गुजरात सरकार ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को विनियमित करने के लिए एक नया सर्कुलर जारी किया है. इसके तहत अब स्कूल परिसर में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने के लिए प्रिंसिपल या संस्थान के मुखिया से पहले से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है. साथ ही, हर विजिटर को स्कूल में प्रवेश करने से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी पूरी डिटेल दर्ज करनी होगी.
राज्य शिक्षा विभाग ने प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा, प्राइवेसी और भलाई को सुनिश्चित करने के लिए यह विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. हालांकि, अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए अधिकृत सरकारी अधिकारियों को इस पूर्व लिखित अनुमति की अनिवार्यता से छूट दी गई है.
सर्कुलर में इस बात पर जोर दिया गया है कि 'इन लोको पैरेंटिस' (In Loco Parentis) यानी माता-पिता की भूमिका निभाने के सिद्धांत के तहत राज्य सरकार की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के प्रति एक विशेष जिम्मेदारी है. इसमें संविधान के अनुच्छेद 21 (जो जीवन, गरिमा और प्राइवेसी के अधिकार की गारंटी देता है) और सुप्रीम कोर्ट के के.एस. पुट्टास्वामी (रिटायर्ड) बनाम भारत सरकार के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें प्राइवेसी के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था. इसके अलावा नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ Child Rights (NCPCR) की स्कूल सुरक्षा नीति और गाइडलाइंस का भी जिक्र किया गया है.
प्रिंसिपल की लिखित अनुमति होगी अनिवार्य
नए नियमों के अनुसार, प्रिंसिपल या संस्थान के मुखिया की पूर्व लिखित अनुमति के बिना किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में घुसने की अनुमति नहीं मिलेगी. हर आगंतुक को परिसर में दाखिल होने से पहले विजिटर रजिस्टर में अपनी जानकारी दर्ज करनी ही होगी.
क्लासरूम, लैबोरेट्री, लाइब्रेरी, हॉस्टल, खेल के मैदान, टॉयलेट और उन अन्य क्षेत्रों में जहां छात्र गतिविधियां चल रही हैं, प्रवेश केवल प्रिंसिपल की लिखित मंजूरी और प्रिंसिपल, किसी स्कूल टीचर या अधिकृत स्कूल अधिकारी की मौजूदगी में ही दिया जाएगा.
फोटोग्राफी और रिकॉर्डिंग पर सख्त रोक
सर्कुलर के तहत छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों से जुड़े किसी भी प्रकार के फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइव स्ट्रीमिंग पर बिना प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के पूरी रोक लगा दी गई है. ऐसी गतिविधियां केवल कानूनी उद्देश्यों के लिए ही मंजूर की जा सकती हैं.
स्कूल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों की फोटो, वीडियो या पर्सनल जानकारी को इस तरह से कलेक्ट, पब्लिश या सर्कुलर न किया जाए जिससे उनकी प्राइवेसी, गरिमा या सुरक्षा खतरे में पड़े. विजिटर्स को भी बिना प्रिंसिपल की लिखित अनुमति के किसी बच्चे की व्यक्तिगत जानकारी इकट्ठा करने या उसकी पहचान/फोटो पब्लिश करने की अनुमति नहीं होगी, खासकर तब जब यह बच्चे के हित में न हो.
अनधिकृत प्रवेश पर होगी कड़ी कार्रवाई
यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के स्कूल में प्रवेश करता है, परिसर छोड़ने से मना करता है, अनधिकृत फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी का प्रयास करता है, या स्कूल के माहौल को बाधित करता है, तो प्रिंसिपल को तुरंत स्थानीय पुलिस और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी को सूचित करना होगा.
प्रिंसिपल के पास ऐसे विजिटर्स की एंट्री बैन करने का भी अधिकार होगा जिनकी मौजूदगी से स्कूल की सुरक्षा, प्राइवेसी, अनुशासन या शैक्षणिक माहौल पर असर पड़ सकता है. स्कूल अथॉरिटी किसी भी बाहरी व्यक्ति को परिसर छोड़ने का निर्देश दे सकती है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस की मदद ले सकती है.
नियमों का सख्ती से पालन
सभी निरीक्षण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस सर्कुलर का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें. मामले की परिस्थितियों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, पॉक्सो (POCSO) एक्ट 2012, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015, आईटी एक्ट 2000 और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है.
आजतक एजुकेशन डेस्क