नंबर 13 में 66.51% गलतियां दर्ज की गईं.
भविष्य के JEE एस्पिरेंट्स के लिए बड़ा सबक
यह डेटा सिर्फ रिपोर्ट भर नहीं है, बल्कि आने वाले सालों में JEE की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है. यह आंकड़े दिखाते हैं कि परीक्षा के दबाव में कहां कॉन्सेप्ट्स कमजोर पड़े और कहां 'ओवर-कॉन्फिडेंस' या ट्रिकी ऑप्शन की वजह से नेगेटिव मार्किंग हुई. ऐसे में भविष्य के एस्पिरेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे इन हाई-एरर रेट वाले सवालों का गहराई से विश्लेषण करें और टाइम मैनेजमेंट के साथ-साथ सही सवाल चुनने की कला सीखें.
आजतक एजुकेशन डेस्क