पहले एक डिमांड, फिर दो और अब 13 शर्तें... बिहार के छात्र आंदोलन में पल-पल बदल रहे हालात

शुरुआत में छात्रों का एक ही मुख्य नारा था कि शिक्षा विभाग TRE 4.0 का नोटिफिकेशन तुरंत जारी करे. जब छात्र आमरण अनशन पर बैठे, तो दबाव में आकर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 32,388 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया. लेकिन नोटिफिकेशन आते ही विरोध का दायरा बढ़ गया. छात्र संगठनों ने 13 मांगें रखीं और उसमें 5 और जोड़ दीं.

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जानिए 13 मांगों के बाद अब कौन-सी नई शर्तों पर उलझा पेंच (Representative image, PTI) जानिए 13 मांगों के बाद अब कौन-सी नई शर्तों पर उलझा पेंच (Representative image, PTI)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • पटना ,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्तियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब एक बेहद पेचीदा मोड़ ले चुका है. जिस आंदोलन की शुरुआत महज एक प्राथमिक मांग यानी BPSC TRE 4.0 का नोटिफिकेशन जारी करने से हुई थी. वह अब 13 सूत्रीय मांगों की एक लंबी फेहरिस्त में तब्दील हो चुका है.  पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर डटे अभ्यर्थियों और छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि नोटिफिकेशन जारी होना लड़ाई का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है.  

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कैसे बदलता गया आंदोलन का दायरा? 

शुरुआत में छात्रों का एक ही मुख्य नारा था कि शिक्षा विभाग TRE 4.0 का नोटिफिकेशन तुरंत जारी करे. जब छात्र आमरण अनशन पर बैठे, तो दबाव में आकर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 32,388 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया. लेकिन नोटिफिकेशन आते ही विरोध का दायरा बढ़ गया. अभ्यर्थियों ने दो नई शर्तें सामने रख दीं जिसमें कहा कि परीक्षा केवल एक ही चरण में कराई जाए और निगेटिव मार्किंग को पूरी तरह हटाया जाए.  फिर देखते ही देखते अब विभिन्न छात्र गुटों और प्रतियोगी अभ्यर्थियों की कुल 13 मांगें टेबल पर आ गई हैं. 

सरकार के सामने रखी गई 13 सूत्रीय मांगें 

BPSC TRE 4.0 में सिंगल ट‍ियर एग्जाम: परीक्षा प्रक्रिया को दो चरणों के बजाय एक ही पारदर्शी चरण में पूरा किया जाए.

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नेगेटिव मार्किंग की समाप्ति: TRE 4.0 और अन्य प्राथमिक शिक्षक बहाली परीक्षाओं से नेगेटिव मार्किंग हटाई जाए.  

सख्त डोमिसाइल नीति लागू करना: बिहार की शिक्षक बहाली और राज्य स्तरीय नौकरियों में स्थानीय (बिहार के मूल निवासी) अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए.

BSSC की लंबित भर्तियों को पूरा करना: सालों से अटकी पड़ी BSSC (प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्नातक स्तरीय और इंटर स्तरीय) प्रक्रियाओं के परीक्षा परिणाम और नियुक्ति पत्र जल्द जारी किए जाएं.  

लाइब्रेरियन बहाली का नया विज्ञापन: वर्षों से लंबित पड़े स्कूल व कॉलेज लाइब्रेरियन के हजारों पदों पर तुरंत नया नोटिफिकेशन निकाला जाए.

70वीं BPSC परीक्षा धांधली की जांच: 70वीं BPSC पीटी परीक्षा की गड़बड़ियों पर नकेल कसी जाए तथा पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित हो.  

पेपर लीक विरोधी कड़ा कानून व ब्लैकलिस्टिंग: प्रश्नपत्र लीक करने वाले माफिया पर कठोर कार्रवाई हो और ब्लैकलिस्टेड व विवादित वेंडर कंपनियों को परीक्षा से बाहर किया जाए.  

उम्र सीमा में छूट: कोरोना काल और भर्ती में हुए वर्षों के विलंब को देखते हुए सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में छूट मिले.

दारोगा, सिपाही व AEDO की नई वैकेंसियों की घोषणा: बिहार पुलिस, सब-इंस्पेक्टर (SI) और सहायक प्रवर्तन दरोगा (AEDO) के नए पदों का विज्ञापन जारी हो.  

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सप्लीमेंट्री रिजल्ट (पूरक परिणाम) जारी करना: TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के बचे हुए खाली पदों पर तुरंत सप्लीमेंट्री/वेटिंग लिस्ट रिजल्ट प्रकाशित किया जाए.  

UGC नियम 2018 लागू करना: विश्वविद्यालयों में गेस्ट टीचरों/असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली में UGC के 2018 नियमों का पूर्ण पालन और आयु सीमा 55 वर्ष की जाए.  

सीटों की संख्या में इजाफा: TRE 4.0 सहित आने वाली सभी राज्य स्तरीय वैकेंसियों में खाली पड़े वास्तविक पदों के अनुसार सीटें बढ़ाई जाएं.

आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज केस वापस लेना: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज व दर्ज प्राथमिकियों (FIR) को तुरंत वापस लिया जाए.  

'13 मांगों के बाद भी नहीं थमा गुस्सा, अब 5 नई शर्तें लागू

पटना के गर्दनीबाग में 13 सूत्रीय मांगों पर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ प्रशासनिक लिस्ट तक सीमित नहीं रहा है. जैसे-जैसे प्रदर्शन का दायरा बढ़ रहा है, प्रतियोगी अभ्यर्थियों और विभिन्‍न छात्र यूनियनों की तरफ से 5 और नई जमीनी शर्तें खुलकर सामने आ गई हैं.  इन नई मांगों के सामने आते ही शिक्षा विभाग से लेकर आयोग के दफ्तरों तक हड़कंप मच गया है.

ये हैं 5 नई मांगें 

1. 'वन कैंडिडेट, वन रिजल्ट' नीति: शिक्षक भर्ती (TRE) जैसी बड़ी परीक्षाओं में एक ही अभ्यर्थी का चयन कई अलग-अलग श्रेणियों या विषयों में होने से सीटें खाली रह जाती हैं. छात्रों की मांग है कि तकनीक का इस्तेमाल कर एक उम्मीदवार को सिर्फ एक ही अंतिम सीट पर आवंटित किया जाए.  

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2. OMR शीट की कार्बन कॉपी और आंसर की की पारदर्शिता: परीक्षा खत्म होते ही अभ्यर्थियों को उनकी हल की गई OMR शीट की कार्बन कॉपी तुरंत सौंपी जाए. साथ ही कट-ऑफ मार्क्स घोषित करने के साथ-साथ सभी प्रश्नों की आधिकारिक 'आंसर की' सार्वजनिक की जाए.  

3. हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों से भेदभाव खत्म हो: BPSC सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में हिंदी माध्यम के परीक्षार्थियों के साथ हो रहे कथित सौतेले व्यवहार और मूल्यांकन में असमानता पर तुरंत रोक लगाई जाए.

4. अनुबंध का वेटेज पूरी तरह खत्म हो: BSSC CGL और तकनीकी पदों की भर्तियों में संविदा कर्मियों को दिए जाने वाले अतिरिक्त वेटेज (मार्क्स) को तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि फ्रेश तैयारी करने वाले युवाओं को समान अवसर मिले.

5. धानसभा घेराव और अनिश्चितकालीन अनशन का अल्टीमेटम: छात्र नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर मांगों का लिखित हल नहीं निकला, तो गर्दनीबाग में जारी अनशन सीधे बिहार विधानसभा के घेराव में तब्दील हो जाएगा.

छात्र बनाम छात्र' की स्थिति 
गर्दनीबाग में हालात इसलिए भी जटिल हो गए हैं क्योंकि अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई अभ्यर्थी संगठन (जैसे असिस्टेंट प्रोफेसर व पीएचडी स्कॉलर्स) भी अपनी मांगों को लेकर एक साथ सड़कों पर आ चुके हैं. वहीं, राज्य की विपक्षी पार्टियों के नेताओं के आंदोलन स्थल पहुंचने से प्रशासनिक गलियारों में भी बेचैनी बढ़ गई है.  

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